देश में पेट्रोल और डीजल के दामों को लेकर एक बार फिर अनिश्चितता का माहौल बन गया है। ईंधन कीमतों में संभावित बढ़ोतरी की आशंकाओं के बीच आम जनता की चिंता बढ़ती जा रही है, हालांकि फिलहाल सरकार की ओर से किसी तरह की आधिकारिक बढ़ोतरी की घोषणा नहीं की गई है। इसी बीच बीते सिर्फ 48 घंटों में तीन अहम आर्थिक और नीतिगत फैसले सामने आए हैं, जिनमें गोल्ड इम्पोर्ट ड्यूटी में बदलाव से लेकर शुगर एक्सपोर्ट पर रोक तक शामिल है। दूसरी ओर, रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) के गवर्नर ने भी ईंधन कीमतों में संभावित बढ़ोतरी को लेकर संकेत दिए हैं, जिससे बाजार में हलचल तेज हो गई है।
इसके साथ ही यह भी ध्यान देने वाली बात है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पहले ही ऊर्जा खपत कम करने के लिए वर्क फ्रॉम होम (WFH) और ऑनलाइन क्लासेज जैसी व्यवस्थाओं को अपनाने की सलाह दे चुके हैं, जिससे ऊर्जा मांग पर दबाव कम किया जा सके।
पेट्रोलियम मंत्री का बयान और आपूर्ति की स्थितिमंगलवार को पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने मौजूदा हालात पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि यह आकलन करना जरूरी है कि पेट्रोलियम कंपनियां कितने समय तक लागत से कम कीमत पर पेट्रोल, डीजल और LPG उपलब्ध करा सकती हैं। हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि कीमतों में तत्काल बढ़ोतरी को लेकर कोई अंतिम निर्णय नहीं लिया गया है।
उन्होंने देश के ईंधन भंडार की स्थिति बताते हुए कहा कि भारत के पास इस समय लगभग 60 दिनों का क्रूड ऑयल रिजर्व, 60 दिनों का LNG स्टॉक और करीब 45 दिनों का LPG भंडार उपलब्ध है। यह स्थिति फिलहाल स्थिरता का संकेत देती है, लेकिन वैश्विक संकट के चलते जोखिम बना हुआ है।
RBI गवर्नर ने क्या कहा?रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने स्विट्जरलैंड में एक बयान देते हुए चेतावनी दी कि यदि पश्चिम एशिया में चल रहा तनाव लंबे समय तक जारी रहता है, तो भारत को ईंधन कीमतों में बढ़ोतरी करनी पड़ सकती है।
उन्होंने कहा कि भारत अपनी ऊर्जा और उर्वरक जरूरतों के लिए काफी हद तक आयात पर निर्भर है, और वैश्विक आपूर्ति बाधाओं का असर अब देश की अर्थव्यवस्था पर दिखने लगा है। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि यदि स्थिति नहीं सुधरी तो लागत का कुछ हिस्सा उपभोक्ताओं पर डाला जा सकता है।
उनके अनुसार, यह केवल समय की बात है कि अंतरराष्ट्रीय दबाव का असर घरेलू कीमतों पर दिखाई दे। वर्तमान में अमेरिका-ईरान तनाव के कारण स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में शिपिंग बाधित हो रही है, जिससे तेल आपूर्ति प्रभावित हुई है।
सोने-चांदी पर बढ़ा आयात शुल्कविदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव कम करने और गैर-जरूरी आयात को नियंत्रित करने के लिए सरकार ने सोने और चांदी पर आयात शुल्क बढ़ाकर 15 प्रतिशत कर दिया है। भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा गोल्ड कंज्यूमर है, और बढ़ती मांग के कारण विदेशी मुद्रा पर दबाव लगातार बढ़ रहा है।
नई व्यवस्था के तहत सोना और चांदी पर इम्पोर्ट ड्यूटी को 6 प्रतिशत से बढ़ाकर 15 प्रतिशत कर दिया गया है। वहीं प्लैटिनम पर शुल्क 6.4 प्रतिशत से बढ़ाकर 15.4 प्रतिशत किया गया है। ये नए नियम 13 मई से प्रभावी होंगे।
सरकार ने सोने-चांदी के डोरे, सिक्कों और अन्य उत्पादों पर भी टैक्स स्ट्रक्चर में बदलाव किया है, जिसका असर ज्वेलरी सेक्टर पर पड़ने की संभावना है।
अमूल दूध हुआ महंगामहंगाई के दबाव के बीच आम उपभोक्ताओं को एक और झटका लगा है। अमूल ने पूरे देश में दूध की कीमतों में 2 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी की घोषणा की है। नई दरें 14 मई से लागू हो चुकी हैं।
गुजरात कोऑपरेटिव मिल्क मार्केटिंग फेडरेशन (GCMMF) के अनुसार, दूध उत्पादन और वितरण की लागत में लगातार वृद्धि हो रही है। कंपनी ने बताया कि पशु आहार, पैकेजिंग मटेरियल और ईंधन की कीमतों में तेज बढ़ोतरी के कारण यह फैसला लेना पड़ा है।
गौरतलब है कि इससे पहले अमूल ने पिछले वर्ष 1 मई को भी कीमतों में संशोधन किया था।
चीनी निर्यात पर रोकसरकार ने घरेलू बाजार में आपूर्ति बनाए रखने और कीमतों को नियंत्रित करने के लिए चीनी के निर्यात पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी है। यह प्रतिबंध 30 सितंबर तक लागू रहेगा या अगले आदेश तक जारी रहेगा।
विदेश व्यापार महानिदेशालय (DGFT) की अधिसूचना के अनुसार, चीनी निर्यात नीति को “प्रतिबंधित” से बदलकर “निषिद्ध” कर दिया गया है। यह आदेश 13 मई को जारी किया गया था और इसका उद्देश्य घरेलू उपलब्धता को स्थिर रखना है।
इस फैसले से वैश्विक चीनी व्यापार पर भी असर पड़ने की संभावना जताई जा रही है, जबकि घरेलू बाजार में कीमतों को नियंत्रित करने में मदद मिलने की उम्मीद है।