'मेरा 90% काम समाजसेवा है, इसलिए चुनाव प्रचार की जरूरत नहीं पड़ती', पुणे में नितिन गडकरी का बयान

केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने शनिवार को पुणे में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान राजनीति और चुनावी माहौल को लेकर अहम टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि वे चुनाव प्रचार में ज्यादा सक्रिय नहीं रहते, क्योंकि उनके अनुसार एक जनप्रतिनिधि के रूप में उनका अधिकांश समय सामाजिक कार्यों और जनसेवा में ही व्यतीत होता है।

“राजनीति में हूं, लेकिन मेरा फोकस समाजसेवा पर ज्यादा”—गडकरी

पुण्य भूषण फाउंडेशन द्वारा पुणे के प्रतिष्ठित नागरिकों को सम्मानित करने के लिए आयोजित इस समारोह में नितिन गडकरी मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। कार्यक्रम के दौरान उन्होंने उद्योगपति अभय फिरोदिया को ‘पुण्य भूषण’ सम्मान प्रदान किया।

अपने संबोधन में गडकरी ने कहा, “मैं एक राजनेता जरूर हूं, लेकिन मेरा लगभग 90 प्रतिशत समय समाजसेवा से जुड़े कार्यों में लगता है। इसी कारण मुझे चुनाव प्रचार की विशेष आवश्यकता महसूस नहीं होती।”

उन्होंने आगे कहा कि अभय फिरोदिया केवल एक सफल उद्योगपति ही नहीं, बल्कि नैतिक मूल्यों और सामाजिक जिम्मेदारी को निभाने वाले व्यक्ति भी हैं, जो अपने व्यवसाय में ईमानदारी को प्राथमिकता देते हैं।

केंद्रीय मंत्री ने ऑटोमोबाइल सेक्टर पर भी बात करते हुए कहा कि यह उद्योग देश के युवाओं के लिए बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर पैदा कर रहा है। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि इलेक्ट्रिक वाहनों का बाजार तेजी से विस्तार कर रहा है और पारंपरिक पेट्रोल-डीजल वाहनों की तुलना में ईवी की मांग लगातार बढ़ रही है, जिसके चलते उनकी डिलीवरी में भी समय लग रहा है।
नितिन गडकरी का राजनीतिक सफर: छात्र राजनीति से राष्ट्रीय नेतृत्व तक

नितिन गडकरी का राजनीतिक सफर 1970 के दशक में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) से शुरू हुआ, जहां से उन्होंने छात्र राजनीति में कदम रखा। आपातकाल के दौर में उन्होंने सक्रिय भूमिका निभाई और संगठन में अपनी पहचान बनाई।

महाराष्ट्र की राजनीति में उनका प्रभाव तब और बढ़ा जब 1995 में उन्हें राज्य सरकार में लोक निर्माण विभाग (PWD) मंत्री बनाया गया। इस दौरान उन्होंने मुंबई-पुणे एक्सप्रेसवे और मुंबई में 50 से अधिक फ्लाईओवर परियोजनाओं को आकार देकर खुद को “इंफ्रास्ट्रक्चर मैन” के रूप में स्थापित किया।

उनकी संगठनात्मक क्षमता को देखते हुए 2009 में उन्हें भारतीय जनता पार्टी का राष्ट्रीय अध्यक्ष नियुक्त किया गया, जो उनके राजनीतिक करियर का महत्वपूर्ण पड़ाव साबित हुआ।

2014 के बाद से वे लगातार केंद्र सरकार में सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। इस दौरान उन्होंने देशभर में राष्ट्रीय राजमार्गों के विस्तार में अहम भूमिका निभाई है और अपनी कार्यशैली के कारण राजनीतिक विरोधियों से भी सम्मान हासिल किया है।