प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की इटली यात्रा के दौरान सामने आए एक छोटे से वायरल वीडियो ने न सिर्फ सोशल मीडिया पर हलचल मचा दी, बल्कि भारतीय शेयर बाजार में भी अप्रत्याशित उथल-पुथल पैदा कर दी। इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी द्वारा साझा किए गए इस वीडियो में पीएम मोदी उन्हें भारत की लोकप्रिय ‘मेलोडी’ टॉफी गिफ्ट करते नजर आए। जैसे ही यह क्लिप इंटरनेट पर वायरल हुई, “Melody” शब्द अचानक ट्रेंड करने लगा और इसका असर बाजार की गतिविधियों पर भी दिखने लगा।
वीडियो वायरल होते ही कई निवेशकों ने बिना पूरी जानकारी लिए ‘Parle’ नाम से जुड़ी कंपनियों में खरीदारी शुरू कर दी। इसी अफरातफरी में पारले इंडस्ट्रीज के शेयरों में अचानक तेज उछाल देखने को मिला और बुधवार के कारोबारी सत्र में यह स्टॉक 5% के अपर सर्किट के साथ 5.25 रुपये तक पहुंच गया।
असली गलती कहां हुई?असल भ्रम की जड़ यह रही कि मेलोडी टॉफी बनाने वाली कंपनी पारले प्रोडक्ट्स है, जो पार्ले-जी बिस्किट, मोनाको, हाइड एंड सीक और मैंगो बाइट जैसे प्रसिद्ध ब्रांड बनाती है। लेकिन ध्यान देने वाली बात यह है कि पारले प्रोडक्ट्स शेयर बाजार में लिस्टेड ही नहीं है। दूसरी ओर, जिन पारले इंडस्ट्रीज के शेयरों में तेजी देखी गई, उनका कन्फेक्शनरी या फूड बिजनेस से कोई संबंध नहीं है। सिर्फ नाम की समानता के कारण निवेशकों ने गलत कंपनी में पैसा लगा दिया और यही वजह रही कि स्टॉक में अचानक तेज उछाल आ गया।
आखिर क्या करती है Parle Industries?पारले इंडस्ट्रीज का मुख्य कारोबार रियल एस्टेट, इंफ्रास्ट्रक्चर और पेपर वेस्ट रिसाइक्लिंग से जुड़ा हुआ है। यह कंपनी पहले कभी पारले-बिसलरी समूह से जुड़ी थी, लेकिन समय के साथ इसका उस समूह से कोई स्वामित्व या कारोबारी संबंध नहीं रह गया है। वर्तमान में यह एक अलग बिजनेस इकाई के रूप में काम कर रही है।
निवेशकों के लिए बड़ा सबकयह पूरा मामला एक बार फिर यह दिखाता है कि सोशल मीडिया पर वायरल ट्रेंड या अधूरी जानकारी के आधार पर निवेश करना कितना जोखिम भरा हो सकता है। कई बार निवेशक केवल नाम या चर्चा के आधार पर जल्दबाजी में फैसला ले लेते हैं, जिससे गलत स्टॉक चुनने की संभावना बढ़ जाती है और नुकसान का खतरा भी उतना ही अधिक हो जाता है।