महंगाई की मार झेल रहे आम लोगों को एक और झटका लगा है। घरेलू एलपीजी गैस सिलेंडर की कीमतों में फिर बढ़ोतरी कर दी गई है। 14.2 किलोग्राम वाले घरेलू गैस सिलेंडर के दाम में इस बार 29 रुपये का इजाफा किया गया है। राजधानी दिल्ली में अब यह सिलेंडर 913 रुपये की जगह 942 रुपये में मिलेगा। नई दरें 7 जून से प्रभावी हो गई हैं। लगातार बढ़ती ईंधन लागत और अंतरराष्ट्रीय बाजार में अस्थिरता का असर अब सीधे घरेलू उपभोक्ताओं की जेब पर पड़ रहा है।
सरकारी तेल विपणन कंपनियों का कहना है कि वैश्विक स्तर पर ऊर्जा की कीमतों में आई तेजी के कारण ईंधन क्षेत्र पर दबाव लगातार बढ़ रहा है। इसी वजह से एलपीजी के अलावा पेट्रोल, डीजल और सीएनजी जैसे अन्य ईंधनों की कीमतों में भी बढ़ोतरी देखने को मिली है। विशेषज्ञों का मानना है कि अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों में सुधार नहीं होने तक उपभोक्ताओं को राहत मिलने की संभावना कम दिखाई दे रही है।
पश्चिम एशिया में तनाव का सीधा असरऊर्जा बाजार में मौजूदा उथल-पुथल की एक बड़ी वजह पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव को माना जा रहा है। क्षेत्र में संघर्ष बढ़ने से वैश्विक स्तर पर तेल और गैस की आपूर्ति प्रभावित हुई है। इसका असर केवल भारत ही नहीं बल्कि उन तमाम देशों पर पड़ा है जो खाड़ी क्षेत्र से ऊर्जा आयात पर निर्भर हैं। विशेष रूप से स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज से होने वाली आपूर्ति में रुकावट ने स्थिति को और जटिल बना दिया है।
जानकारी के मुताबिक, सरकारी तेल कंपनियों को घरेलू एलपीजी सिलेंडर की बिक्री पर लंबे समय से नुकसान उठाना पड़ रहा था। सूत्रों का दावा है कि प्रत्येक सिलेंडर पर कंपनियों को करीब 703 रुपये तक का घाटा हो रहा था। इसी आर्थिक दबाव को कम करने के लिए कीमतों में संशोधन का फैसला लिया गया है।
मार्च के बाद दूसरी बार बढ़े दामगौरतलब है कि यह पहली बार नहीं है जब हाल के महीनों में घरेलू गैस महंगी हुई हो। इससे पहले 7 मार्च को भी एलपीजी सिलेंडर की कीमतों में 60 रुपये की बढ़ोतरी की गई थी। अब तीन महीने के भीतर दूसरी बार दाम बढ़ने से उपभोक्ताओं की चिंता बढ़ गई है। मार्च और जून की बढ़ोतरी को जोड़ें तो 14.2 किलोग्राम वाले घरेलू सिलेंडर की कीमत कुल 89 रुपये तक बढ़ चुकी है।
लगातार बढ़ते गैस के दामों का असर सीधे घरों के मासिक बजट पर पड़ रहा है। खासकर मध्यम वर्ग और सीमित आय वाले परिवारों के लिए रसोई का खर्च पहले की तुलना में और अधिक बढ़ गया है।
स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज खुला तो मिल सकती है राहतभारत अपनी ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात के जरिए पूरा करता है। देश में इस्तेमाल होने वाले कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस का महत्वपूर्ण भाग खाड़ी देशों से आता है। ऐसे में क्षेत्र में किसी भी तरह की अस्थिरता का असर भारतीय बाजार पर तुरंत दिखाई देता है।
फिलहाल ईरान और अमेरिका के बीच संघर्ष की स्थिति पूरी तरह समाप्त नहीं हुई है। हालांकि दोनों देशों के बीच युद्धविराम लागू है, लेकिन समय-समय पर छोटे स्तर की सैन्य गतिविधियों और तनाव की खबरें सामने आती रहती हैं। इसी वजह से स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज के जरिए होने वाली ऊर्जा आपूर्ति सामान्य नहीं हो पाई है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि आने वाले समय में ईरान और अमेरिका के बीच चल रही वार्ताएं सफल रहती हैं और कोई स्थायी समझौता हो जाता है, तो स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज से जहाजों की आवाजाही फिर से सुचारु हो सकती है। ऐसी स्थिति में वैश्विक ऊर्जा बाजार पर दबाव कम होगा और भारत समेत कई देशों में गैस तथा अन्य ईंधनों की कीमतों में राहत मिलने की उम्मीद बढ़ सकती है।