LPG बुकिंग नियमों में बदलाव की चर्चा पर लगा विराम, 25-45 दिन वाली खबर पर सरकार ने कही यह बात

सोशल मीडिया पर तेजी से फैल रही सूचनाओं के बीच रसोई गैस यानी एलपीजी को लेकर हाल ही में कई तरह के दावे सामने आए, जिन्होंने आम लोगों के बीच भ्रम की स्थिति पैदा कर दी। खासतौर पर जब बात घर के खर्च से जुड़ी हो, तो ऐसी खबरें लोगों की चिंता बढ़ा देती हैं। बीते दिनों कुछ रिपोर्ट्स और वायरल पोस्ट्स में कहा गया कि सरकार ने एलपीजी सिलेंडर की बुकिंग से जुड़े नियमों में बड़ा बदलाव कर दिया है। इन दावों में उज्ज्वला योजना और सामान्य कनेक्शन धारकों के लिए नई समय-सीमा लागू होने की बात कही गई थी। हालांकि, अब सरकार ने इन खबरों पर आधिकारिक प्रतिक्रिया देते हुए सच्चाई स्पष्ट कर दी है।

वायरल दावों के मुताबिक, उज्ज्वला योजना (PMUY) के लाभार्थियों को अब सिलेंडर बुक करने के लिए 45 दिन का इंतजार करना होगा। वहीं, सामान्य सिंगल सिलेंडर कनेक्शन वाले उपभोक्ताओं के लिए 25 दिन और डबल सिलेंडर कनेक्शन धारकों के लिए 35 दिन की समय-सीमा तय किए जाने की बात कही जा रही थी। इन खबरों के सामने आते ही कई लोगों ने समय से पहले ही सिलेंडर बुक कराना शुरू कर दिया, जिससे पैनिक बुकिंग की स्थिति बन गई।
इन तमाम दावों के बीच केंद्र सरकार ने स्थिति साफ करते हुए बताया कि एलपीजी बुकिंग नियमों में किसी भी तरह का नया बदलाव नहीं किया गया है। सरकार ने स्पष्ट किया कि मौजूदा व्यवस्था पहले की तरह ही लागू है। शहरी क्षेत्रों में सिलेंडर रीफिल के लिए 25 दिनों की समय-सीमा पहले से ही लागू है, जबकि ग्रामीण इलाकों में यह अवधि 45 दिन की ही बनी हुई है। यह नियम उज्ज्वला योजना और सामान्य, दोनों तरह के कनेक्शन धारकों पर समान रूप से लागू होते हैं।

सरकार ने लोगों से अपील की है कि वे सोशल मीडिया पर फैल रही अपुष्ट और भ्रामक खबरों पर भरोसा न करें और न ही उन्हें आगे साझा करें। इसके साथ ही यह भी आश्वासन दिया गया है कि देश में एलपीजी की कोई कमी नहीं है और आपूर्ति पूरी तरह सामान्य है। इसलिए अनावश्यक घबराहट में आकर सिलेंडर की जल्दबाजी में बुकिंग करने की जरूरत नहीं है।

कुल मिलाकर, एलपीजी बुकिंग नियमों को लेकर जो भी नई बातें सामने आ रही थीं, वे पूरी तरह गलत साबित हुई हैं। उपभोक्ताओं को सलाह दी गई है कि वे केवल आधिकारिक सूचनाओं पर ही भरोसा करें और किसी भी तरह की अफवाह से दूर रहें, ताकि अनावश्यक परेशानी से बचा जा सके।