भारत के उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ के अप्रत्याशित इस्तीफे ने देश की राजनीति में हलचल मचा दी है। उन्होंने अपने इस्तीफे का कारण स्वास्थ्य समस्याएं बताया, लेकिन राजनीतिक गलियारों में यह मान लिया गया है कि तस्वीर उतनी सीधी नहीं है जितनी दिख रही है। कांग्रेस और विपक्षी दलों ने इस कदम को एक राजनीतिक संकट और संवैधानिक असहमति से जोड़कर देखा है। NDTV, Outlook और The Week जैसी विश्वसनीय मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि इसके पीछे दो प्रमुख वजहें हैं — एक विवादित फोन कॉल और दूसरी, उनकी बिगड़ती सेहत।
विवादास्पद कॉल और जस्टिस वर्मा प्रस्ताव पर टकरावNDTV और Outlook की रिपोर्टों के अनुसार, संसद के मानसून सत्र की शुरुआत में विपक्ष ने जस्टिस यशवंत वर्मा को हटाने का प्रस्ताव लाया था। उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने इस पर विपक्ष के नोटिस को स्वीकार कर लिया और राज्यसभा सचिवालय को आवश्यक कार्यवाही करने का निर्देश दे दिया। इस अप्रत्याशित निर्णय से केंद्र सरकार नाराज़ हो गई। रिपोर्ट के मुताबिक, इसके बाद केंद्र की ओर से एक फोन कॉल आया जिसमें धनखड़ को इस फैसले पर सवाल-जवाब झेलने पड़े। फोन पर हुई बातचीत बहुत तीखी और तनावपूर्ण बताई गई है। कुछ सूत्रों का तो यहां तक कहना है कि केंद्र इस निर्णय से इतना नाराज़ था कि धनखड़ के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाने की भी चर्चा शुरू हो गई थी। इसके बाद उन्होंने अपने पद से इस्तीफा देना ही बेहतर समझा।
क्या स्वास्थ्य है असली कारण?धनखड़ के करीबियों और ग्रामीणों ने उनके स्वास्थ्य को लेकर चिंता ज़ाहिर की है। उनके भतीजे हरेंद्र धनखड़ ने बताया कि मार्च 2025 में उनकी एंजियोप्लास्टी हुई थी और हाल ही में उत्तराखंड दौरे के दौरान उनकी तबीयत और बिगड़ गई थी। यह भी सामने आया है कि वे पिछले कुछ महीनों से नियमित रूप से दिल्ली के एक निजी अस्पताल में मेडिकल चेकअप के लिए जा रहे थे। हालांकि रिपोर्ट में यह भी दावा किया गया है कि उनकी सेहत उतनी खराब नहीं थी कि वे अपने कार्यकाल को पूरा न कर सकें। इस वजह से राजनीतिक विश्लेषक इसे एक साफ-सुथरी विदाई मानने को तैयार नहीं हैं।
कांग्रेस और विपक्ष की प्रतिक्रियाकांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने इस पूरे घटनाक्रम पर सवाल उठाते हुए इसे संदेहास्पद करार दिया। उन्होंने कहा कि सोमवार को कार्य मंत्रणा समिति (BAC) की बैठक में भाजपा के बड़े नेता जेपी नड्डा और किरेन रिजिजू अनुपस्थित थे और यह बात धनखड़ को पहले से नहीं बताई गई थी, जिससे वे आहत हुए। कांग्रेस ने यह भी आरोप लगाया कि उन्हें जानबूझकर नीचा दिखाने की कोशिश की गई। The New Indian Express के अनुसार, कांग्रेस ने प्रधानमंत्री मोदी से अपील की है कि वे धनखड़ को मनाने की कोशिश करें और उनसे इस्तीफा वापस लेने को कहें।
गांव में ग़म और गौरवराजस्थान के झुंझुनू जिले के किठाना गांव में जहां धनखड़ का जन्म हुआ था, वहां इस्तीफे की खबर से हैरानी और दुख दोनों है। गांव की सरपंच सुभिता धनखड़ ने कहा कि गांव को उम्मीद थी कि उनका बेटा एक दिन राष्ट्रपति भी बन सकता है। ग्रामीणों ने बताया कि उन्होंने गांव के स्कूल और गौशाला के लिए आर्थिक मदद भी दी थी और वे हमेशा जमीन से जुड़े इंसान रहे।