मिडिल ईस्ट संकट से निपटने को भारत कितना तैयार? पीएम मोदी ने बताया पूरा प्लान

पश्चिम एशिया में जारी तनाव को अब तीन हफ्तों से अधिक समय हो चुका है और इसका असर वैश्विक स्तर पर साफ दिखाई देने लगा है। दुनिया की अर्थव्यवस्था से लेकर आम लोगों के जीवन तक, हर क्षेत्र इस संकट से प्रभावित हो रहा है। भारत भी इस स्थिति से लंबे समय तक अछूता नहीं रह सकता। ऐसे में प्रधानमंत्री Narendra Modi ने सोमवार को लोकसभा में देश को संबोधित करते हुए मौजूदा हालात पर सरकार की रणनीति और तैयारियों की विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने लोगों से अपील की कि जैसे देश ने कोरोना काल में धैर्य और एकजुटता के साथ चुनौतियों का सामना किया था, वैसे ही इस वैश्विक संकट में भी संयम बनाए रखना जरूरी है।

प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में ऊर्जा और बिजली की मांग को लेकर भी स्थिति स्पष्ट की। उन्होंने बताया कि गर्मी के मौसम की शुरुआत के साथ ही देश में बिजली की खपत बढ़ रही है, लेकिन चिंता की कोई बात नहीं है। देश के सभी पावर प्लांट्स में पर्याप्त कोयला भंडार मौजूद है। भारत ने लगातार दूसरे वर्ष 1 अरब टन से अधिक कोयले का उत्पादन कर एक नया रिकॉर्ड बनाया है। इसके साथ ही बीते वर्षों में नवीकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में भी देश ने तेजी से प्रगति की है, जिससे ऊर्जा सुरक्षा को मजबूती मिली है।

खेती और खाद्यान्न को लेकर भी सरकार पूरी तरह सजग नजर आ रही है। प्रधानमंत्री ने कहा कि युद्ध जैसे हालात में सबसे बड़ा सवाल कृषि और खाद आपूर्ति को लेकर होता है। हालांकि भारत के पास फिलहाल पर्याप्त अनाज भंडार है और किसानों की मेहनत से खाद्यान्न उत्पादन मजबूत स्थिति में है। सरकार का फोकस इस बात पर है कि आगामी खरीफ सीजन की बुआई बिना किसी बाधा के पूरी हो। इसके लिए उर्वरकों की उपलब्धता सुनिश्चित करने के साथ-साथ वैकल्पिक स्रोतों पर भी लगातार काम किया जा रहा है।
विदेशों में फंसे भारतीयों की सुरक्षा को लेकर भी सरकार सक्रिय है। प्रधानमंत्री ने बताया कि अब तक 3 लाख 75 हजार से अधिक भारतीयों को सुरक्षित देश वापस लाया जा चुका है। विशेष रूप से ईरान से लगभग 1,000 भारतीयों की वापसी कराई गई है, जिनमें बड़ी संख्या मेडिकल छात्रों की है। वहीं, हालात को देखते हुए Central Board of Secondary Education (CBSE) ने खाड़ी देशों में कक्षा 10 और 12 की परीक्षाएं रद्द करने का फैसला लिया है, ताकि छात्रों की पढ़ाई प्रभावित न हो।

ऊर्जा आपूर्ति को लेकर प्रधानमंत्री ने खास तौर पर होर्मुज जलडमरूमध्य का जिक्र किया, जहां से भारत को बड़ी मात्रा में कच्चा तेल, गैस और उर्वरक प्राप्त होते हैं। उन्होंने कहा कि युद्ध के चलते इस मार्ग पर जहाजों की आवाजाही कठिन हो गई है, लेकिन इसके बावजूद सरकार ने पेट्रोल, डीजल और गैस की सप्लाई को स्थिर बनाए रखने के लिए हरसंभव कदम उठाए हैं। घरेलू एलपीजी उपभोक्ताओं को प्राथमिकता देते हुए आपूर्ति सुनिश्चित की जा रही है, साथ ही देश में एलपीजी उत्पादन बढ़ाने पर भी जोर दिया जा रहा है।

प्रधानमंत्री मोदी ने यह भी बताया कि बीते वर्षों में भारत ने रणनीतिक पेट्रोलियम भंडारण पर विशेष ध्यान दिया है। वर्तमान में देश के पास 53 लाख मीट्रिक टन से अधिक का स्ट्रैटेजिक पेट्रोलियम रिजर्व मौजूद है, जबकि इसे और बढ़ाने की दिशा में भी काम जारी है। इसके अलावा, देश की रिफाइनरी क्षमता में भी उल्लेखनीय विस्तार हुआ है और सरकार विभिन्न देशों के आपूर्तिकर्ताओं के साथ लगातार संपर्क में है, ताकि ऊर्जा आपूर्ति बाधित न हो।

इसी कड़ी में एथेनॉल ब्लेंडिंग को भी सरकार की बड़ी उपलब्धि के रूप में बताया गया। प्रधानमंत्री ने कहा कि पिछले एक दशक में एथेनॉल उत्पादन और उसके उपयोग में अभूतपूर्व बढ़ोतरी हुई है। जहां पहले यह आंकड़ा महज 1-2 प्रतिशत था, वहीं अब पेट्रोल में 20 प्रतिशत तक एथेनॉल मिश्रण का लक्ष्य हासिल किया जा रहा है। इससे हर साल करोड़ों बैरल कच्चे तेल के आयात में कमी आई है, जो संकट के समय देश के लिए बड़ी राहत साबित हो रही है।

कुल मिलाकर, प्रधानमंत्री ने स्पष्ट किया कि सरकार हर मोर्चे पर सतर्क और तैयार है। चाहे ऊर्जा सुरक्षा हो, खाद्यान्न आपूर्ति या विदेशों में भारतीयों की सुरक्षा—हर क्षेत्र में ठोस कदम उठाए जा रहे हैं, ताकि वैश्विक संकट का असर देश पर न्यूनतम रहे।