भारतीय वायुसेना की ताकत में एक बड़ा इजाफा होने वाला है। मोदी सरकार ने फ्रांस से 114 नए राफेल लड़ाकू विमानों की खरीद को हरी झंडी दे दी है। पिछले साल ऑपरेशन सिंदूर में राफेल जेट्स की ताकत दुनिया ने देखी थी, जब भारत ने पाकिस्तान पर एयर डॉमिनेंस बनाए रखा और महत्वपूर्ण एयरबेस पर सटीक हवाई हमले किए। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में हुई उच्चस्तरीय बैठक में इस महत्वाकांक्षी सौदे को मंजूरी दी गई।
114 नए राफेल होंगे भारतीय वायुसेना का हिस्सारक्षा अधिग्रहण परिषद (DAC) ने इस हाई-प्राइस रक्षा खरीद को “Acceptance of Necessity” के तहत हरी झंडी दी। कुल सौदे की कीमत लगभग 3.25 लाख करोड़ रुपये है। इसमें से 2.5 लाख करोड़ रुपये सिर्फ 114 राफेल विमानों की खरीद पर खर्च होंगे, जबकि बाकी की राशि हथियारों, पुर्जों और सहायक पैकेज पर जाएगी।
समुद्री निगरानी और एंटी-सबमरीन क्षमता को भी मिलेगा बढ़ावासिर्फ वायुसेना ही नहीं, भारतीय नौसेना की क्षमता बढ़ाने के लिए भी कदम उठाए गए हैं। छह पी-8आई समुद्री गश्ती विमानों के लिए मंजूरी दी गई है, जिनकी कीमत लगभग 28 हजार करोड़ रुपये होगी। इसके अलावा, हाई अल्टीट्यूड प्लेटफॉर्म सिस्टम्स (HAPS) भी खरीदे जाएंगे, जिनकी लागत करीब 15 हजार करोड़ रुपये बताई गई है। ये सिस्टम खुफिया, निगरानी और टोही मिशनों के लिए अहम साबित होंगे।
राफेल जेट्स: ताकत और घातक हथियारभारत ने इससे पहले फ्रांस से 36 राफेल विमान खरीदे थे, जिनकी डिलीवरी दिसंबर 2024 तक पूरी हो गई। ये विमान IAF के अंबाला में ‘गोल्डन एरोज’ और हाशिमारा में ‘फाल्कन्स’ स्क्वाड्रनों में तैनात हैं। राफेल में घातक हथियार प्रणाली होती है। यह Meteor मिसाइल से लैस है, जो हवा से हवा में मार करने वाली दुनिया की सबसे उन्नत मिसाइलों में से एक है, और इसकी रेंज 100 किलोमीटर से अधिक है।
SCALP मिसाइल के जरिये राफेल दुश्मन के बंकर और ठिकानों को 300-500 किलोमीटर दूर से निशाना बना सकता है। वहीं, हैमर मिसाइल छोटी दूरी की मिसाइल है, जो मजबूत ढांचों को नष्ट करने के लिए विशेष रूप से डिज़ाइन की गई है।
राफेल के रडार और इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम की खासियतराफेल जेट में RBE2 AESA रडार है, जो एक साथ 40 टारगेट्स को ट्रैक कर सकता है। इसके अलावा SPECTRA सिस्टम है, जो जेट को दुश्मन के रडार से छिपाने और खतरों को जैम करने में सक्षम बनाता है। पायलट हेलमेट माउंटेड डिस्प्ले के जरिए अपने हेलमेट से ही सभी जरूरी डेटा देख सकता है, जिससे मिशन की सटीकता और सुरक्षा बढ़ती है।
नेवी के लिए 26 राफेल-मरीन जेट्स की डील पहले ही हो चुकी हैइससे पहले अप्रैल 2025 में भारत ने 26 राफेल-मरीन जेट्स के लिए फ्रांस से 63 हजार करोड़ रुपये का सौदा किया था। ये विमानवाहक पोतों से उड़ने में सक्षम हैं और विशेष रूप से नौसेना मिशनों के लिए तैयार किए गए हैं। इस डील में ट्रेनिंग, हथियार, सिमुलेटर और दीर्घकालिक सहायता भी शामिल है। राफेल-एम विमान INS विक्रांत और INS विक्रमादित्य पर तैनात होंगे।