कौन हैं गलगोटिया यूनिवर्सिटी के संस्थापक? जीरो से खड़ा किया शिक्षा का साम्राज्य, अब रोबोट विवाद ने फंसा दिया पेंच!

दिल्ली में हाल ही में आयोजित इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट में किसी भी शैक्षणिक संस्थान के लिए मंच से बाहर होना बड़ा झटका माना जाता है। इस बार सुर्खियों में रही गलगोटिया यूनिवर्सिटी (Galgotias University), जिसने समिट में अपने इनोवेशन के रूप में ‘ओरियन’ नाम का रोबोट डॉग पेश किया। शुरुआत में दावा किया गया कि यह यूनिवर्सिटी का विकसित किया गया प्रोडक्ट है, लेकिन जांच में सामने आया कि यह दरअसल चीन की कंपनी Unitree Robotics का मॉडल Unitree Go2 है। जैसे ही यह खबर सामने आई, विवाद बढ़ गया और यूनिवर्सिटी को सफाई देनी पड़ी।

विवाद की शुरुआत कैसे हुई?

समिट में लगे स्टॉल पर यूनिवर्सिटी ने बताया कि उनके कैंपस में एआई प्रोजेक्ट्स पर 350 करोड़ रुपये का निवेश हुआ है और ‘ओरियन’ रोबोट डॉग सेंटर ऑफ एक्सीलेंस का विकसित प्रोडक्ट है। लेकिन तकनीकी विशेषज्ञों ने तुरंत पहचान लिया कि यह वही रोबोट है, जो अंतरराष्ट्रीय बाजार में पहले से उपलब्ध है और भारत में 2-3 लाख रुपये में बिकता है। विवाद के बढ़ने के बाद यूनिवर्सिटी ने कहा कि उनके इरादे और प्रस्तुति को लेकर गलतफहमी हुई है।

गलगोटिया यूनिवर्सिटी के फाउंडर कौन हैं?

इस पूरे घटनाक्रम के बाद यूनिवर्सिटी के मालिक सुनील गलगोटिया चर्चा में आ गए। ग्रेटर नोएडा स्थित इस प्राइवेट यूनिवर्सिटी की नींव उन्होंने रखी थी। उनका सफर बेहद साधारण शुरुआत से शुरू हुआ। 1930 के दशक में उनके परिवार का कनॉट प्लेस, दिल्ली में एक छोटा बुक स्टोर था।

दिल्ली के श्री राम कॉलेज ऑफ कॉमर्स से पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने 1980 के दशक में पब्लिशिंग का काम शुरू किया। गलगोटियास पब्लिकेशंस के जरिए उन्होंने अंतरराष्ट्रीय परीक्षा की किताबों के वितरण अधिकार हासिल किए, जिससे उनकी पहचान मजबूत हुई।

40 छात्रों से यूनिवर्सिटी तक का सफर

साल 2000 में उन्होंने गलगोटियास इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट एंड टेक्नोलॉजी (GIMT) की स्थापना की, जहां शुरुआत सिर्फ 40 छात्रों के साथ हुई। इसके बाद उन्होंने इंजीनियरिंग कॉलेज की शुरुआत की और 2011 में उत्तर प्रदेश सरकार से यूनिवर्सिटी का दर्जा मिला।

आज गलगोटिया यूनिवर्सिटी हजारों छात्रों और अत्याधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर के साथ देश की प्रमुख निजी शैक्षणिक संस्थाओं में शामिल है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, सुनील गलगोटिया का कारोबार अब हजारों करोड़ रुपये में पहुंच चुका है।