'24x7 और 365 दिन चौंकन्ना रहें, पाकिस्तान कर सकता है कोई भी हरकत', CDS जनरल अनिल चौहान ने सेना को किया सतर्क

भारत के चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (CDS) जनरल अनिल चौहान ने मंगलवार, 5 अगस्त 2025 को एक अहम बयान में सेना को हर परिस्थिति के लिए सतर्क रहने की नसीहत दी। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि पाकिस्तान की ओर से किसी भी प्रकार की हिंसक कार्रवाई को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता और भारतीय सेना को हमेशा जवाब देने के लिए तैयार रहना होगा।

दिल्ली में आयोजित 'ट्राइडेंट लेक्चर सीरीज़' के उद्घाटन समारोह में बोलते हुए जनरल चौहान ने पाकिस्तान के तथाकथित ‘फुल-स्पेक्ट्रम डिटरेंस थ्योरी’ (पूर्ण आयामी प्रतिरोध सिद्धांत) को भारत के लिए सीधी चुनौती बताया और इसे निष्क्रिय करने की आवश्यकता पर ज़ोर दिया।

आतंकवाद पर दो टूक: पाकिस्तान की धरती पर कोई भी सुरक्षित नहीं

सीडीएस ने आतंकवाद को लेकर भी बेहद सख्त रुख दिखाया। उन्होंने कहा, पाकिस्तान की सरज़मीं पर कोई भी आतंकी सुरक्षित नहीं रह सकता। चाहे वो देश के किसी भी हिस्से में छिपा हो, भारतीय सुरक्षा एजेंसियां उसे ढूंढ निकालेंगी।

उन्होंने कहा कि सेना को सिर्फ सीमा पर ही नहीं, बल्कि लंबी दूरी तक स्थित स्थिर और गतिशील लक्ष्यों को भी भेदने की तकनीकी क्षमता विकसित करनी होगी। आतंकवाद और पारंपरिक युद्ध के बीच की सीमाएं अब धुंधली होती जा रही हैं और सेनाओं को हर समय तैयारी की स्थिति में रहना होगा।

युद्ध और शांति के बीच की रेखा अब धुंधली

जनरल चौहान ने अपने भाषण में इस बात पर बल दिया कि शांति और युद्ध के बीच की दूरी अब मिट रही है, क्योंकि आज की लड़ाइयाँ सिर्फ बंदूक़ों से नहीं, तकनीक, साइबर और मनोवैज्ञानिक स्तर पर भी लड़ी जा रही हैं।

उन्होंने कहा, “हमें अब पारंपरिक और परमाणु क्षमताओं के बीच सामंजस्य बैठाकर काम करने की जरूरत है। सेना को रणनीति में लचीलापन और युद्ध कौशल में तीव्रता दोनों बनाए रखने होंगे।”

'नई सैन्य सोच की ज़रूरत' — लगातार विकसित हो रही चुनौतियों पर फोकस

सीडीएस चौहान ने कहा कि आने वाले समय में भारत की सुरक्षा रणनीति को तीन स्तंभों पर खड़ा करना होगा:

हर वक़्त युद्ध के लिए तत्परता – चौबीसों घंटे, साल के हर दिन

तकनीकी बढ़त – आधुनिक हथियार, निगरानी प्रणाली और साइबर युद्ध की तैयारी

दुश्मन की रणनीति को समझकर तुरंत पलटवार करने की क्षमता

उन्होंने इस बात को रेखांकित किया कि पाकिस्तान की ओर से किसी भी समय आंतरिक या बाहरी तौर पर हमला हो सकता है, और सेना को उसकी हर चाल का त्वरित और प्रभावी जवाब देने में सक्षम होना चाहिए।

परमाणु नीति का महत्व और बदलता समीकरण

अपने संबोधन में जनरल अनिल चौहान ने यह भी कहा कि आज के दौर में परमाणु नीति सिर्फ कूटनीति का उपकरण नहीं रह गई, बल्कि यह पारंपरिक सैन्य अभियानों की नींव बनती जा रही है। उन्होंने जोर दिया कि भारत को न केवल सैन्य रूप से मज़बूत होना है, बल्कि तकनीकी दृष्टि से भी अपने विरोधियों से आगे रहना जरूरी है।

उन्होंने स्पष्ट कहा, “अब हम जिस दौर में हैं, वहां किसी भी समय, कहीं से भी चुनौती आ सकती है — और हमें उसका हरसंभव जवाब देने के लिए तैयार रहना होगा। यही हमारी अगली पीढ़ी की सैन्य सोच का केंद्र बिंदु होना चाहिए।”