Budget 2026: फाइबर से फैशन तक... भारत की टेक्सटाइल इंडस्ट्री को मिलेगा वैश्विक मुकाम, बजट में नई घोषणाएँ

केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बजट 2026-27 में भारत के टेक्सटाइल सेक्टर के लिए एक समग्र और बहुआयामी रोडमैप पेश किया है। इस योजना का मकसद न केवल भारत को फाइबर और कपड़ा निर्माण में आत्मनिर्भर बनाना है, बल्कि लाखों बुनकरों और श्रमिकों को अत्याधुनिक तकनीक से जोड़कर उन्हें वैश्विक प्रतिस्पर्धा के योग्य बनाना भी है।

राष्ट्रीय फाइबर योजना: आत्मनिर्भर भारत की दिशा


बजट में पेश किए गए पहले स्तंभ के रूप में ‘राष्ट्रीय फाइबर योजना’ की घोषणा की गई है। इसके तहत रेशम, ऊन, जूट जैसे प्राकृतिक फाइबर के उत्पादन में आत्मनिर्भरता हासिल की जाएगी। साथ ही, मानव निर्मित और तकनीकी उन्नत फाइबर जैसे नए औद्योगिक युग के फाइबर में भी भारत की क्षमता बढ़ाने पर जोर दिया गया है।

कपड़ा विस्तार और रोजगार सृजन

सरकार ने पारंपरिक कपड़ा उद्योग को आधुनिक बनाने के लिए पूंजीगत मदद देने की घोषणा की है। इसके अंतर्गत मशीनरी खरीद, तकनीकी उन्नयन और उत्पाद की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए कॉमन टेस्टिंग एवं सर्टिफिकेशन सेंटर स्थापित किए जाएंगे। इस पहल से छोटे और बड़े उद्योग दोनों को लाभ मिलेगा और रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे।

राष्ट्रीय हथकरघा और हस्तशिल्प कार्यक्रम (NHHP)


मौजूदा योजनाओं को एकीकृत करके तैयार किए गए इस कार्यक्रम का उद्देश्य देश के बुनकरों और कारीगरों को लक्षित सहायता प्रदान करना है। इससे उनकी कला को बेहतर बाजार मिलेगा और उनकी आमदनी में सुधार आएगा। यह पहल ग्रामीण अर्थव्यवस्था और हस्तशिल्प उद्योग को नई दिशा देगी।

समर्थ 2.0: टेक-सेवी श्रमिकों की नई पीढ़ी


कौशल विकास को नए आयाम देने के लिए ‘समर्थ 2.0’ योजना की शुरुआत की गई है। इसके तहत उद्योग और शैक्षणिक संस्थानों के सहयोग से प्रशिक्षण कार्यक्रम आधुनिक और तकनीक आधारित होंगे। वित्त मंत्री ने कहा, “हम चाहते हैं कि अगली पीढ़ी के श्रमिक न केवल कुशल हों, बल्कि टेक-सेवी भी बनें। इससे उद्योगों की दक्षता और प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता दोनों बढ़ेंगी।”

मेगा टेक्सटाइल पार्क और तकनीकी टेक्सटाइल्स


लॉजिस्टिक्स लागत कम करने और उत्पादन केंद्रों को संगठित करने के लिए मेगा टेक्सटाइल पार्कों का प्रस्ताव रखा गया है। इन पार्कों में धागा उत्पादन, कपड़ा निर्माण और मूल्य संवर्धन एक ही जगह पर किया जाएगा। विशेष रूप से स्वास्थ्य सेवा, ऑटोमोटिव और उच्च-मूल्य वाले उद्योगों के लिए टेक्निकल टेक्सटाइल्स पर फोकस रहेगा। इस पहल से भारत वैश्विक स्तर पर टेक्सटाइल उत्पादन और निर्यात में मजबूती हासिल करेगा।