वंदे मातरम विवाद पर अमित शाह का कांग्रेस पर हमला, 1937 के फैसले को बताया ‘तुष्टिकरण’ की राजनीति

वंदे मातरम के कुछ छंदों को लेकर कांग्रेस के रुख पर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कांग्रेस पर आरोप लगाया कि 1937 में पार्टी ने तुष्टिकरण की नीति के तहत वंदे मातरम को सीमित करने का फैसला लिया था और इससे देश के विभाजन की परिस्थितियों को बल मिला। शाह ने कहा कि देश को पहले इस फैसले के गंभीर परिणाम भुगतने पड़े हैं और अब ऐसी स्थिति दोबारा नहीं बनने दी जानी चाहिए।

अमित शाह ने कांग्रेस कार्यसमिति के उस फैसले पर सवाल उठाया, जिसमें पार्टी ने वंदे मातरम के केवल दो छंद गाने की बात कही है। उन्होंने इसे कांग्रेस के 1937 के प्रस्ताव से जोड़ते हुए कहा कि आजादी के 80 साल बाद भी पार्टी उसी निर्णय को आगे बढ़ा रही है।

कांग्रेस के फैसले पर शाह ने जताई आपत्ति

अमित शाह ने कहा कि कांग्रेस कार्यसमिति का वंदे मातरम के दो छंद गाने का निर्णय उनके मुताबिक पुरानी नीति की पुनरावृत्ति है। उन्होंने आरोप लगाया कि 1937 में वंदे मातरम को दो हिस्सों में सीमित करने का फैसला मुस्लिम तुष्टिकरण के लिए लिया गया था।

शाह के अनुसार, इस निर्णय ने उस समय दो-राष्ट्र के सिद्धांत को मजबूती देने वाली परिस्थितियों में योगदान दिया और अंततः देश के विभाजन तथा पाकिस्तान के गठन का रास्ता बना। उन्होंने कांग्रेस के मौजूदा रुख को भी इसी राजनीतिक सोच से जोड़ते हुए इसकी आलोचना की।

‘शहीदों का अपमान’ करने का लगाया आरोप

गृह मंत्री ने कांग्रेस के फैसले को स्वतंत्रता आंदोलन के इतिहास से भी जोड़ते हुए कहा कि वंदे मातरम का इस्तेमाल स्वतंत्रता संग्राम के दौरान देशभक्ति के नारे के रूप में हुआ था। उन्होंने दावा किया कि कांग्रेस के मौजूदा निर्णय से बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय की इस रचना और उन स्वतंत्रता सेनानियों का अपमान होता है, जिन्होंने वंदे मातरम का उद्घोष करते हुए आजादी की लड़ाई लड़ी।

शाह ने कहा कि नरेंद्र मोदी सरकार ने वंदे मातरम के पूरे गीत के गायन के जरिए राष्ट्रीय एकता को मजबूत करने की कोशिश की है। उन्होंने यह भी कहा कि सरकारी कार्यक्रमों में इसे पूर्ण रूप से गाने का निर्णय लिया गया है और इसे कानूनी आधार भी दिया गया है।

राहुल गांधी के नेतृत्व पर भी निशाना

अमित शाह ने कांग्रेस के मौजूदा रुख को राहुल गांधी के नेतृत्व से जोड़ते हुए भी हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस एक बार फिर तुष्टिकरण की राजनीति को आगे बढ़ा रही है। शाह ने कहा कि कांग्रेस 1937 के अपने पुराने प्रस्ताव को महत्व दे रही है, जबकि उनके मुताबिक संसद द्वारा लिए गए फैसले की अनदेखी कर रही है।

उन्होंने देश की जनता से कांग्रेस के निर्णय का विरोध करने की अपील की। शाह ने कहा कि भारत पहले ही वंदे मातरम को लेकर हुए विवाद और उसके प्रभावों का अनुभव कर चुका है और अब ऐसी स्थिति दोबारा नहीं आनी चाहिए।
स्वतंत्रता दिवस पर कांग्रेस कार्यालय में भी हुआ था पूरा गीत

वंदे मातरम को लेकर मौजूदा विवाद से पहले स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर कांग्रेस कार्यालय में पूरा वंदे मातरम बजाए जाने की बात सामने आई थी। इस दौरान सोनिया गांधी के नाराज नजर आने को लेकर चर्चा हुई थी। बाद में कांग्रेस नेताओं ने सफाई दी थी कि वह मल्लिकार्जुन खड़गे के लिए कुर्सी मंगवा रही थीं, क्योंकि वह काफी देर से खड़े थे।

इसके चार दिन बाद कांग्रेस की ओर से कहा गया कि उसके नेता वंदे मातरम के दो ही छंद गाएंगे। इसी फैसले को लेकर अमित शाह ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए इसे उसकी पुरानी नीति से जोड़कर देखा और भारतीय जनता पार्टी की ओर से इसके विरोध की बात कही।