लोकसभा में गुरुवार को संविधान (131वां) संशोधन विधेयक 2026, परिसीमन विधेयक 2026 और संघ राज्य विधि (संशोधन) विधेयक 2026 पेश किए गए, जिन पर सियासी बयानबाजी तेज हो गई। समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष Akhilesh Yadav ने इन विधेयकों, खासकर महिला आरक्षण और परिसीमन को लेकर सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी महिला आरक्षण के पक्ष में है और हमेशा महिलाओं को आगे बढ़ाने का काम करती रही है, लेकिन भाजपा इस मुद्दे को सिर्फ नारे तक सीमित करने की कोशिश कर रही है।
अखिलेश यादव ने भाजपा की नीतियों पर सवाल उठाते हुए कहा कि जो दल अपने संगठन में महिलाओं को पर्याप्त प्रतिनिधित्व नहीं दे पाया, वह उनके सम्मान की बात कैसे कर सकता है। उन्होंने चुनौती देते हुए कहा कि भाजपा अपने मूल संगठन में महिलाओं की भागीदारी के आंकड़े सामने रखे। साथ ही उन्होंने यह भी पूछा कि एनडीए शासित राज्यों में कितनी महिला मुख्यमंत्री हैं। दिल्ली की स्थिति का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि वहां महिला मुख्यमंत्री होते हुए भी अधिकार सीमित हैं। उन्होंने यह भी कहा कि देश में कुल विधायकों में महिलाओं की हिस्सेदारी अभी भी 10 प्रतिशत से कम है।
परिसीमन के मुद्दे पर बोलते हुए अखिलेश यादव ने सरकार की मंशा पर सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि अगर इस प्रक्रिया में कोई साजिश हुई, तो भाजपा को उसी तरह हार का सामना करना पड़ सकता है जैसा अयोध्या में हुआ था। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार चुनावी गणित को अपने पक्ष में करने के लिए परिसीमन का इस्तेमाल कर सकती है।
अखिलेश यादव ने आरोप लगाया कि भाजपा जानबूझकर जनगणना और जातीय गणना को टाल रही है, क्योंकि इससे आरक्षण से जुड़े सवाल उठ सकते हैं। उनके मुताबिक, सरकार का असली मकसद केवल वोट बैंक को साधना और सत्ता में बने रहना है। उन्होंने कहा कि भाजपा पुराने वादों की तरह अब महिलाओं के मुद्दे को भी चुनावी रणनीति के तौर पर इस्तेमाल कर रही है।
परिसीमन को लेकर उन्होंने आशंका जताई कि इसके जरिए चुनावी नक्शे में बदलाव कर राजनीतिक लाभ उठाने की योजना बनाई जा रही है। उन्होंने कहा कि पहले जनगणना कराई जानी चाहिए, ताकि सही आंकड़ों के आधार पर ही परिसीमन और आरक्षण लागू हो सके। बिना सटीक डेटा के यह प्रक्रिया पारदर्शी नहीं मानी जा सकती।
अखिलेश यादव ने यह भी सवाल उठाया कि कहीं महिला आरक्षण के दायरे में कुछ वर्गों, खासकर पिछड़े और मुस्लिम समुदाय की महिलाओं को नजरअंदाज तो नहीं किया जा रहा। उन्होंने मांग की कि आरक्षण लागू करते समय सभी वर्गों की महिलाओं को बराबरी से शामिल किया जाए, तभी इसका उद्देश्य पूरा होगा।
अंत में उन्होंने कहा कि यदि परिसीमन के जरिए कोई छिपी हुई रणनीति अपनाई गई, तो इसका राजनीतिक असर जरूर देखने को मिलेगा। उन्होंने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि अगर किसी तरह का षड्यंत्र हुआ, तो भाजपा को उत्तर प्रदेश में भी उसी तरह का नुकसान उठाना पड़ सकता है जैसा अयोध्या में देखने को मिला था।
अपने बयान में उन्होंने समाजवादी विचारक Ram Manohar Lohia का हवाला देते हुए कहा कि उनकी विचारधारा हमेशा महिलाओं को बराबरी का अधिकार देने की रही है। उन्होंने याद दिलाया कि उत्तर प्रदेश में पंचायत स्तर पर महिलाओं को आरक्षण देने की शुरुआत उनकी पार्टी ने ही की थी। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि सरकार इस मुद्दे पर जल्दबाजी कर रही है और असली मुद्दों से ध्यान भटकाने की कोशिश हो रही है।