'यह तो सिर्फ शुरुआत है, आगे आगे देखिए होता है क्या...', AAP के 7 सांसदों के पार्टी छोड़ने पर BJP के राष्ट्रीय अध्यक्ष का बड़ा बयान

आम आदमी पार्टी को एक बड़ा राजनीतिक झटका तब लगा, जब उसके 10 राज्यसभा सांसदों में से सात ने एक साथ पार्टी से किनारा कर लिया। इस सामूहिक इस्तीफे ने पार्टी के भीतर मचे असंतोष को खुलकर सामने ला दिया। हालात तब और ज्यादा गंभीर हो गए, जब पार्टी छोड़ने वाले इन सात सांसदों में से तीन ने तुरंत भारतीय जनता पार्टी का दामन थामने की घोषणा कर दी, जबकि बाकी चार ने भी इस दिशा में कदम बढ़ाने के संकेत दिए हैं। इस घटनाक्रम में राघव चड्ढा, संदीप पाठक, स्वाति मालीवाल और अशोक मित्तल जैसे प्रमुख नाम शामिल बताए जा रहे हैं, जिससे राजनीतिक हलकों में हलचल तेज हो गई है।

इस पूरे घटनाक्रम पर प्रतिक्रिया देते हुए भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने एक तीखा बयान दिया है। पश्चिम बंगाल के बारानगर में आयोजित एक रोड शो के दौरान उन्होंने मीडिया से बातचीत में कहा, “यह तो सिर्फ शुरुआत है, आगे आगे देखिए होता है क्या।” उनके इस बयान को सियासी संकेत के तौर पर देखा जा रहा है, जिससे यह अटकलें और तेज हो गई हैं कि आने वाले समय में आम आदमी पार्टी को और भी झटके लग सकते हैं।
इस घटनाक्रम के बाद आम आदमी पार्टी और भाजपा के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज हो गया है। जहां आप नेताओं ने भाजपा पर उनकी पार्टी को तोड़ने और जनप्रतिनिधियों को प्रभावित करने का आरोप लगाया है, वहीं भाजपा ने इन आरोपों को खारिज करते हुए आप के नेतृत्व और नीतियों पर सवाल उठाए हैं। खासतौर पर अरविंद केजरीवाल की कार्यशैली को लेकर भाजपा लगातार हमलावर बनी हुई है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अगले साल होने वाले पंजाब विधानसभा चुनाव से पहले यह घटनाक्रम बेहद अहम हो सकता है। पंजाब में फिलहाल आम आदमी पार्टी की सरकार है और ऐसे में पार्टी के भीतर इस तरह की टूट को चुनावी समीकरणों से जोड़कर देखा जा रहा है। इससे न सिर्फ संगठनात्मक मजबूती पर असर पड़ सकता है, बल्कि विपक्ष को भी आक्रामक होने का मौका मिल सकता है।

इसी बीच पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने इस पूरे मामले को लेकर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से मिलने का समय मांगा है। बताया जा रहा है कि वह पंजाब के विधायकों के साथ राष्ट्रपति से मुलाकात कर भाजपा में शामिल हुए राज्यसभा सांसदों को रिकॉल करने के मुद्दे पर अपना पक्ष रखेंगे। इस मुलाकात को भी मौजूदा सियासी संकट के बीच एक अहम कदम माना जा रहा है, जो आने वाले दिनों में राजनीति की दिशा तय कर सकता है।