गर्मियों का मौसम आते ही तेज धूप और बढ़ता तापमान लोगों की सेहत पर असर डालने लगता है। दिनभर में मौसम का मिजाज कई बार बदलता रहता है, लेकिन सुबह 11 बजे से लेकर शाम 4 बजे तक का समय सबसे ज्यादा जोखिम भरा माना जाता है। इस दौरान सूरज की किरणें बेहद तीखी होती हैं और तापमान अपने उच्च स्तर पर पहुंच जाता है। कई लोग यह सोचकर धूप में निकल जाते हैं कि कुछ मिनट बाहर रहने से क्या फर्क पड़ेगा, लेकिन विशेषज्ञों के मुताबिक यही छोटी सी लापरवाही शरीर पर भारी पड़ सकती है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि इस समय तेज धूप में बाहर निकलने से शरीर पर गर्मी का दबाव तेजी से बढ़ता है, जिससे लू, हीट स्ट्रोक और डिहाइड्रेशन जैसी गंभीर समस्याओं का खतरा बढ़ जाता है। कई बार शुरुआती लक्षण तुरंत महसूस नहीं होते, लेकिन शरीर अंदर ही अंदर प्रभावित होने लगता है। आइए जानते हैं कि आखिर दोपहर की धूप को इतना खतरनाक क्यों माना जाता है और इससे बचने के लिए किन बातों का ध्यान रखना जरूरी है।
दोपहर की धूप क्यों बन जाती है खतरा?गर्मी के दिनों में दोपहर का समय सबसे ज्यादा तपिश वाला होता है। सुबह 11 बजे के बाद सूरज की किरणें सीधे धरती पर पड़ती हैं और तापमान तेजी से बढ़ने लगता है। ऐसे में शरीर की प्राकृतिक कूलिंग सिस्टम यानी खुद को ठंडा रखने की क्षमता पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है।
जब शरीर लगातार गर्मी झेलता है तो उसे सामान्य तापमान बनाए रखने के लिए ज्यादा मेहनत करनी पड़ती है। अगर लंबे समय तक धूप में रहा जाए तो शरीर की यह प्रक्रिया प्रभावित होने लगती है, जिससे व्यक्ति अचानक बीमार महसूस कर सकता है।
तेजी से हो सकता है डिहाइड्रेशनइस समय बाहर निकलते ही शरीर से तेजी से पसीना निकलने लगता है। ज्यादा पसीना आने से शरीर में पानी और जरूरी मिनरल्स की कमी होने लगती है। कई बार लोगों को तुरंत प्यास नहीं लगती, लेकिन अंदर ही अंदर शरीर डिहाइड्रेशन की स्थिति में पहुंचने लगता है।
विशेषज्ञों के अनुसार जब तक व्यक्ति को थकान, चक्कर या कमजोरी महसूस होती है, तब तक शरीर काफी हद तक पानी खो चुका होता है। यही वजह है कि गर्मी में बार-बार पानी पीना बेहद जरूरी माना जाता है।
थकान और चक्कर आने की समस्यातेज धूप में ज्यादा देर रहने से शरीर जल्दी थकने लगता है। अत्यधिक गर्मी की वजह से कमजोरी, सिरदर्द, चक्कर आना और बेचैनी जैसी समस्याएं होने लगती हैं। कई बार लोग इन शुरुआती संकेतों को नजरअंदाज कर देते हैं, जो बाद में गंभीर स्थिति का रूप ले सकते हैं।
हीट एक्सॉशन की स्थिति में शरीर ऊर्जा खोने लगता है और व्यक्ति सामान्य काम करने में भी परेशानी महसूस करता है। इसलिए गर्मी के मौसम में शरीर के छोटे-छोटे संकेतों को भी हल्के में नहीं लेना चाहिए।
दिल और ब्लड प्रेशर पर पड़ता है असरभीषण गर्मी सिर्फ त्वचा या शरीर के बाहरी हिस्सों को ही प्रभावित नहीं करती, बल्कि इसका असर दिल और ब्लड सर्कुलेशन पर भी पड़ता है। गर्म मौसम में शरीर को ठंडा रखने के लिए त्वचा की ओर ज्यादा ब्लड फ्लो करना पड़ता है, जिससे हार्ट पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है।
जिन लोगों को पहले से ब्लड प्रेशर, हार्ट डिजीज या अन्य स्वास्थ्य समस्याएं हैं, उनके लिए दोपहर की तेज धूप ज्यादा खतरनाक साबित हो सकती है। कई मामलों में अत्यधिक गर्मी हार्ट से जुड़ी गंभीर परेशानियों का कारण भी बन सकती है।
किन लोगों को ज्यादा सतर्क रहने की जरूरत?गर्मी का असर वैसे तो हर उम्र के लोगों पर पड़ता है, लेकिन बच्चे और बुजुर्ग सबसे ज्यादा संवेदनशील माने जाते हैं। छोटे बच्चे अक्सर ज्यादा देर तक धूप में खेलते रहते हैं, जबकि बुजुर्गों को कई बार गर्मी का एहसास देर से होता है। यही वजह है कि दोनों ही वर्ग जल्दी बीमार पड़ सकते हैं।
इसके अलावा बाहर काम करने वाले लोग, डिलीवरी स्टाफ, ट्रैवल करने वाले और लंबे समय तक सड़क पर रहने वाले लोगों को भी विशेष सावधानी बरतनी चाहिए। यहां तक कि थोड़े समय के लिए बाहर निकलना भी शरीर पर असर डाल सकता है।
धूप और लू से बचने के आसान तरीकेविशेषज्ञ सलाह देते हैं कि सुबह 11 बजे से शाम 4 बजे के बीच घर से बाहर निकलने से बचना चाहिए। अगर किसी जरूरी काम से बाहर जाना पड़े तो शरीर को पूरी तरह ढककर रखें। हल्के रंग के सूती कपड़े पहनें और सिर को कपड़े या टोपी से कवर करें।
धूप में निकलते समय सनग्लासेस का इस्तेमाल करना भी फायदेमंद माना जाता है। साथ ही शरीर को हाइड्रेट रखना बेहद जरूरी है। पानी के अलावा नारियल पानी, नींबू पानी और पानी से भरपूर फल भी गर्मी में काफी मददगार साबित होते हैं।
घर से बाहर निकलने से पहले हल्का भोजन करें और कोशिश करें कि ज्यादा देर तक सीधे सूरज की रोशनी में खड़े न रहें। जहां संभव हो, छांव वाली जगह पर रुकें और शरीर को ज्यादा गर्म होने से बचाएं।