7 दिनों में डायबिटीज कम करती है ये खास चीज, सेवन के और भी है कई फायदें

डायबिटीज के मरीजों की संख्या में लगातार बढ़ोतरी हो रही है। उम्रदराज ही नहीं, बल्कि बच्चे भी आसानी से इस बीमारी की चपेट में आ रहे हैं। डायबिटीज (Diabetes) एक आजीवन रहने वाली बीमारी है। यह एक मेटाबॉलिक डिसॉर्डर है, जिसमें मरीज़ के शरीर के रक्त में ग्लूकोज़ का स्तर बहुत अधिक होता है। जब, व्यक्ति के शरीर में पर्याप्त मात्रा में इंसुलिन नहीं बन पाता है और शरीर की कोशिकाएं इंसुलिन के प्रति ठीक से प्रतिक्रिया नहीं कर पाती हैं। जैसा कि, इंसुलिन का बनना शरीर के लिए बहुत महत्वपूर्ण है क्योंकि यह रक्त से शरीर की कोशिकाओं में ग्लूकोज़ का संचार करता है। इसीलिए, जब इंसुलिन सही मात्रा में नहीं बन पाता तो पीड़ित व्यक्ति के बॉडी मेटाबॉलिज्म पर भी इसका प्रभाव पड़ता है।

जब शरीर सही तरीके से रक्त में मौजूद ग्लूकोज़ या शुगर का उपयोग नहीं कर पाता। तब, व्यक्ति को डायबिटीज़ की समस्या हो जाती है। आमतौर पर डायबिटीज के मुख्य कारण ये स्थितियां हो सकती हैं-

- इंसुलिन की कमी
- परिवार में किसी व्यक्ति को डायबिटीज़ होना
- बढ़ती उम्र
- हाई कोलेस्ट्रॉल लेवल
- एक्सरसाइज ना करने की आदत
- हार्मोन्स का असंतुलन
- हाई ब्लड प्रेशर
- खान-पान की गलत आदतें

ब्लड शुगर बढ़ जाने से मरीज को कई तरह की दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। डायबिटीज के मरीजों को खान-पान पर बहुत ज्यादा ध्यान देने की जरूरत होती है। डॉक्टरों की स्टडी के मुताबिक डायबिटीज के मरीजों में कटहल को काफी फायदेमंद पाया गया है। कच्चा होने पर कटहल को सब्जी के रूप में और पका होने पर फल की तरह खाया जा सकता है। अंतरराष्ट्रीय पत्रिका 'नेचर' में छपी स्टडी के अनुसार कटहल बहुत प्रभावी तरीके से डायबिटीज को कंट्रोल करता है। स्टडी में पाया गया कि कटहल का आटा 7 दिनों में ब्लड ग्लूकोज को घटा देता है। शोध में टाइप-2 डायबिटीज के 40 मरीजों की डाइट में चावल और गेहूं की जगह तीन महीने तक 30 ग्राम कटहल का पाउडर दिया गया। तीन महीने के बाद इनके फास्टिंग ब्लड शुगर, पोस्टप्रांडियल ब्लड ग्लूकोज और HbA1c के स्तर में काफी कमी देखी गई। इसके अलावा इन मरीजों के वजन में भी कमी देखी गई। स्टडी के मुताबिक कटहल का आटा ब्लड शुगर कम करने के साथ-साथ ग्लाइसेमिक नियंत्रण में भी सुधार करता है।

कैसे तैयार करें कटहल का आटा-

कटहल का आटा तैयार करने के लिए सबसे पहले इसके बीज को अच्छी तरह से सूखा लें। सूख जाने पर इसके ऊपरी छिलके को अच्छी तरह से निकाल लें। इसके बाद कटहल के बीज को काटकर पीस लें। आप हर दिन 30 ग्राम कटहल के आटे को सामान्य आटे में भी मिलाकर खा सकते हैं।

कटहल खाने के और फायदें

आपको बता दे, कटहल के अंदर कई पौष्टिक तत्‍व पाए जाते हैं जैसे, विटामिन ए, सी, थाइमिन, पोटैशियम, कैल्‍शियम, राइबोफ्लेविन, आयरन, नियासिन और जिंक आदि। इसमें खूब सारा फाइबर पाया जाता है। इसमें बिल्‍कुल भी कैलोरी नहीं होती है। पके हुए कटहल के पल्प को अच्छी तरह से मैश करके पानी में उबाला जाए और इस मिश्रण को ठंडा कर एक गिलास पीने से ताजगी आती है।

- कटहल का सेवन दिल के रोगियों के लिये फायदेमंद साबित होता है। कटहल में मौजूद पोटैशियम ब्लड प्रेशर को कंट्रोल में रखता है। इससे हार्ट संबंधी बीमारियों का खतरा कम होता है।
- पके कटहल में विटामिन सी पाया जाता है और विटामिन-सी कारगर एंटीऑक्सीडेंट के रूप में काम करता है, जो इम्यूनिटी को मजबूत बनाने में मदद कर सकते हैं।
- डाइजेशन की समस्या व्यक्तियों को कटहल का सेवन फायदेमंद होता है। पका हुआ कटहल अल्‍सर और पाचन संबंधी समस्‍या को दूर करता है और साथ ही कब्‍ज की समस्‍या से भी छुटकारा दिलाता है।
- कटहल रेसवेरेट्रॉल नामक एंटीऑक्सीडेंट का अच्छा स्रोत है। पके कटहल में मौजूद एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण मोटापे को रोकने में मदद करते हैं।

- जिन लोगों को मुंह में बार-बार छाले होने की शिकायत रहती है, उन्हें कटहल की कच्ची पत्तियों को चबाकर थूकना चाहिए। इससे छालों की समस्या में आराम मिलता है।
- पका कटहल खाने से लीवर हेल्दी रहता है। पके हुए कटहल में मौजूद पोषक तत्व लीवर को सही तरीके से काम करने में मदद करते हैं।
- कटहल में काफी मात्रा में आयरन पाया जाता है। यह एनीमिया दूर करता है। शरीर में रक्तसंचार बढ़ाता है।
- कटहल की जड़ अस्‍थमा के रोगियो के लिए लाभदायक मानी जाती है इसकी जड़ को पानी के साथ उबाल कर बचा हुआ पानी छान कर लेने से अस्‍थमा पर नियंत्रण होता है।
- थायराइड के लिए भी कटहल उत्तम है इसमें मौजूद सूक्ष्म खनिज और कॉपर थायराइड चयापचय के लिये प्रभावशाली होता है।
- कटहल में मौजूद मैग्‍नीशियम हड्डी में मजबूती लाता है।
- आंखों तथा त्‍वचा के लिए भी कटहल का सेवन फायदेमंद साबित होता है। इस फल में विटामिन ए पाया जाता है जिससे आंखों की रोशनी बढ़ती है और त्वचा निखरती है।

डायबिटीज के मरीजों को करना चाहिए इन चीजों का सेवन

अंडे


अंडे को प्रोटीन का पॉवरहाउस कहा जाता है। इसमें एल्ब्यूमिन प्रोटीन भरपूर मात्रा में पाया जाता है। ये ब्लड शुगर लेवल को स्टेबल रखता है और भूख लगने वाले हॉर्मोन को दबाकर वजन घटाने में मदद करता है। डायबिटीज के मरीज अगर अपना वजन नियंत्रित रखें तो इससे उनका सेहत काफी हद तक सही रहता है। एक अंडे में 6 ग्राम उच्च गुणवत्ता वाले प्रोटीन व शरीर के लिए आवश्यक 9 अमीनो एसिड पाए जाते हैं। सल्फर समेत अन्य खनिज-विटामिन होने के चलते अंडा बालों व नाखूनों के लिए अच्छा होता है। इसके साथ-साथ अंडे में भरपूर मात्रा में विटामिन-डी भी पाया जाता है जो हड्डियों को मजबूत बनाने के लिए बेहद आवश्यक है। यह शरीर में सूर्य की किरणों के अवशोषण में मदद करता है, जिससे हड्डियां मजबूत होती है।

शकरकंद

शकरकंद को स्वीट पोटैटो के नाम से भी जाना जाता है और इसमें ऊर्जा का खजाना होता है। शकरकंद डायबिटीज के लिए जरूरी कार्ब्स में से एक है। एक मध्यम आकार के शकरकंद में 4 ग्राम फाइबर और विटामिन C होता है। इसके अलावा शकरकंद में भरपूर मात्रा में विटामिन A भी पाया जाता है। सैचुरेटेड फैट और कोलेस्ट्रॉल की मात्रा इसमें न के बराबर रहती है। शकरकंद पोटैशियम का एक बहुत अच्छा माध्यम है। यह नर्वस सिस्टम की सक्रियता को सही बनाए रखने के लिए आवश्यक है। साथ ही किडनी को भी स्वस्थ रखने में महत्वपूर्ण योगदान देता है।

फैटी फिश

अमेरिकन हार्ट एसोशिएशन के अनुसार, डायबिटीज के मरीजों को दिल की बीमारी का खतरा ज्यादा होता है। ऐसी मछलियां जिनमें ओमेगा-3 फैटी एसिड की भरपूर मात्रा होती है जैसे सालमन, हेरिंग, सार्डिन, मैकेरल, ट्राउट और ट्यूना फिश से दिल की बीमारी का खतरा और इंफ्लेमेशन कम होता है। डायबिटीज की वजह से होने वाली आंखों की दिक्कत भी फैटी फिश से दूर होती है। डायबिटीज के मरीजों को हफ्ते में 2 बार फैटी फिश खानी चाहिए। इसके साथ ही जो लोग नियमित रूप से मछली का सेवन करते हैं उन्हें कैंसर होने का खतरा कम होता है। मछली में मौजूद ओमेगा-3 फैटी एसिड कैंसर से बचाव करता है। इसे खाने से ब्रेस्ट कैंसर, प्रोस्टेट कैंसर से बचाव होता है। अगर आप नॉनवेज खाने के शौकीन हैं तो अपने आहार में मछली को इस्तेमाल जरुर करें।

पालक

पालक स्वास्थ्य की दृष्टि से अत्यंत उपयोगी है, सर्वसुलभ एवं सस्ता है। पालक में पाए जाने वाले तत्वों में मुख्य रूप से कैल्शियम, सोडियम, क्लोरीन, फास्फोरस, लोहा, खनिज लवण, प्रोटीन, श्वेतसार, विटामिन 'ए' एवं 'सी' आदि उल्लेखनीय हैं। पालक में कार्ब्स और कैलोरी बहुत कम और पोषक तत्व भरपूर मात्रा में होते हैं। पालक बल्ड शुगर को कंट्रोल में रखता है। हेल्थ एक्सपर्ट्स के मुताबिक हरी पत्तेदार सब्जियों में पॉलीफेनोल और विटामिन C होता है। इसे नियमित रूप से खाने से डायबिटीज होने की संभावना कम हो जाती है। इसमें भरपूर मात्रा में मैग्नीशियम होता है जो इंसुलिन प्रतिरोध से लड़ने में मदद करता है।

एवोकाडो

एवोकाडो एक पॉपुलर सुपरफूड (Superfood) है। एवोकाडो को मीठे और नमकीन दोनों व्यंजनों में शामिल किया जाता एवोकाडो में उच्च फैटी एसिड (Fatty Acids) के साथ विटामिन ए, बी, ई, फाइबर, मिनरल्स और प्रोटीन भरपूर में मात्रा में पाया जाता है। ये फल हेल्दी फैट का अच्छा स्त्रोत होता है। ये फाइबर से भरपूर होते हैं जो बल्ड शुगर को नियंत्रित करके इंसुलिन स्पाइक्स को कम करने में मदद करते हैं। हालांकि, इसमें कैलोरीज ज्यादा होती हैं इसलिए इसके खाने की मात्रा पर ध्यान देना चाहिए। एक मध्यम आकार के एवोकाडो के आधे भाग में 180 कैलोरी होती है। एवोकाडो कोलेस्ट्रॉल लेवल को कम करने में मदद कर सकता है। कोलेस्ट्रॉल के मरीज एवोकाडो खाकर फायदा ले सकते हैं।

फलियां

अपने किचन में कुछ दास, फलियां और छोले हमेशा रखें। इन्हें बनाना बहुत आसान होता है और ये फाइबर और प्रोटीन से भरपूर होते हैं। साथ ही ब्लड शुगर को कंट्रोल करने में भी मदद करता है।

दही

दही में कई प्रकार के पौष्टिक तत्व मौजूद होते हैं जिनको खाने से शरीर को फायदा होता है। दही में कैल्शियम, प्रोटीन, विटामिन पाया जाता है और कार्बोहाइड्रेट कम होता है। दही खाने से पेट लंबे समय तक भरा रहता है और ब्लड शुगर भी कंट्रोल में रहता है। कोशिश करें कि बिना चीनी वाली दही खाएं। आप चाहें तो इसमें थोड़े से जामुन या अनार डालकर भी खा सकते हैं। दही कैल्शियम भरपूर मात्रा में पाया जाता है जो कि हड्डियों के लिए बहुत फायदेमंद होता है। दही खाने से दांत भी मजबूत होते हैं।

बेरीज

बेरीज में प्राकृतिक मिठास होती है और ये खाने में बहुत स्वादिष्ट होते हैं। इनमें पाया जाने वाला फाइबर और एंटीऑक्सीडेंट ब्लड शुगर को बढ़ने से रोकता है और दिल की बीमारी को भी दूर रखता है। इन्हें आप कई दिनों तक फ्रिज में स्टोर करके भी रख सकते हैं।

नट्स

डायबिटीज के मरीजों को बिना नमक वाले स्नैक्स खाने चाहिए। इनसे फाइबर, प्रोटीन और हेल्दी फैट होता है जो बल्ड शुगर को कंट्रोल में रखता है। इसके अलावा इसमें पाया जाने वाला मैग्नीशियम इंसुलिन प्रतिरोध से लड़ने में मदद करता है। कैलोरी को नियंत्रण में रखने के लिए इसे संतुलित मात्रा में ही खाएं।