क्या इंसान 10 दिन तक बिना सोए रह सकता है? जानिए क्या कहती है मेडिकल रिसर्च

नींद को अक्सर लोग सिर्फ आराम करने का तरीका समझते हैं, लेकिन वास्तव में यह शरीर और दिमाग के लिए बेहद जरूरी प्रक्रिया है। ऐसे में सवाल उठता है कि अगर कोई व्यक्ति लगातार कई दिनों तक बिल्कुल न सोए तो वह कितने समय तक जिंदा रह सकता है और आखिर वह सीमा कब आती है जब शरीर जवाब देने लगता है।

इस सवाल का सीधा जवाब यह है कि इंसान के लिए बिना सोए रहने की कोई निश्चित अधिकतम सीमा वैज्ञानिक तौर पर तय नहीं है। इसकी एक वजह यह भी है कि लंबे समय तक किसी व्यक्ति को पूरी तरह नींद से वंचित रखना नैतिक रूप से सुरक्षित नहीं माना जाता। इसलिए वैज्ञानिकों के पास ऐसा कोई नियंत्रित अध्ययन नहीं है जो यह बता सके कि अमुक घंटे या अमुक दिनों के बाद हर इंसान की मौत निश्चित हो जाएगी।

फिर भी नींद की कमी के असर को लेकर वैज्ञानिकों के पास काफी जानकारी है। जैसे-जैसे जागने का समय बढ़ता है, दिमाग और शरीर की कार्यक्षमता प्रभावित होने लगती है।

11 दिन तक जागने का चर्चित मामला

नींद के बिना सबसे चर्चित मानव प्रयोगों में अमेरिकी युवक Randy Gardner का मामला शामिल है। 1960 के दशक में Gardner ने निगरानी में करीब 264 घंटे यानी 11 दिन तक जागे रहने का रिकॉर्ड बनाया था।

इस दौरान उनके व्यवहार और मानसिक कार्यक्षमता में बदलाव देखे गए थे। बाद में उन्होंने नींद लेकर रिकवरी की। वैज्ञानिक साहित्य में यह मामला लंबे समय तक जागे रहने का एक महत्वपूर्ण उदाहरण माना जाता है, लेकिन इसका अर्थ यह नहीं है कि इंसान के लिए 11 दिन तक बिना सोए रहना सुरक्षित है या हर व्यक्ति इतनी देर तक जीवित रह सकता है।

दरअसल, Gardner का मामला एक नियंत्रित और असाधारण परिस्थिति का उदाहरण था। इससे किसी व्यक्ति के लिए “11 दिन” को सुरक्षित सीमा मानना गलत होगा।

24 घंटे तक न सोने पर क्या होता है?

लगातार करीब एक दिन तक नींद न लेने पर ही दिमाग की कार्यक्षमता प्रभावित होने लगती है। ध्यान केंद्रित करने, सही निर्णय लेने और प्रतिक्रिया देने की क्षमता कम हो सकती है। नींद की कमी बढ़ने पर व्यक्ति को अत्यधिक थकान, चिड़चिड़ापन और ध्यान लगाने में परेशानी हो सकती है। काम या वाहन चलाने जैसी गतिविधियों में गलती का जोखिम भी बढ़ जाता है। इसी वजह से लंबे समय तक जागने को केवल थकान की समस्या नहीं माना जाता। नींद की कमी सुरक्षा के लिए भी गंभीर खतरा बन सकती है।
48 घंटे और उससे आगे नींद न मिलने पर

जब कोई व्यक्ति लगातार दो दिन या उससे ज्यादा समय तक पर्याप्त नींद नहीं लेता, तो सामान्य मानसिक और शारीरिक कार्यक्षमता और अधिक प्रभावित हो सकती है। इस दौरान शरीर को जागे रहने में कठिनाई होने लगती है और अनैच्छिक रूप से कुछ सेकंड के लिए “microsleep” जैसी स्थिति भी हो सकती है।

Microsleep में व्यक्ति कुछ क्षणों के लिए अनजाने में सो सकता है, जबकि उसे लगता है कि वह अभी भी जाग रहा है। यह स्थिति खास तौर पर ड्राइविंग या मशीन चलाने के दौरान बेहद खतरनाक हो सकती है।

72 घंटे के बाद बढ़ सकता है गंभीर खतरा

लगातार करीब 72 घंटे या उससे अधिक समय तक नींद से वंचित रहने पर स्थिति और गंभीर हो सकती है। व्यक्ति की सोचने-समझने और भावनाओं को नियंत्रित करने की क्षमता काफी प्रभावित हो सकती है।

गंभीर sleep deprivation में कुछ लोगों को ऐसी चीजें दिखाई या सुनाई दे सकती हैं जो वास्तव में मौजूद नहीं होतीं। यानी hallucinations जैसी समस्या भी हो सकती है। वास्तविक और काल्पनिक चीजों के बीच अंतर करना मुश्किल हो सकता है।

इस स्तर की नींद की कमी में व्यक्ति के लिए सामान्य निर्णय लेना और रोजमर्रा के काम सुरक्षित तरीके से करना मुश्किल हो सकता है।

क्या नींद की कमी से सीधे मौत हो सकती है?

यहां एक महत्वपूर्ण अंतर समझना जरूरी है। विज्ञान के पास इंसानों में ऐसी कोई तय सीमा नहीं है जिसके आधार पर कहा जा सके कि इतने घंटे या इतने दिनों तक न सोने के बाद व्यक्ति निश्चित रूप से मर जाएगा।

हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि लंबे समय तक नींद की कमी खतरनाक नहीं है। गंभीर और लगातार sleep deprivation शरीर की कई महत्वपूर्ण प्रणालियों को प्रभावित कर सकती है। नींद शरीर की प्रतिरोधक क्षमता, चयापचय, मानसिक कार्यक्षमता और अन्य महत्वपूर्ण प्रक्रियाओं से जुड़ी है।

लंबे समय तक अपर्याप्त नींद को मोटापा, डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर, हृदय संबंधी समस्याओं और अन्य स्वास्थ्य जोखिमों से जोड़ा गया है।

नींद शरीर के लिए इतनी जरूरी क्यों है?


जब हम सोते हैं, उस दौरान शरीर पूरी तरह निष्क्रिय नहीं होता। नींद के दौरान शरीर में कई महत्वपूर्ण प्रक्रियाएं चलती रहती हैं। इनमें ऊतकों की मरम्मत, प्रतिरक्षा प्रणाली का काम और याददाश्त से जुड़ी प्रक्रियाएं शामिल हैं।

नींद की कमी होने पर प्रतिरक्षा प्रणाली प्रभावित हो सकती है। शोध में कम नींद को शरीर में सूजन, ग्लूकोज मेटाबॉलिज्म में बदलाव और इंसुलिन रेजिस्टेंस जैसे प्रभावों से भी जोड़ा गया है।

कितनी नींद जरूरी है?

हर व्यक्ति की जरूरत उम्र और अन्य परिस्थितियों के अनुसार अलग हो सकती है। सामान्य तौर पर वयस्कों को नियमित रूप से पर्याप्त नींद लेने की सलाह दी जाती है। CDC के अनुसार अधिकांश वयस्कों को हर रात कम से कम 7 घंटे की नींद की जरूरत होती है।

सिर्फ एक-दो रात कम सोने और लगातार कई दिनों तक नींद से वंचित रहने के प्रभाव एक जैसे नहीं होते। अगर नींद की कमी बार-बार होती रहे, तो इसके स्वास्थ्य पर लंबे समय तक असर पड़ सकते हैं।

तो आखिर कितने दिन बिना सोए रह सकता है इंसान?

इसका कोई तय नंबर नहीं है। 11 दिन तक जागे रहने का Randy Gardner का मामला जरूर मौजूद है, लेकिन इसे मानव शरीर की अधिकतम सीमा या सुरक्षित क्षमता नहीं माना जा सकता।

असल बात यह है कि शरीर कई दिनों तक नींद की कमी को सामान्य तरीके से सहन नहीं करता। कुछ ही समय में ध्यान, निर्णय क्षमता और प्रतिक्रिया प्रभावित होने लगती है और ज्यादा गंभीर sleep deprivation में hallucinations तथा अन्य मानसिक समस्याएं सामने आ सकती हैं।

इसलिए “कितने दिन तक बिना सोए जिंदा रह सकते हैं” का जवाब खोजने के बजाय पर्याप्त और नियमित नींद लेना ज्यादा महत्वपूर्ण है। अगर किसी व्यक्ति को लगातार नींद नहीं आ रही है या वह कई रातों से लगभग सो नहीं पाया है, तो इसका कारण जानने के लिए डॉक्टर या sleep specialist से सलाह लेना बेहतर है।