क्या अंडा खाने से बच्चियों में जल्दी शुरू हो जाते हैं पीरियड्स? जानिए क्या है सच्चाई और क्या कहते हैं विशेषज्ञ

बच्चियों के खानपान को लेकर समाज में कई तरह की धारणाएं प्रचलित हैं। इन्हीं में से एक आम धारणा यह भी है कि यदि बढ़ती उम्र की बच्चियों को नियमित रूप से अंडा खिलाया जाए तो उनमें जल्दी पीरियड्स शुरू हो जाते हैं। कई अभिभावक इसी भ्रम के कारण अपनी बेटियों को अंडा खिलाने से बचते हैं। हालांकि स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि इस धारणा का कोई ठोस वैज्ञानिक आधार नहीं है। उनका मानना है कि अंडा एक पौष्टिक खाद्य पदार्थ है और इसका सेवन समय से पहले यौवनारंभ या पीरियड्स आने का कारण नहीं बनता।

अंडा और जल्दी पीरियड्स का क्या है संबंध?


कुछ शोधों में यह चर्चा जरूर हुई है कि पशु स्रोतों से मिलने वाला भोजन शरीर की ऊर्जा और चयापचय पर प्रभाव डाल सकता है। इसी आधार पर कई लोगों ने यह मान लिया कि अंडा खाने से बच्चियों में जल्दी पीरियड्स आने लगते हैं। लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि अब तक ऐसा कोई विश्वसनीय वैज्ञानिक प्रमाण उपलब्ध नहीं है, जिससे यह सिद्ध हो कि केवल अंडा खाने से बच्चियों में समय से पहले यौवनारंभ हो जाता है।

अंडे में नहीं होते ऐसे हार्मोन जो प्यूबर्टी शुरू कर दें

विशेषज्ञों के अनुसार अंडा उच्च गुणवत्ता वाले प्रोटीन, स्वास्थ्यवर्धक वसा, विटामिन और खनिजों का अच्छा स्रोत है। इसमें शरीर के लिए आवश्यक सभी प्रमुख अमीनो अम्ल पाए जाते हैं। जब अंडा खाया जाता है तो उसका प्रोटीन और वसा पाचन प्रक्रिया के दौरान टूटकर शरीर द्वारा अवशोषित किए जाते हैं। यह प्रक्रिया किसी भी प्रकार के ऐसे हार्मोन को शरीर में स्थानांतरित नहीं करती, जिससे बच्चियों में समय से पहले पीरियड्स शुरू हो जाएं।

यौवनारंभ किन कारणों से प्रभावित होता है?


विशेषज्ञों का कहना है कि किसी बच्ची में यौवनारंभ का समय मुख्य रूप से आनुवंशिक कारणों पर निर्भर करता है। इसके अलावा पोषण स्तर, शरीर का वजन, शारीरिक गतिविधियां और संपूर्ण जीवनशैली भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। यदि किसी बच्ची का वजन सामान्य से अधिक है या उसकी जीवनशैली असंतुलित है तो यौवनारंभ अपेक्षाकृत जल्दी हो सकता है।

मोटापा बढ़ा सकता है जोखिम


शरीर में अत्यधिक वसा जमा होने पर एस्ट्रोजन जैसे हार्मोन का स्तर प्रभावित हो सकता है। यही कारण है कि मोटापे से ग्रस्त बच्चियों में कई बार यौवनारंभ सामान्य से पहले देखने को मिलता है। इसलिए विशेषज्ञ संतुलित आहार और नियमित शारीरिक गतिविधियों पर विशेष जोर देते हैं।

जंक फूड और प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थ भी बन सकते हैं कारण


चिप्स, अधिक मिठास वाले पेय, तले हुए खाद्य पदार्थ और अत्यधिक प्रसंस्कृत भोजन शरीर में अतिरिक्त वसा बढ़ाने का काम करते हैं। लगातार ऐसे खाद्य पदार्थों का सेवन मोटापे और हार्मोन असंतुलन का कारण बन सकता है, जिससे समय से पहले यौवनारंभ की संभावना बढ़ सकती है।

जीवनशैली का भी पड़ता है प्रभाव

विशेषज्ञों के अनुसार आजकल बच्चों में शारीरिक गतिविधियां कम हो रही हैं, जबकि मोबाइल, टेलीविजन और अन्य डिजिटल उपकरणों का उपयोग लगातार बढ़ रहा है। पर्याप्त नींद न लेना, तनाव और निष्क्रिय जीवनशैली भी हार्मोन संतुलन को प्रभावित कर सकती है। इसलिए नियमित व्यायाम, संतुलित भोजन और पर्याप्त नींद बच्चों के स्वस्थ विकास के लिए बेहद आवश्यक मानी जाती है।

अभिभावकों को क्या करना चाहिए?

विशेषज्ञों का कहना है कि यदि बच्ची का शारीरिक विकास सामान्य गति से हो रहा है तो अंडा जैसे पौष्टिक खाद्य पदार्थों को बिना किसी डर के उसके भोजन में शामिल किया जा सकता है। यदि बहुत कम उम्र में यौवनारंभ के लक्षण दिखाई दें या विकास को लेकर कोई असामान्य परिवर्तन महसूस हो तो स्वयं निष्कर्ष निकालने के बजाय बाल रोग विशेषज्ञ या अंतःस्रावी रोग विशेषज्ञ से परामर्श लेना चाहिए।

क्या कहता है निष्कर्ष?


उपलब्ध वैज्ञानिक अध्ययनों और विशेषज्ञों की राय के अनुसार यह कहना सही नहीं होगा कि अंडा खाने से बच्चियों में जल्दी पीरियड्स शुरू हो जाते हैं। समय से पहले यौवनारंभ के पीछे कई जैविक, आनुवंशिक और जीवनशैली से जुड़े कारण जिम्मेदार हो सकते हैं। इसलिए किसी एक खाद्य पदार्थ को इसका कारण मानना उचित नहीं है। संतुलित और पौष्टिक आहार, नियमित शारीरिक गतिविधि तथा स्वस्थ जीवनशैली ही बच्चों के बेहतर शारीरिक और मानसिक विकास की सबसे महत्वपूर्ण आधारशिला मानी जाती है।