कई बार ऐसा होता है कि शॉपिंग मॉल के ट्रायल रूम में कोई ड्रेस, शर्ट या टी-शर्ट हमें बेहद शानदार लगती है, लेकिन वही कपड़ा घर पहुंचने के बाद उतना आकर्षक नहीं दिखता। स्टोर में जो रंग चमकदार और फिटिंग परफेक्ट लग रही होती है, घर की रोशनी में वह थोड़ी अलग नजर आने लगती है। ऐसे में मन में सवाल उठना लाजिमी है कि आखिर ऐसा क्यों होता है? क्या कपड़े सच में बदल जाते हैं? दरअसल इसके पीछे कपड़ों से ज्यादा साइकोलॉजी, लाइटिंग और ट्रायल रूम की खास डिजाइनिंग काम करती है।
आखिर ट्रायल रूम में कपड़े इतने अच्छे क्यों लगते हैं?
1. लाइटिंग करती है पूरा खेलमॉल और ब्रांडेड स्टोर्स के ट्रायल रूम में खास तरह की लाइटिंग लगाई जाती है। यहां आमतौर पर वॉर्म और सॉफ्ट लाइट्स का इस्तेमाल होता है, जो चेहरे और शरीर पर पड़ने वाली शैडो को कम कर देती हैं।
इन लाइट्स को इस तरह सेट किया जाता है कि स्किन ज्यादा स्मूद और ग्लोइंग दिखाई दे। साथ ही कपड़ों के रंग भी ज्यादा ब्राइट और प्रीमियम नजर आते हैं। यही वजह है कि ट्रायल रूम में कोई साधारण कपड़ा भी स्टाइलिश और महंगा लगने लगता है।
घर पहुंचने के बाद जब वही कपड़े सामान्य सफेद ट्यूबलाइट या प्राकृतिक रोशनी में दिखाई देते हैं, तब उनका असली रंग और टेक्सचर सामने आता है। इसलिए कई बार कपड़ों का लुक पहले जैसा नहीं लगता।
2. शीशों की खास सेटिंग भी करती है असरट्रायल रूम में लगे मिरर सामान्य शीशों जैसे नहीं होते। कई जगह इन्हें हल्के एंगल या टिल्ट पर लगाया जाता है, जिससे शरीर थोड़ा लंबा और स्लिम दिखाई देता है।
कुछ बड़े फैशन ब्रांड्स ऐसे “स्लिमिंग मिरर्स” का इस्तेमाल भी करते हैं, जो इंसान को वास्तविकता से थोड़ा ज्यादा फिट और आकर्षक दिखाते हैं। जब हम खुद को ऐसे शीशे में बेहतर लुक में देखते हैं, तो दिमाग उस आउटफिट को तुरंत पसंद करने लगता है।
यही वजह है कि ट्रायल रूम में कपड़े ज्यादा परफेक्ट महसूस होते हैं, जबकि घर के सामान्य आईने में वही फिटिंग अलग नजर आ सकती है।
3. ट्रायल रूम का माहौल बढ़ाता है “फील गुड” फैक्टरशॉपिंग स्टोर्स अपने ट्रायल रूम को बेहद साफ-सुथरा, खुशबूदार और आरामदायक रखते हैं। वहां एसी का तापमान भी ऐसा रखा जाता है जिससे इंसान रिलैक्स महसूस करे।
जब कोई व्यक्ति बाहर की गर्मी, ट्रैफिक और भीड़भाड़ से निकलकर शांत और ठंडे ट्रायल रूम में जाता है, तो उसका मूड पहले से बेहतर हो जाता है। इस पॉजिटिव माहौल का असर हमारी सोच पर भी पड़ता है और हमें कपड़े ज्यादा अच्छे लगने लगते हैं।
मनोविज्ञान के अनुसार जब इंसान अच्छा महसूस करता है, तो वह चीजों को ज्यादा आकर्षक नजरिए से देखने लगता है। यही कारण है कि ट्रायल रूम में साधारण आउटफिट भी बेहद स्टाइलिश लग सकता है।
खरीदारी करते समय इन बातों का रखें ध्यानअगर आप चाहते हैं कि घर आने के बाद भी कपड़े वैसे ही अच्छे लगें जैसे ट्रायल रूम में लगे थे, तो कपड़े खरीदते समय सिर्फ ट्रायल रूम की लाइटिंग पर भरोसा न करें। कोशिश करें कि आउटफिट को स्टोर की सामान्य रोशनी में भी देखें।
साथ ही फिटिंग को अलग-अलग एंगल से चेक करें और जल्दबाजी में फैसला लेने से बचें। इससे आपको कपड़ों का असली रंग, लुक और फिट बेहतर तरीके से समझ आएगा।