बॉलीवुड की सबसे मशहूर जोड़ियों में से एक, सुनील दत्त और नरगिस की प्रेम कहानी आज भी लोगों के दिलों में बसी हुई है। 'मदर इंडिया' के सेट पर शुरू हुआ उनका रिश्ता एक सच्चे प्यार की मिसाल बना, लेकिन यह सफर 1981 में नरगिस के निधन के साथ अधूरा रह गया। अग्नाशय कैंसर के कारण वह दुनिया छोड़ गईं, जिससे सुनील दत्त की जिंदगी में एक गहरा खालीपन आ गया।
एक पुराने इंटरव्यू में, अभिनेत्री और टॉक शो होस्ट तबस्सुम से बातचीत के दौरान सुनील दत्त ने अपनी पत्नी को खोने के बाद की जिंदगी के बारे में खुलकर बात की। उन्होंने स्वीकार किया कि वह कभी नहीं सोच सकते थे कि नरगिस के बिना जी पाएंगे, लेकिन समय के साथ उन्होंने खुद को संभाल लिया।
उन्होंने भावुक होकर कहा, मैं अपने एहसास को शब्दों में बयां नहीं कर सकता। जब हम किसी अपने को खो देते हैं, तो लगता है कि अब हम जी नहीं पाएंगे। मुझे भी ऐसा ही लगता था, लेकिन देखिए, मैं आज भी जी रहा हूं।
उन्होंने 'मदर इंडिया' के एक गीत का भी जिक्र किया, जो उन्हें अक्सर याद आता था। बिना नाम लिए उन्होंने 'दुनिया में हम आए हैं तो जीना ही पड़ेगा' गीत की ओर इशारा किया, जिसे खुद नरगिस ने फिल्म में निभाया था। इस गीत के बोल उन्हें हमेशा यह अहसास कराते रहे कि जीवन, चाहे कितनी भी मुश्किलें आएं, आगे बढ़ता रहता है।
हालांकि नरगिस उनके साथ नहीं थीं, लेकिन सुनील दत्त ने उनकी यादों को हमेशा संजोकर रखा। उन्होंने अपना जीवन समाजसेवा को समर्पित कर दिया और नरगिस दत्त फाउंडेशन की स्थापना की, जो कैंसर रोगियों की सहायता करता है। उनकी बातों और कार्यों में नरगिस के प्रति उनका प्यार साफ झलकता था, यह साबित करता है कि सच्चा प्यार कभी नहीं मिटता, चाहे इंसान हमारे साथ हो या न हो।
सुनील दत्त के ये भावुक शब्द आज भी लोगों के दिलों को छूते हैं, यह याद दिलाते हुए कि अपने प्रियजनों को खोने के बाद भी हमें उनकी यादों के साथ आगे बढ़ने की ताकत जुटानी होती है।