बॉलीवुड की बड़ी-बड़ी ब्लॉकबस्टर्स फिल्मों में से कई फिल्में समय के साथ भुला दी गईं, लेकिन 50 साल पहले भारत के स्वतंत्रता दिवस पर रिलीज़ हुई फिल्म शोले आज भी अपनी खास जगह पर कायम है। यह केवल एक फिल्म नहीं, बल्कि भारतीय सिनेमा के इतिहास में एक ऐसा आयाम है जिसने दर्शकों के दिलों में अमिट छाप छोड़ी। सवाल यह उठता है कि आखिर शोले में ऐसा क्या है कि यह आज भी दमदार और प्रासंगिक बनी हुई है। इसके कई कारण हैं, लेकिन तीन प्रमुख कारण इसे आज भी यादगार बनाते हैं।
पहला कारण है गब्बर सिंह का अलग अंदाज। अमजद खान द्वारा निभाया गया गब्बर सिंह न केवल खलनायक के रूप में भयभीत करता था, बल्कि उसका संवाद, उसका व्यक्तित्व और उसकी प्रस्तुति दर्शकों को हमेशा मंत्रमुग्ध करती रही। दूसरा कारण है कि हीरो और विलेन को बराबरी का मौका मिला, कहानी में कोई पक्षपात नहीं था, दोनों के पास दमदार रोल और महत्वपूर्ण दृश्य थे, जिससे फिल्म में संतुलन और रोमांच बना रहा। तीसरा कारण है कि अगले क्षण क्या होगा, इसका अनुमान लगाना कठिन था। फिल्म में कई सीन शॉकिंग थे—तीनों मुख्य किरदार बच जाते हैं और अगले ही क्षण तीनों एक साथ ढेर हो जाते हैं। यही अप्रत्याशितता और रोमांच दर्शकों को जोड़े रखता है।
शोले फिल्म में अपने जमाने के तीन स्थापित सुपर स्टार—संजीव कुमार, धर्मेंद्र और अमिताभ बच्चन—थे, लेकिन इसमें नए कलाकार अमजद खान ने गब्बर सिंह के रूप में वह लोकप्रियता हासिल की कि गब्बर सिंह आज भी भारतीय सिनेमा में जिंदा है। बॉलीवुड के इतिहास में खलनायक के मामले में अब तक कोई गब्बर सिंह को मात नहीं दे पाया।
शोले में गब्बर सिंह का रोल पहले डैनी को दिया जाना था, लेकिन उनकी तारीखें बी.आर. चोपड़ा की धुंध से टकरा रही थी, ऐसे में इस किरदार के लिए फिर शत्रुघ्न सिन्हा से सम्पर्क किया गया, लेकिन वे भी व्यवस्तता के चलते इसे करने में असमर्थ थे। सलीम खान ने अमजद खान को दिल्ली में रंगमंच पर एक आर्मी आफिसर का किरदार निभाते देखा था, उन्हें गब्बर की भूमिका के लिए वे सबसे उपयुक्त लगे। उन्होंने इस बात की जानकारी रमेश सिप्पी को दी। यही अवसर अमजद खान को मिला।
गब्बर का आतंक और प्रतीकात्मकतागब्बर सिंह केवल एक खलनायक नहीं था, बल्कि वह भारतीय समाज में व्याप्त हिंसा और अन्याय का प्रतीक बन गया। अमजद खान ने अपने भारी-भरकम स्वर और भयावह हँसी से गब्बर को जीवंत कर दिया। इसके बाद हिंदी सिनेमा के हर खलनायक को गब्बर की तुलना में आँका जाने लगा।
शोले ने बॉलीवुड का अंदाज और इतिहास ही बदल दिया। शोले के अलावा, अमजद खान ने कुर्बानी, लव स्टोरी, चरस, हम किसी से कम नहीं, इनकार, परवरिश, शतरंज के खिलाड़ी, देस-परदेस, दादा, गंगा की सौगंध, कसमे-वादे, मुकद्दर का सिकंदर, लावारिस, मिस्टर नटवरलाल, सुहाग, कालिया, नसीब, हिम्मतवाला जैसी कई सुपर हिट फिल्में कीं। लेकिन बॉलीवुड में अमरता उन्हें केवल गब्बर सिंह के किरदार ने दी।
आज भी जब गब्बर सिंह का नाम लिया जाता है, तो सिर्फ अमजद खान का किरदार ही याद आता है। यह फिल्म और उसका खलनायक भारतीय सिनेमा के लिए एक मिसाल बन चुका है, जो नए-पुराने दर्शकों के बीच लगातार चर्चा में रहता है। शोले ने न केवल कहानी, अभिनय और डायरेक्शन में नयी मानक स्थापित की, बल्कि खलनायक की छवि को भी एक नया मुकाम दिया।