टीवी इंडस्ट्री की लोकप्रिय अभिनेत्री शिल्पा शिंदे एक बार फिर सुर्खियों में हैं। इस बार चर्चा का केंद्र उनका हालिया बयान है, जिसमें उन्होंने निर्माता संजय कोहली से जुड़े पुराने यौन उत्पीड़न मामले को लेकर बड़ा खुलासा किया। कॉमेडियन भारती सिंह और हर्ष लिंबाचिया के यूट्यूब पॉडकास्ट में बातचीत के दौरान शिल्पा ने कहा था कि उन्होंने अतीत में संजय कोहली के खिलाफ जो आरोप लगाए थे, वे सही नहीं थे। इस बयान के सामने आते ही सोशल मीडिया पर बहस छिड़ गई और अभिनेत्री को तीखी आलोचनाओं का सामना करना पड़ा।
मामले ने तब और गंभीर रूप ले लिया जब टीवी अभिनेत्री हिना खान ने भी इस विषय पर प्रतिक्रिया देते हुए सख्त कार्रवाई की मांग की। वहीं, ऑल इंडियन सिने वर्कर्स एसोसिएशन (AICWA) ने भी इस पूरे विवाद को गंभीर मानते हुए निष्पक्ष जांच की मांग की है। संगठन ने महाराष्ट्र के गृह मंत्री देवेंद्र फडणवीस से मामले में हस्तक्षेप करने की अपील की है। इन सबके बीच शिल्पा शिंदे ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो साझा कर अपने आलोचकों और ट्रोलर्स को जवाब दिया है।
लोगों को कानून की जानकारी देने के लिए कोर्स चलाना पड़ेगावीडियो में शिल्पा शिंदे ने व्यंग्यात्मक अंदाज अपनाते हुए कहा कि शायद अब उन्हें यूट्यूब पर व्लॉग शुरू करना पड़ेगा क्योंकि लोगों को कानून की बुनियादी समझ की कमी है। उन्होंने मजाकिया लहजे में कहा कि वह दो दिन का एक कोर्स भी शुरू कर सकती हैं, जिसमें लोगों को कानूनी प्रावधानों और यौन उत्पीड़न की परिभाषा के बारे में बताया जाएगा।
शिल्पा ने कहा कि सोशल मीडिया पर कई लोग बिना तथ्यों को समझे अपनी राय बना रहे हैं और सेक्सुअल हैरेसमेंट जैसे संवेदनशील विषय को केवल रेप या शारीरिक शोषण तक सीमित कर रहे हैं। अभिनेत्री के अनुसार, कानून में यौन उत्पीड़न की परिभाषा कहीं अधिक व्यापक है और इसे सही संदर्भ में समझने की जरूरत है।
यौन उत्पीड़न की कानूनी परिभाषा पर रखी अपनी बातवीडियो में उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि यदि कोई व्यक्ति किसी महिला को उसकी इच्छा के विरुद्ध ऐसे तरीके से छूता है जिससे वह असहज महसूस करे, तो वह भी यौन उत्पीड़न की श्रेणी में आ सकता है। शिल्पा का कहना था कि कानून ऐसे मामलों को गंभीरता से लेता है और इन्हें भी सेक्सुअल हैरेसमेंट के दायरे में शामिल किया जाता है।
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि कुछ लोग जानबूझकर उनके बयान को गलत तरीके से पेश कर रहे हैं। अभिनेत्री का कहना था कि जो लोग इस विषय पर टिप्पणी कर रहे हैं, उन्हें पहले संबंधित कानूनों और तथ्यों की पूरी जानकारी लेनी चाहिए। उन्होंने कहा कि केवल चर्चा या विवाद पैदा करने के लिए किसी भी मामले की अधूरी व्याख्या नहीं की जानी चाहिए।
संजय कोहली के नौ साल के संघर्ष का किया जिक्रअपने वीडियो में शिल्पा शिंदे ने निर्माता संजय कोहली की स्थिति का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि पिछले नौ वर्षों में उन्हें कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ा। अभिनेत्री के मुताबिक, इस विवाद का असर केवल उनके पेशेवर जीवन पर नहीं बल्कि व्यक्तिगत और पारिवारिक जीवन पर भी पड़ा।
शिल्पा ने सवाल उठाते हुए कहा कि क्या किसी ने कभी यह जानने की कोशिश की कि इन वर्षों में संजय कोहली और उनके परिवार ने किन परिस्थितियों का सामना किया होगा। उन्होंने दावा किया कि उन्हें विभिन्न संगठनों और इंडस्ट्री के स्तर पर भी मुश्किलों का सामना करना पड़ा। अभिनेत्री ने कहा कि अब जबकि उन्होंने अपनी बात सार्वजनिक रूप से रखी है, लोगों को पुराने विवादों को पीछे छोड़कर आगे बढ़ने की कोशिश करनी चाहिए।
सोशल मीडिया पोस्ट में समझाया सेक्सुअल हैरेसमेंट का मतलबवीडियो के अलावा शिल्पा शिंदे ने एक विस्तृत पोस्ट भी साझा की, जिसमें उन्होंने यौन उत्पीड़न की परिभाषा को लेकर अपनी बात रखी। उन्होंने लिखा कि सेक्सुअल हैरेसमेंट किसी भी प्रकार का ऐसा अवांछित यौन व्यवहार होता है जिससे कोई व्यक्ति असहज, अपमानित, भयभीत या मानसिक रूप से परेशान महसूस करे।
पोस्ट में उन्होंने उदाहरण देते हुए बताया कि बिना सहमति के शारीरिक संपर्क, यौन टिप्पणियां, आपत्तिजनक मजाक, अनुचित संदेश या तस्वीरें भेजना, बार-बार अवांछित रूप से करीब आने की कोशिश करना या यौन संकेत देने वाले इशारे करना भी इस श्रेणी में आ सकते हैं। उन्होंने लोगों से अपील की कि वे अपनी मनगढ़ंत धारणाओं के आधार पर किसी मामले को लेकर निष्कर्ष न निकालें। इस पोस्ट में उन्होंने संजय कोहली को भी टैग किया था।
एआईसीडब्ल्यूए ने की कार्रवाई और जांच की मांगदूसरी ओर, ऑल इंडियन सिने वर्कर्स एसोसिएशन ने इस पूरे विवाद पर आधिकारिक बयान जारी किया है। संगठन ने कहा कि शिल्पा शिंदे द्वारा पॉडकास्ट में दिया गया बयान फिल्म और टेलीविजन इंडस्ट्री के लिए चिंता का विषय है। उनका मानना है कि यदि किसी व्यक्ति पर झूठा यौन उत्पीड़न का आरोप लगाया जाता है तो उसका प्रभाव केवल आरोपी तक सीमित नहीं रहता, बल्कि उसके परिवार, बच्चों, करियर और मानसिक स्वास्थ्य पर भी गहरा असर पड़ता है।
संगठन ने कहा कि ऐसे मामलों में निष्पक्ष जांच बेहद जरूरी है क्योंकि झूठे आरोपों से वास्तविक पीड़ितों की विश्वसनीयता पर भी असर पड़ सकता है। इससे उन लोगों को न्याय मिलने में कठिनाई हो सकती है जो वास्तव में उत्पीड़न का शिकार हुए हैं।
हालांकि एसोसिएशन ने यह भी स्पष्ट किया कि किसी एक मामले के आधार पर सभी शिकायतों को संदेह की नजर से नहीं देखा जाना चाहिए। संगठन का कहना है कि मनोरंजन जगत में कई महिलाएं वास्तव में उत्पीड़न और शोषण का सामना कर चुकी हैं और उन्हें न्याय तथा समर्थन मिलना चाहिए। किसी एक व्यक्ति के कथित गलत कदम को आधार बनाकर वास्तविक पीड़ितों के अनुभवों को कमजोर नहीं किया जाना चाहिए। फिलहाल शिल्पा शिंदे के बयान और उसके बाद शुरू हुई बहस ने पूरे मामले को एक बार फिर चर्चा के केंद्र में ला दिया है।