फिल्मी दुनिया में कई बार बड़े सपनों और भारी निवेश के बावजूद सफलता हाथ नहीं लगती। ऐसे में इसका असर सिर्फ आर्थिक नुकसान तक सीमित नहीं रहता, बल्कि इससे जुड़े कलाकारों और निर्माताओं की मानसिक स्थिति पर भी गहरा प्रभाव पड़ता है। ऐसा ही एक दर्दनाक और चर्चित किस्सा हिंदी सिनेमा के दिग्गज अभिनेता और निर्देशक सतीश कौशिक से जुड़ा है, जिन्होंने अपने करियर में एक ऐसी असफलता का सामना किया, जिसने उन्हें भीतर तक झकझोर दिया था।
यह पूरा मामला उनकी बहुचर्चित फिल्म ‘रूप की रानी चोरों का राजा’ से जुड़ा है, जिसे उस समय की सबसे महंगी हिंदी फिल्मों में से एक माना जाता था। फिल्म में अनिल कपूर और श्रीदेवी जैसे बड़े सितारे मुख्य भूमिकाओं में थे और इसका निर्माण भव्य स्तर पर किया गया था। फिल्म का निर्देशन स्वयं सतीश कौशिक ने किया था, जबकि इसे बोनी कपूर ने प्रोड्यूस किया था। इतने बड़े बजट और स्टारकास्ट के बावजूद यह फिल्म बॉक्स ऑफिस पर उम्मीदों पर खरी नहीं उतर सकी और बुरी तरह फ्लॉप हो गई।
असफलता के बाद गहरे तनाव में आ गए थे सतीश कौशिकएक लोकप्रिय टॉक शो ‘जीना इसी का नाम है’ में सतीश कौशिक ने खुद इस अनुभव को साझा किया था। उन्होंने बताया कि फिल्म के असफल होने के बाद वह मानसिक रूप से बेहद परेशान हो गए थे। स्थिति इतनी गंभीर थी कि उन्हें बोनी कपूर से यह पूछने की भी हिम्मत नहीं हो पा रही थी कि फिल्म का प्रदर्शन कैसा रहा।
इसी बातचीत के दौरान बोनी कपूर ने भी एक चौंकाने वाला खुलासा किया था कि फिल्म की असफलता के बाद सतीश कौशिक बेहद टूट चुके थे। वह इतने तनाव में थे कि कई बार उन्होंने आत्महत्या जैसे विचारों तक के बारे में सोचा था। बोनी कपूर के अनुसार, एक समय ऐसा भी आया जब सतीश कौशिक चलती कार से कूदने तक के लिए तैयार हो गए थे, और होटल पहुंचने के बाद भी उन्होंने पहली मंजिल से कूदने की बात कही थी।
सतीश कौशिक ने खुद सुनाया किस्से का अलग अंदाजहालांकि, इसी गंभीर घटना को सतीश कौशिक ने बाद में हल्के-फुल्के अंदाज में भी साझा किया। उन्होंने बताया कि जब वह होटल की पहली मंजिल पर खड़े थे, तो नीचे खाने का इंतजाम किया गया था। उस समय उनके मन में एक अजीब सा विचार आया कि अगर वह नीचे कूदते हैं और सीधे खाने पर गिर जाते हैं, तो लोग इसे गलत समझ सकते हैं और सोच सकते हैं कि वह खाने के लिए कूदे हैं।
फिल्म और उसकी भव्य स्टारकास्टफिल्म ‘रूप की रानी चोरों का राजा’ की कहानी मशहूर लेखक जावेद अख्तर ने लिखी थी। इसमें अनुपम खेर, जॉनी लीवर और जैकी श्रॉफ जैसे कई बड़े कलाकारों ने भी अहम भूमिकाएं निभाई थीं। यह फिल्म 16 अप्रैल 1993 को रिलीज हुई थी और भारी उम्मीदों के बावजूद यह दर्शकों को प्रभावित नहीं कर सकी और बॉक्स ऑफिस पर असफल साबित हुई।