रणबीर कपूर फिर जगाएंगे आर.के. स्टूडियो की लौ, डायरेक्शन से करेंगे डेब्यू; दीपिका और अयान मुखर्जी संग करेंगे काम

भारतीय सिनेमा की सबसे प्रतिष्ठित विरासतों में से एक आर.के. स्टूडियो अब एक बार फिर जीवित होने जा रहा है—और इस बार इसे पुनर्जीवित करने की कमान खुद राज कपूर के पोते रणबीर कपूर ने संभाली है। मिड-डे की रिपोर्ट के मुताबिक, रणबीर कपूर ने अपने परिवार की इस ऐतिहासिक धरोहर को दोबारा शुरू करने का फैसला किया है। यह कदम न केवल एक व्यवसायिक पहल है, बल्कि कपूर खानदान की फिल्मी परंपरा को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का भावनात्मक प्रयास भी है।

राज कपूर की विरासत को आधुनिक स्वर देने की तैयारी

रणबीर कपूर इस पुनरुद्धार को एक ऐसे मंच के रूप में देख रहे हैं जहां पुराने दौर की आत्मा और आज के समय की संवेदनाएं एक साथ मिलेंगी। रिपोर्ट के अनुसार, कई स्क्रिप्ट्स पहले ही शॉर्टलिस्ट की जा चुकी हैं और आने वाले महीनों में निर्माण कार्य शुरू हो जाएगा। रणबीर यहां से अपने निर्देशन करियर की भी शुरुआत करने जा रहे हैं, जो उनके अब तक के फिल्मी सफर का सबसे बड़ा मोड़ माना जा रहा है।

अयान मुखर्जी और दीपिका पादुकोण संग नई शुरुआत

रणबीर कपूर की इस नई यात्रा में उनके करीबी दोस्त और ब्रह्मास्त्र के निर्देशक अयान मुखर्जी एक अहम सहयोगी होंगे। दोनों मिलकर आर.के. स्टूडियो बैनर के तहत कई फिल्मों का निर्माण करने की योजना बना रहे हैं। वहीं, दीपिका पादुकोण भी इस प्रोजेक्ट से जुड़ सकती हैं — जिससे रणबीर और दीपिका की ऑनस्क्रीन केमिस्ट्री एक बार फिर पर्दे पर लौटने की संभावना है।

ऋषि कपूर के सपने को साकार करेंगे रणबीर

यह पहल रणबीर के पिता ऋषि कपूर के अधूरे सपने को भी पूरा करेगी। ऋषि कपूर हमेशा चाहते थे कि आर.के. स्टूडियो फिर से फिल्म निर्माण का केंद्र बने। रणबीर अब उसी सपने को आगे बढ़ाते हुए इसे मुंबई में एक क्रिएटिव हब के रूप में स्थापित करने की दिशा में काम कर रहे हैं। योजना के अनुसार, यहां अत्याधुनिक ऑफिस स्पेस, पोस्ट-प्रोडक्शन यूनिट और एक प्राइवेट स्क्रीनिंग थिएटर भी बनाया जाएगा, ताकि यह इंडस्ट्री के सहयोग का नया प्रतीक बन सके।

इतिहास से आज तक: आर.के. स्टूडियो की विरासत


साल 1948 में राज कपूर द्वारा स्थापित आर.के. स्टूडियो भारतीय सिनेमा की अमर धरोहर रहा है। यहां बरसात (1949), आवारा (1951), बॉबी (1973), सत्यम शिवम सुंदरम (1978), प्रेम रोग (1982) और राम तेरी गंगा मैली (1985) जैसी क्लासिक फिल्मों का जन्म हुआ। राज कपूर के निधन के बाद ऋषि कपूर ने आ अब लौट चलें (1999) का निर्देशन किया, जो आर.के. फिल्म्स के तहत बनी आखिरी फिल्म थी।

इसके बाद, इंडस्ट्री का केंद्र मुंबई के उत्तरी उपनगरों में खिसकने लगा, और 2017 की भीषण आग ने आर.के. स्टूडियो की इमारत, पुराने फिल्मी परिधानों और यादगार सामग्री को नष्ट कर दिया। उस हादसे के बाद रखरखाव की लागत और पुनर्निर्माण की कठिनाइयों के कारण कपूर परिवार ने संपत्ति बेच दी थी, जिससे यह ऐतिहासिक स्टूडियो एक अध्याय की तरह बंद हो गया।

अब रणबीर की बारी: एक नई सुबह की शुरुआत

रणबीर कपूर अब इस विरासत को नए सिरे से पुनर्जीवित करने जा रहे हैं। उनके मुताबिक, “आर.के. स्टूडियो सिर्फ एक इमारत नहीं, बल्कि एक भावना है। यह वह जगह है जहां सिनेमा की आत्मा बसती है।” इस पुनःप्रारंभ के साथ, कपूर परिवार की तीसरी पीढ़ी भारतीय सिनेमा में एक बार फिर अपने घराने की प्रतिष्ठा को नई ऊंचाइयों पर ले जाने की तैयारी कर रही है।