भारतीय समाज में अक्सर देखा जाता है कि महिलाएं अपने परिवार की जिम्मेदारियों को निभाते-निभाते खुद को पूरी तरह नजरअंदाज कर देती हैं। घर, पति और बच्चों की देखभाल में वे इतनी व्यस्त रहती हैं कि अपनी सेहत के लिए समय निकालना उनके लिए मुश्किल हो जाता है। इसी गंभीर विषय पर अभिनेत्री Mamta Kulkarni ने खुलकर अपनी राय साझा की है। उन्होंने एक वीडियो संदेश के जरिए समाज में हेल्थ को लेकर बदलती सोच की जरूरत पर जोर दिया।
ममता कुलकर्णी ने अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि उन्होंने अक्सर यह महसूस किया है कि भारतीय महिलाएं अपनी पूरी जिंदगी परिवार की देखभाल में लगा देती हैं। वे अपने कर्तव्यों को प्राथमिकता देती हैं, लेकिन अपनी शारीरिक और मानसिक सेहत को पीछे छोड़ देती हैं। उनके अनुसार, यह सोच कहीं न कहीं गलत है, क्योंकि यदि महिला स्वयं स्वस्थ नहीं रहेगी, तो वह अपने परिवार का सही तरीके से ख्याल भी नहीं रख पाएगी। उन्होंने इस बात पर विशेष जोर दिया कि महिलाओं को अपनी सेहत को भी उतनी ही अहमियत देनी चाहिए जितनी वे अपने परिवार को देती हैं।
यह समस्या सिर्फ महिलाओं तक सीमित नहींममता कुलकर्णी ने यह भी स्पष्ट किया कि स्वास्थ्य के प्रति लापरवाही केवल महिलाओं तक सीमित नहीं है। उन्होंने कहा कि पुरुष और बच्चे भी इस मामले में पीछे नहीं हैं। आजकल लोग फिटनेस को लेकर जागरूक तो दिखते हैं, लेकिन व्यवहार में उतनी गंभीरता नहीं दिखती। कई लोग जिम या हेल्थ क्लब तक पहुंचते जरूर हैं, लेकिन वहां जाकर मेहनत करने के बजाय समय बिताने लगते हैं। इस प्रवृत्ति में बदलाव लाना बेहद जरूरी है ताकि फिटनेस केवल दिखावे तक सीमित न रह जाए, बल्कि जीवनशैली का हिस्सा बने।
उन्होंने विदेशी जीवनशैली का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां छोटे बच्चों से लेकर बुजुर्ग तक सभी अपनी सेहत को लेकर सजग रहते हैं। नियमित एक्सरसाइज, आउटडोर गतिविधियों में भागीदारी और सक्रिय जीवनशैली उनकी दिनचर्या का हिस्सा होती है। यही वजह है कि वे लंबे समय तक फिट और ऊर्जावान बने रहते हैं।
महिलाओं को दी खास सेहत संबंधी सलाहममता कुलकर्णी ने सेहत को बेहतर बनाए रखने के लिए कुछ महत्वपूर्ण सुझाव भी दिए। उन्होंने खासतौर पर विटामिन डी के महत्व को समझाते हुए कहा कि धूप में समय बिताना शरीर के लिए अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने बताया कि अक्सर लोग विदेशियों के पहनावे का मजाक उड़ाते हैं, लेकिन यह नहीं समझते कि वे धूप से मिलने वाले जरूरी पोषण को ग्रहण कर रहे होते हैं, जो शरीर के विकास और फिटनेस के लिए बेहद जरूरी है।
उन्होंने अपनी दिनचर्या का जिक्र करते हुए बताया कि वे सप्ताह में एक या दो बार समुद्र किनारे जरूर जाती हैं। वहां वे नंगे पैर रेत पर चलती हैं, जो शरीर के लिए काफी लाभकारी होता है। उनके अनुसार, रेत में मौजूद प्राकृतिक तत्व, विशेषकर नमक, शरीर से विषैले तत्वों को बाहर निकालने में मदद करते हैं और शरीर को शुद्ध बनाते हैं।
ममता ने आगे बताया कि जब वे समुद्र के पास नहीं जा पातीं, तो वे हेल्थ क्लब का सहारा लेती हैं। वहां स्विमिंग करती हैं, धूप में समय बिताती हैं और अपने शरीर को सक्रिय बनाए रखती हैं। कई बार वे लगातार दो से तीन घंटे तक धूप में रहती हैं ताकि शरीर को पर्याप्त ऊर्जा और पोषण मिल सके।
कुल मिलाकर, ममता कुलकर्णी का संदेश साफ है कि सेहत को नजरअंदाज करना किसी के लिए भी सही नहीं है। चाहे महिलाएं हों, पुरुष हों या बच्चे—हर किसी को अपनी फिटनेस और स्वास्थ्य को प्राथमिकता देनी चाहिए, क्योंकि स्वस्थ शरीर ही खुशहाल जीवन की असली नींव होता है।