ऋषभ शेट्टी की बहुप्रतीक्षित फिल्म कांतारा चैप्टर 1 ने सिनेमाघरों में आते ही तहलका मचा दिया। इस फिल्म ने दर्शकों को न सिर्फ अपनी गहराई और रहस्य से जोड़ा, बल्कि यह भी साबित कर दिया कि जब कहानी, किरदार और निर्देशन दिल से जुड़े हों, तो किसी भी फिल्म को ब्लॉकबस्टर बनने से कोई नहीं रोक सकता। ऋषभ शेट्टी ने इस फ्रेंचाइज़ को गढ़ने में जो मेहनत और बारीकी दिखाई है, उसने इसे एक यादगार सिनेमाई अनुभव बना दिया है। भले ही कई दर्शक इसके लोककथाओं से अनजान थे, लेकिन इसकी आत्मा ने हर दिल को छू लिया।
थिएटर्स में दर्शकों की भीड़, सीटियों और तालियों के बीच कांतारा चैप्टर 1 ने शानदार शुरुआत की और बॉक्स ऑफिस पर झंडे गाड़ दिए। फिल्म ने जबरदस्त कमाई करते हुए एक नया रिकॉर्ड बनाया। लेकिन इसके बीच मेकर्स ने एक चौंकाने वाला ऐलान किया — फिल्म 31 अक्टूबर को अमेज़न प्राइम वीडियो पर रिलीज़ होगी। इतनी जल्दी ओटीटी रिलीज़ ने सभी को हैरान कर दिया। अब इस रहस्य से पर्दा उठ चुका है।
तीन साल पुराना करार बना वजहहोम्बले फिल्म्स के पार्टनर चालुवे गौड़ा ने बताया कि फिल्म की जल्दी ओटीटी रिलीज़ का निर्णय किसी नई रणनीति का हिस्सा नहीं, बल्कि तीन साल पहले किए गए एक पुराने करार का परिणाम है। उस समझौते के अनुसार फिल्म को सीमित समय के भीतर डिजिटल प्लेटफॉर्म पर लाना तय किया गया था। गौड़ा ने स्पष्ट किया कि अभी कांतारा चैप्टर 1 का केवल दक्षिण भारतीय भाषाओं वाला संस्करण ही अमेज़न प्राइम पर स्ट्रीम किया जाएगा — इसमें कन्नड़, तमिल, तेलुगु और मलयालम भाषाएं शामिल हैं। वहीं, फिल्म का हिंदी वर्जन लगभग आठ हफ्तों के बाद ओटीटी पर उपलब्ध होगा।
बॉक्स ऑफिस पर जारी है कांतारा का जादूसिनेमाघरों में रिलीज़ के बाद से ही कांतारा चैप्टर 1 दर्शकों के दिलों और बॉक्स ऑफिस दोनों पर राज कर रही है। फिल्म की कमाई लगातार मजबूत बनी हुई है और यह साल 2025 की सबसे ज़्यादा कमाई करने वाली फिल्मों में शामिल हो चुकी है। हालांकि, यह अभी भी 1000 करोड़ के आंकड़े से थोड़ा दूर है, लेकिन रोज़ाना 10 करोड़ रुपये से अधिक की कमाई के साथ यह लक्ष्य जल्द पूरा कर सकती है।
फिल्म ने अपने शानदार प्रदर्शन से न सिर्फ दर्शकों बल्कि ट्रेड एनालिस्ट्स को भी प्रभावित किया है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, कांतारा चैप्टर 1 ने विक्की कौशल की फिल्म छावा को पीछे छोड़ते हुए इस साल की सबसे बड़ी हिट फिल्मों में जगह बना ली है।
ऋषभ शेट्टी की यह रचना एक बार फिर यह साबित करती है कि भारतीय सिनेमा में जब जड़ों से जुड़ी कहानियां आधुनिक तकनीक के साथ मिलती हैं, तो वे केवल मनोरंजन नहीं बल्कि अनुभव बन जाती हैं।