हिंदी सिनेमा में होली के गीतों की अपनी अलग पहचान रही है। रंगों से सराबोर दृश्य, ढोल की थाप और कलाकारों की मस्ती—ये सब मिलकर फिल्मों में उत्सव जैसा माहौल बना देते हैं। कई बार ऐसे गाने कहानी को आगे बढ़ाने का काम करते हैं, तो कभी वे सिर्फ अपनी भव्यता और ऊर्जा के कारण यादगार बन जाते हैं। लेकिन कुछ गीत ऐसे भी हैं, जो परदे पर जितने रंगीन दिखते हैं, उनके पीछे की कहानी उतनी ही प्रेरणादायक होती है। ऐसा ही एक दिलचस्प किस्सा जुड़ा है ‘ड्रीम गर्ल’ हेमा मालिनी से।
साल 1982 में रिलीज हुई फिल्म Rajput में Hema Malini, Dharmendra, Rajesh Khanna और Vinod Khanna जैसे दिग्गज कलाकार नजर आए थे। इसी फिल्म में फिल्माया गया होली गीत ‘भागी रे भागी बृजबाला’ आज भी अपने रंगीन अंदाज के लिए याद किया जाता है। हालांकि बहुत कम दर्शकों को मालूम है कि इस गाने की शूटिंग के दौरान हेमा मालिनी अपनी गर्भावस्था के अंतिम चरण में थीं।
जब जिम्मेदारी से ऊपर नहीं रखा निजी हालात कोएक रियलिटी शो के मंच पर खुद हेमा मालिनी ने इस अनुभव को साझा किया था। उन्होंने बताया कि उस समय वे लगभग आठ महीने की गर्भवती थीं। वे अपनी बेटी Esha Deol को जन्म देने वाली थीं, लेकिन इसके बावजूद उन्होंने अपने पेशेवर दायित्वों से पीछे हटना उचित नहीं समझा।
उस दौर में शूटिंग की परिस्थितियां आज जितनी सुविधाजनक नहीं थीं। भारी लाइट्स, लंबे टेक और भीड़भाड़ वाले दृश्य आम बात थे। फिर भी हेमा मालिनी ने पूरी ऊर्जा और मुस्कान के साथ इस गीत को पूरा किया। यह केवल एक सीन की शूटिंग नहीं थी, बल्कि उनके समर्पण और अनुशासन का उदाहरण भी थी।
बेबी बंप छिपाने के लिए अपनाई गई खास रणनीतिचूंकि वे गर्भावस्था के उन्नत चरण में थीं, इसलिए उनके लुक और फ्रेमिंग पर विशेष ध्यान दिया गया। कॉस्ट्यूम डिजाइनरों ने ऐसा परिधान तैयार किया, जो ढीला और परतदार था, ताकि स्क्रीन पर बेबी बंप उभरकर न आए।
इसके साथ ही सिनेमैटोग्राफी में भी खास सावधानी बरती गई। कैमरा एंगल्स को सोच-समझकर तय किया गया, ताकि क्लोज-अप और मिड शॉट्स में किसी तरह का बदलाव नजर न आए। भीड़ वाले दृश्यों, उड़ते गुलाल और तेज एडिटिंग का भी कुशलता से उपयोग किया गया, जिससे दर्शकों का ध्यान स्वाभाविक रूप से पूरे फ्रेम पर बना रहे, न कि किसी एक विवरण पर।
प्रोफेशनलिज्म की मिसाल80 के दशक में अभिनेत्रियों के लिए करियर और निजी जीवन के बीच संतुलन बनाना आसान नहीं था। उस समय इंडस्ट्री में मातृत्व को अक्सर काम से ब्रेक लेने का कारण माना जाता था। ऐसे माहौल में हेमा मालिनी का यह निर्णय बताता है कि वे अपने पेशे के प्रति कितनी प्रतिबद्ध थीं।
दिलचस्प बात यह है कि जब फिल्म रिलीज हुई, तब दर्शकों को इस बात का जरा भी अंदाजा नहीं हुआ कि पर्दे पर झूमती अभिनेत्री अपने जीवन के एक खास और संवेदनशील दौर से गुजर रही थीं। गाना उतना ही जीवंत और रंगीन दिखा, जितना किसी सामान्य परिस्थिति में फिल्माया गया गीत होता है।
आज, जब भी होली के अवसर पर यह गीत बजता है, उसके साथ जुड़ी यह कहानी भी प्रेरणा देती है। यह केवल एक उत्सवी सीन नहीं, बल्कि एक कलाकार की लगन, साहस और पेशेवर ईमानदारी का प्रतीक है।