इंडियन आर्मी छोड़कर बॉलीवुड में छाईं माही गिल, 5 घंटे लगातार डांस ने दिलाया फिल्मी ब्रेक

मुम्बई की फिल्म इंडस्ट्री में अपनी किस्मत आजमाने के लिए हजारों लोग आते हैं, लेकिन सिल्वर स्क्रीन पर अपनी जगह बनाने वाले बहुत कम होते हैं। यही चुनौती माही गिल ने पार की और बॉलीवुड में अपनी पहचान बनाई। चंडीगढ़ में जन्मीं माही गिल पहले पंजाबी सिनेमा में काम करती थीं, लेकिन उनका सपना बड़ा था। इसलिए उन्होंने मुंबई का रुख किया। उनके लिए पहली फिल्म पाना किसी चमत्कार से कम नहीं था, और यह मौका उन्हें अपने डांस के लिए मिला।

5-6 घंटे लगातार डांस कर मिली फिल्म


माही ने कपिल शर्मा के शो में खुलासा किया कि वे लगातार एक साल तक डिस्को जाती रही। उन्होंने अपने शुरुआती दिनों को याद करते हुए कहा कि “मुझे लगता था कोई मुझे डिस्को या पेट्रोल पंप में देख लेगा और फिल्म में साइन कर देगा, लेकिन ऐसा नहीं हुआ।” उनकी मेहनत और जज्बे को आखिरकार अनुराग कश्यप ने नोटिस किया। एक बच्चे की बर्थडे पार्टी में 5-6 घंटे लगातार डांस करते हुए अनुराग कश्यप ने उन्हें देखा और फिल्म ‘देव डी’ के लिए साइन किया। इस फिल्म में उन्होंने ‘पारो’ का किरदार निभाया और न्यूकमर के रूप में छा गईं। इसके लिए उन्हें फिल्मफेयर बेस्ट एक्ट्रेस का अवॉर्ड भी मिला।

असल जिंदगी की वीरांगना: इंडियन आर्मी की हिस्सा

माही गिल ने बॉलीवुड में अक्सर एक्शन और दमदार रोल किए, जैसे ‘पान सिंह तोमर’, ‘साहेब बीवी और गैंगस्टर’, ‘गुलाल’, ‘बुलेट राजा’, और ‘फैमिली ऑफ ठाकुरगंज’। लेकिन क्या आप जानते हैं कि असल जिंदगी में भी माही ने साहस दिखाया था और इसी वजह से उन्होंने इंडियन आर्मी में जाने का फैसला किया था। पंजाबी सिनेमा में डेब्यू करने से पहले माही भारतीय सेना का हिस्सा थीं, लेकिन पर्दे पर छाने की जिद ने उन्हें नौकरी छोड़कर फिल्में करने के लिए प्रेरित किया।

जाट परिवार और बहादुरी का अंदाज

माही गिल जाट परिवार से हैं। उन्होंने बताया कि 14 साल की उम्र में फ्रेंच क्लॉसेज के दौरान एक लड़के ने उन्हें छेड़ने की कोशिश की। पहले तीन बार उन्होंने इग्नोर किया, लेकिन चौथी बार लड़के की पिटाई कर दी। इसी निर्भीक स्वभाव ने उन्हें जीवनभर चुनौती स्वीकार करने और बड़े सपने पूरे करने की प्रेरणा दी।

बॉलीवुड और तेलुगू सिनेमा में सफर

माही गिल ने अपने करियर में कई यादगार किरदार निभाए। ‘साहेब बीवी और गैंगस्टर’ में बोल्ड माधवी और ‘देव डी’ में पारो के किरदार के लिए उन्हें आज भी जाना जाता है। उन्होंने तेलुगू फिल्मों में भी काम किया, लेकिन वहां उन्हें उतनी सफलता नहीं मिली।