
20 जनवरी, बुधवार को अमेरिका के निर्वाचित राष्ट्रपति जो बाइडन द्वारा शपथ ली जानी हैं। इससे पहले दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति मून जाए-इन ने जो बाइडन को राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की उत्तर कोरिया के साथ कूटनीतिक विफलता से सबक लेने का आग्रह किया है। एक उदारवादी और युद्ध शरणार्थी के बेटे मून ने उत्तर कोरिया के तानाशाह किम जोंग उन के साथ ट्रंप की तीन बैठकों के लिए जी तोड़ मेहनत की थी। लेकिन उत्तर कोरिया के निरस्त्रीकरण के लिए अमेरिकी प्रतिबंधों पर असहमति के कारण कूटनीतिक गतिरोध बना रहा।
उधर बाइडन ने ट्रंप पर आरोप लगाया कि वह उत्तर कोरिया की परमाणु क्षमता पर सार्थक रोक लगाने के बजाय समिट के पीछे भागते रहे। उत्तर कोरिया का अपने हथियारों के परीक्षण का प्रदर्शन करने का इतिहास रहा है और नए अमेरिकी राष्ट्रपति की परख के लिए उकसाने वाला काम करता रहा है। किम अपने हाल के भाषणों में परमाणु हथियारों के कार्यक्रम को मजबूत करने की कसम खाई थी। ऐसा लगता है कि यह सब वह अमेरिका में नई सरकार पर दबाव बनाने के उद्देश्य से कर रहे हैं।














