मंगलवार को एक तरफ पूरा देश रंगों का त्योहार होली को बड़ी धूमधाम से मना रहा था वहीं कांग्रेस की होली बेरंग साबित हुई। पार्टी के कद्दावर नेता ज्योतिरादित्य सिंधिया ने कांग्रेस छोड़ बीजेपी का दामन थाम लिया है। बुधवार को ज्योतिरादित्य सिंधिया औपचारिक तौर पर भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) का दामन थामेंगे। यह बात अलग है कि कांग्रेस की तरफ से तुरंत प्रतिक्रिया आई कि सिंधिया ने इस्तीफा नहीं दिया है बल्कि उन्हें निकाल दिया गया है। खैर ज्योतिरादित्य सिंधिया के इस्तीफानामे पर जो तारीख लिखी हुई थी वो सबकुछ बयां कर रही थी कि कौन सही और कौन गलत है।
सिंधिया समर्थक विधायकों के समर्थन से बीजेपी फिर प्रदेश की सत्ता पर कब्जा करने की तैयारी कर रही है। भारतीय जनता पार्टी हालांकि कमलनाथ सरकार का तख्ता पलट करने की फिराक में काफी पहले से ही रही है, लेकिन बीजेपी अब कांग्रेस को तोड़ने में कामयाब हो गई।
चिंता की बात नहीं हमारे पास बहुमत है
इस बीच मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री कमलनाथ ने बहुमत का दावा किया है। सीएम कमलनाथ ने कहा कि चिंता की बात नहीं है, हमारे पास बहुमत है। उन्होंने कहा कि विधायकों को कैद किया गया है।
बता दें कि मध्य प्रदेश में कमलनाथ सरकार पर गहराए संकट के बीच कांग्रेस विधायकों की मुख्यमंत्री आवास पर मंगलवार शाम बैठक हुई, जिसमें कुल 92 विधायक पहुंचे, जिनमें 4 निर्दलीय थे। इस बैठक में कांग्रेस के 26 विधायक गैरहाजिर रहे, जिसमें 22 विधायकों ने इस्तीफा दे दिया यानी कांग्रेस के चार और विधायक मीटिंग से गायब रहे। एक तरफ कमलनाथ ने जहां बहुमत का दावा किया तो वहीं कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष अरुण यादव ने बैठक भी कहा कि कांग्रेस की सरकार को कोई खतरा नहीं है।
बता दे, मंगलवार को दिन भर की सियासी गहमागहमी के बीच बीजेपी ने अपने सभी विधायकों को दिल्ली भेज दिया। अब इसे कमलनाथ का डर कहें या सिर्फ विधायकों को सहेजने की कोशिश इस सवाल का जवाब आने वाला समय बताएगा। लेकिन जिस समय भोपाल आफिस में विधायक बसों में सवार हुए उस समय उनके चेहरों पर खुशी से समझा जा सकता था कि अब सियासी रंग बदलने वाला है। उन्होंने कहा कि मध्य प्रदेश की जनता तो डेढ़ साल पहले भी बदलाव नहीं चाहती थी। कमलनाथ किसी तरह सरकार बनाने में कामयाब हो गए। लेकिन अब तस्वीर बदल चुकी है।














