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आखिर झारखंड विधानसभा चुनाव में कहा चूकी बीजेपी, एक नजर...

करी‍ब 5 साल तक सरकार चलाने के वाले मुख्‍यमंत्री रघुबर दास को चुनावी नतीजों में अपनों की नाराजगी भारी पड़ती दिख रही है।

Posts by : Priyanka Maheshwari | Updated on: Mon, 23 Dec 2019 3:12:34

आखिर झारखंड विधानसभा चुनाव में कहा चूकी बीजेपी, एक नजर...

7 राज्यों में इस साल विधानसभा चुनाव हो चुके हैं। इनमें आंध्र प्रदेश, ओडिशा, अरुणाचल प्रदेश, सिक्किम, हरियाणा, महाराष्ट्र और झारखंड शामिल हैं। आंध्र में YSR कांग्रेस, ओडिशा में BJD, अरुणाचल में BJP गठबंधन, सिक्किम में BJP गठबंधन, हरियाणा में BJP गठबंधन और महाराष्ट्र में शिवसेना गठबंधन की सरकार बनी। झारखंड के नतीजे आज घोषित हो रहे हैं और अब तक रिजल्ट में बीजेपी की सत्ता खिसकती दिखाई दे रही है। ताजा रुझानों में झारखंड मुक्ति मोर्चा के नेतृत्‍व वाला विपक्षी महागठबंधन इस भगवा किले पर फतह के लिए बहुत तेजी से आगे बढ़ रहा है। झारखंड में 19 साल के राजनीतिक इतिहास में कोई भी सत्ताधारी पार्टी सत्ता में वापसी नहीं कर सकी है। इस बार भी रघुवर दास के नेतृत्व वाली बीजेपी सरकार की सत्ता से विदाई तय हो गई है। इस तरह से झारखंड ने अपने इतिहास को एक बार फिर दोहराया है। दरअसल, करी‍ब 5 साल तक सरकार चलाने के वाले मुख्‍यमंत्री रघुबर दास को चुनावी नतीजों में अपनों की नाराजगी भारी पड़ती दिख रही है। तो आइए जानते है वो क्या कारण रहे जो झारखंड में नहीं खिला बीजेपी का कमल...

सहयोगियों को नजरंदाज करना पड़ा भारी

बीजेपी ने वर्ष 2014 में हुए विधानसभा चुनाव में अपनी सहयोगी ऑल झारखंड स्‍टूडेंट यूनियन (एजेएसयू) के साथ मिलकर चुनाव लड़ा था। इस चुनाव में बीजेपी को 37 और एजेएसयू को 5 सीटें मिली थीं। चुनाव के बाद जेवीएम के 6 विधायकों और एक अन्य विधायक ने बीजेपी का दामन थाम लिया था। इसके बाद बीजेपी का आंकड़ा 44 पहुंच गया था। लेकिन इस बार बीजेपी ने अपने सहयोगी दल को नजरंदाज किया और अकेले ही चुनावी मैदान में उतरने का फैसला किया और फिर क्या था यह फैसला बीजेपी के लिए भारी पड़ गया। आपको बता दे, झारखंड का गठन 2000 में हुआ था। जिसके बाद से बीजेपी और एजेएसयू साथ मिलकर चुनाव लड़ रहे है। लेकिन इस बार बीजेपी ने नाता तोड़ लिया। यही नहीं बीजेपी की एक अन्‍य सहयोगी पार्टी एलजेपी ने भी साथ मिलकर चुनाव लड़ने का प्रस्‍ताव दिया, लेकिन बीजेपी ने उसे ठुकरा दिया था। बाद में एलजेपी को अकेले चुनाव लड़ना पड़ा।

विपक्ष ने बनाया महागठबंधन


झारखंड में जहां एक तरफ बीजेपी अपने सहयोगी दलों से दूर जा रही थी वही दूसरी तरफ विपक्ष ने एकजुट होकर चुनाव लड़ने का फैसला किया। झारखंड मुक्ति मोर्चा, आरजेडी और कांग्रेस के महागठबंधन ने सीटों का बंटवारा कर चुनाव लड़ा और बीजेपी के अकेले सरकार बनाने के मंसूबों पर पानी फेर दिया। बता दे, 2014 के चुनाव में तीनों ही दल अलग-अलग चुनाव लड़े थे, लेकिन इस बार कांग्रेस ने महाराष्‍ट्र और हरियाणा से सबक सीखते हुए जेएमएम और आरजेडी के साथ महागठबंधन बनाया।

अपनों ने बीजेपी को दिया झटका

बीजेपी को अपने ही नेताओं से काफी बड़े झटके लगे है। चुनाव से पहले भगवा पार्टी के बड़े नेता राधाकृष्‍ण किशोर ने बीजेपी का दामन छोड़कर एजेएसयू के साथ हाथ मिला लिया। किशोर का एजेएसयू में जाना बीजेपी के लिए बड़ा झटका रहा। टिकट बंटवारे के दौरान बीजेपी ने अपने वरिष्‍ठ नेता सरयू राय को टिकट नहीं दिया। सरयू राय ने मुख्‍यमंत्री रघुबर दास के खिलाफ जमशेदपुर ईस्‍ट सीट से चुनाव लड़ा।

आदिवासी चेहरा न होना


झारखंड में 26.3 प्रतिशत आबादी आदिवासियों की है और 28 सीटें आदिवासियों के लिए आरक्षित हैं। महागठबंधन ने जेएमएम के आदिवासी नेता हेमंत सोरेन को सीएम पद का उम्‍मीदवार बनाया, वहीं बीजेपी की ओर से गैर आदिवासी समुदाय से आने वाले रघुबर दास दोबारा सीएम पद के उम्‍मीदवार रहे। झारखंड के आदिवासी समुदाय में रघुबर दास की नीतियों को लेकर आदिवासियों में काफी गुस्‍सा था। आदिवासियों का मानना था कि रघुबर दास ने अपने 5 साल के कार्यकाल के दौरान आदिवासी विरोधी नीतियां बनाईं। खूंटी की यात्रा के दौरान रघुबर दास के ऊपर आदिवासियों ने जूते और चप्‍पल फेंके थे। सूत्रों की मानें तो आदिवासी समुदाय से आने वाले अर्जुन मुंडा को इस बार सीएम बनाए जाने की मांग उठी थी, लेकिन बीजेपी के शीर्ष नेतृत्‍व ने रघुबर दास पर दांव लगाया जो उल्‍टा पड़ गया।

बीजेपी का दांव पड़ा उल्‍टा

झारखंड में बीजेपी को उम्मीद थी कि वह पीएम मोदी के चेहरे को आगे कर चुनाव लड़ेगी तो उसे सफलता मिलेगी। और 81 में से 65 सीटें इस बार जीत लेगी। अपनी इसी रणनीति के तहत बीजेपी ने पीएम मोदी, अमित शाह की कई रैलियां झारखंड में कराई। यही नहीं बीजेपी ने अपने हिंदू पोस्‍टर बॉय यूपी के सीएम योगी आदित्‍यनाथ को भी झारखंड के चुनावी समर में प्रचार के लिए उतारा लेकिन बीजेपी की यह रणनीति बुरी तरह से फ्लॉप रही।

आपको बता दे, झारखंड बनने के बाद सबसे पहला चुनाव 2005 में हुआ था, जिनमें बीजेपी 30 सीटें जीतकर सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी थी। हालांकि बीजेपी बहुमत का आंकड़ा नहीं छू पाई थी। इस चुनाव में जेएमएम 17 सीटें जीतकर दूसरे नंबर पर रही थी। इससे बाद 2009 में हुए विधानसभा चुनाव में भी किसी एक पार्टी को बहुमत नहीं मिला है। बीजेपी और जेएमएम 18-18 सीटें जीतने में कामयाब रही थीं। जबकि, कांग्रेस 14 और जेवीएम 11 सीटें जीत दर्ज की थी।

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