
कई बार देखा जाता हैं कि पुलिस की कारवाई में कुछ बेकसूर लोगों को भी परेशानी उठानी पड़ती हैं। ऐसा ही कुछ देखने को मिला उदयपुर में जहां पुलिस की गलती के चलते बेकसूर 4 माह जेल में रहा। वल्लभनगर थाना क्षेत्र में डाेडा चूरा तस्करी में गिरफ्तार पाली जिले के सुमेरपुर का तेजाराम आखिरकार 3 माह 24 दिन बाद गुरुवार रात जेल से रिहा हाे गया। शिवसेना सदस्यों सहित अन्य लाेग जेल के बाहर पहुंचे और माला पहनाकर तेजाराम का स्वागत किया।
पुलिस के खिलाफ नारेबाजी भी की। इससे पहले वल्लभनगर थानाधिकारी भरत याेगी ने पीपी कपिल टाेडावत के जरिए गुरुवार काे सीआरपीसी धारा 169 में तेजाराम काे निर्दाेष मानते हुए जिला एवं सेशन न्यायालय में अर्जी दी। इसमें लिखा था कि तेजाराम काे गलत फंसाया गया। इसके खिलाफ एनडीपीएस का काेई प्रकरण नहीं बनता है। फिर प्रार्थना पत्र पर काेर्ट ने तेजाराम काे रिहा करने के आदेश हुए। बता दें, 15 मई 2019 काे वल्लभनगर के तत्कालीन डीएसपी संजय सिंह ने भटेवर चाैराहे पर नाकाबंदी में स्काॅर्पियाे पकड़ी, जिसमें 353 किलाे डाेडा चूरा था।
माैके से गिरफ्तार श्यामलाल ने पूछताछ में श्यामलाल ने साथी उमेश का नाम बताया, जाे भाग चुका था। जांच वल्लभनगर थानाधिकारी महिपाल सिंह काे दी गई। फिर उमेश गिरफ्तार हुआ, जिसने तेजाराम को स्काॅर्पियाे चालक बताया। महिपाल सिंह के ट्रांसफर पर इंस्पेक्टर सुमेर सिंह आए। वे तेजाराम काे थाने लाए और पूछताछ की। उनके ट्रांसफर के बाद इंस्पेक्टर गज सिंह ने गत 7 अगस्त काे तेजाराम काे गिरफ्तार किया और 10 अगस्त काे न्यायिक अभिरक्षा में भेजा गया। फिर शिवसेना ने गलत गिरफ्तारी का आराेप लगा सीएम काे शिकायत की। सीएम के आदेश पर सीआईडी सीबी काे जांच पहुंची। जांच में तेजाराम निर्दाेष पाया गया और छाेड़ने के देश हुए।
आरोप : घूस देकर छूटने की बात कबूलने के लिए पट्टों से पीटा
साहब अनपढ़ हूं, गाड़ी चलानी ही नहीं आती। एनडीपीएस की गाड़ी पकड़ाई, मेरा नाम ले लिया। मैं तो इस इलाके में ही जिंदगी में पहली बार आया हूं। पुलिस घर आई थी और पूछताछ के लिए वल्लभनगर चलने के लिए कहा। पांच दिन तक मुझे थाने में रखा और थानेदार ने पट्टे मारे।
कह रहे थे कि सही बाेलना, गाड़ी कहां से लाया जानता है या नहीं जानता। मैंने जवाब दिया कि नहीं जानता हूं। फिर भी पूछा- पहले जाे थानेदार था सुमेर सिंह, क्या उसने पैसे लेकर छाेड़ा। जवाब दिया कि एक रुपया नहीं दिया किसी काे। फिर भी पट्टे मारते रहे। मुझे साइकिल तो चलानी आती नहीं अाैर ये सब ड्राइवर हाेना बता रहे थे। अब वापस अपने गांव जाकर खेती-बाड़ी का काम करूंगा।














