रूस में कोरोना वायरस का संक्रमण अब बुरी तरह से अपने पैर पसारने लगा है। रूस में पिछले 24 घंटों में यानी रविवार को अब तक के सबसे ज्यादा कोरोना के मामले सामने आए हैं। एक दिन में 10633 कोरोना मरीज सामने आए है। अब तक देश में कोरोना के कुल मरीजों की संख्या करीब 1 लाख 35 हजार पहुंच चुकी है। कोरोना मरीजों के संक्रमण के मामले में रूस दुनिया में सातवें नंबर पर हैं।
रूस में 1280 लोगों की मौत हो चुकी है। हालांकि अमेरिका, स्पेन, इटली जैसे देशों की तुलना में रूस बीमार लोगों की तुलना में मरने वालों की संख्या बेहद कम है। लेकिन, रविवार को ही रूस में 58 लोगों की मौत कोरोना वायरस की वजह से हुई है।
रूस की राजधानी मॉस्को की हालत सबसे ज्यादा खराब है। यहीं पर सबसे ज्यादा कोरोना वायरस के मरीज हैं। यहां की चिकित्सा प्रणाली बुरी तरह से संघर्ष कर रही है। मॉस्को में हर दिन करीब 1700 लोग भर्ती हो रहे हैं। मॉस्को के मेयर सर्गेई सोब्यानिन ने शनिवार को कहा था कि हम सबको अभी बहुत ज्यादा सतर्क रहने की जरूरत है। ताकि कोरोना वायरस से बचे रहें। हमारे यहां कोरोना से मरने वालों की संख्या कम है, लेकिन संक्रमण तेजी से फैल रहा है।
मेयर सर्गेई ने कहा कि राजधानी में 2% यानी करीब 2.50 लाख लोगों का कोरोना टेस्ट किया जा चुका है। मॉस्को में रविवार को ही 5948 कोरोना मरीज सामने आए। जिससे शहर में कुल कोरोना मरीजों की संख्या 68,606 हो गई है। मॉस्को में सख्ती से लॉकडाउन का पालन किया जा रहा है। इस शहर में करीब 1.20 करोड़ लोग अपने-अपने घरों में बंद हैं। राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने रूस के लोगों को चेतावनी दी है कि महामारी का सबसे बुरा दौर अभी बाकी है। इसलिए सुरक्षित रहें।
रूस के प्रधानमंत्री मिखाइल मिशुस्तिन भी कोरोना वायरस से संक्रमित हो गए हैं। इससे पहले अप्रैल की शुरुआत से राष्ट्रपति व्लादिमिर पुतिन ज्यादातर वीडियो कॉन्फरेंसिंग के जरिए ही काम कर रहे हैं। उन्होंने अप्रैल की शुरुआत में एक अस्पताल का दौरा किया था जहां के चीफ डॉक्टर बाद में कोरोना पॉजिटिव पाए गए थे।
रूस में लगातार कोरोना वायरस के मामले बढ़ रहे हैं। रूसी सरकार ने देश में कोरोना टेस्ट कराने की संख्या को बढ़ाकर 40 हजार प्रतिदिन कर दिया है। जो लोग कोरोना संक्रमित निकल रहे हैं, उनमें लक्षण दिखाई नहीं दे रहे हैं। यह एक बड़ी चुनौती है।
व्लादिमीर पुतिन ने भी माना है कि उनके देश में प्रोटेक्टिव किट की बेहद कमी है। कुछ दिनों पहले पुतिन खुद मॉस्को के एक अस्पताल में दौरा करने गए थे। जहां उन्होंने पीले रंग की प्रोटेक्टिव किट पहनी हुई थी। हालांकि अब भले ही कोरोना को लेकर पुतिन प्रशासन सचेत हो गया हो लेकिन शुरुआती समय में इस पर कार्रवाई को लेकर आनाकानी दिखाई जा रही थी। बाद में जब मॉस्को के मेयर ने इसे लेकर सचेत किया तब कहीं जाकर कोरोना के खिलाफ राष्ट्रीय तैयारी शुरू हुई। पुतिन प्रशासन द्वारा कोरोना के ढिलाई बरतने को लेकर अब लोगों के बीच से भी प्रतिक्रिया आ रही है। मॉस्को टाइम्स पर प्रकाशित एक रिपोर्ट के मुताबिक हाल में हुए एक सर्वे में लोगों ने पुतिन प्रशासन की बजाए स्थानीय नेताओं के काम को ज्यादा बेहतर बताया है। इस स्वतंत्र सर्वे में रूस के लोगों ने माना है कि केंद्र सरकार के बजाए स्थानीय गवर्नर ज्यादा बेहतर निर्णय ले रहे हैं। इसे पुतिन की गिरती लोकप्रियता के रूप में देखा जा रहा है। लोगों का कहना है कि पुतिन अपने भाषण में घर में रहने और सोशल डिस्टेसिंग जैसी बातों पर ही ज्यादा जोर देते हैं, उनके भाषण में फ्यूचर प्लानिंग की कमी नजर आती है।














