महाराष्ट्र में लगातार तीसरे दिन 5 हजार से अधिक मरीज मिले हैं। सोमवार को 5 हजार 257 नए मरीज मिले, जबकि 181 लोगों की मौत हो गई। इससे पहले रविवार को 5400 और शनिवार को 5300 से ज्यादा मरीज मिले थे। राज्य में मरीजों की संख्या बढ़कर 1 लाख 69 हजार 883 पहुंच गई है। मुंबई में कोरोना के 1 हजार 300 नए केस मिले। यहां मरीजों की संख्या 75 हजार को पार कर गई है। बीएमसी के अनुसार, 75 हजार 47 में से 43 हजार 154 मरीज स्वस्थ हो चुके हैं। रविवार को 823 मरीजों को स्वस्थ होने पर घर भेज दिया गया। कोरोना से 87 मरीजों की मौत भी हुई। इनमें 55 पुरुष और 32 महिलाएं थीं। अब तक कुल 4 हजार 368 लोगों की मौत हो चुकी है।
राज्य में लॉकडाउन को 31 जुलाई तक बढ़ा दिया गया है। राज्य के चीफ सेक्रटरी अजॉय मेहता की तरफ से लॉकडाउन बढ़ाने का आदेश जारी किया गया है। इस आदेश में कहा गया है कि राज्य में कोरोना वायरस के फैलने का खतरा लगातार बना हुआ है। इसलिए वायरस के संक्रमण को रोकने के लिए जरूरी उपाय के तहत ये कदम उठाया जा रहा है।
शुरू हुआ प्लाज्मा थैरेपी का ट्रायल
राज्य में बढ़ते कोरोना मरीजों के बीच आज से दुनिया की सबसे बड़ी प्लाज्मा थैरेपी का ट्रायल शुरू हुआ है। 'प्रोजेक्ट प्लेटिना' नाम की इस प्लाज्मा थैरेपी में एक साथ 500 मरीजों को इलाज किया जाएगा। इसमें इन सभी मरीजों को प्लाज्मा थैरेपी की दो डोज दी गईं है। उम्मीद की जा रही है कि अगर इस थैरेपी के रिजल्ट अच्छे मिले तो इस थैरेपी को पूरे राज्य में लागू किया जाएगा। मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे की ओर से बताया गया है कि इस थैरेपी के लिए 75 करोड़ का बजट रखा गया है और इसका पूरा खर्चा सरकार उठाएगी। इस प्लाज्मा थैरेपी का उद्देश्य मृत्यु दर को कम करना है। सरकार की ओर से ट्रायल के आधार पर दावा किया जा रहा है कि 10 में से 9 मरीज प्लाज्मा थैरेपी से ठीक हो रहे हैं। सरकार का दावा है कि मुंबई के लीलावती अस्पताल में पहली प्लाज्मा थैरेपी सफल रही थी। उसके बाद मुंबई में ही बीवाईएल नायर अस्पताल में एक अन्य मरीज पर दूसरा प्रयोग किया गया।
इससे पहले रविवार को मुख्यमंत्री ठाकरे ने देश की सबसे बड़ी प्लाज्मा थैरेपी ट्रायल की जानकारी दी थी। उन्होंने लोगों से आगे आकर प्लाज्मा दान करने की अपील की। इसके बाद पुलिस डिपार्टमेंट से ठीक हुए कई सौ लोगों ने प्लाज्मा दान किया। ऐसे मरीज जो हाल ही में कोरोना से ठीक हुए हैं, उनके शरीर में मौजूद इम्यून सिस्टम ऐसे एंटीबॉडीज बनाता है जो ताउम्र रहते हैं। ये एंटीबॉडीज ब्लड प्लाज्मा में मौजूद रहते हैं। इसे दवा में तब्दील करने के लिए ब्लड से प्लाज्मा को अलग किया जाता है और बाद में इनसे एंटीबॉडीज निकाली जाती हैं। ये एंटीबॉडीज नए मरीज के शरीर में इंजेक्ट की जाती हैं, इसे प्लाज्मा डेराइव्ड थैरेपी कहते हैं। यह मरीज के शरीर को तब तक रोगों से लड़ने की क्षमता बढ़ाती है जब तक उसका शरीर खुद ये तैयार करने के लायक न बन जाए।














