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1984 सिख विरोधी दंगे: सोमवार को दिल्ली हाईकोर्ट सुनाएगा फैसला, बढ़ सकती हैं सज्जन कुमार की मुश्किलें

सोमवार को दिल्ली हाइकोर्ट 1984 के सिख विरोधी दंगे के एक मामले में अपना फ़ैसला सुनाएगा।

Posts by : Priyanka Maheshwari | Updated on: Mon, 17 Dec 2018 9:34:44

1984 सिख विरोधी दंगे: सोमवार को दिल्ली हाईकोर्ट सुनाएगा फैसला, बढ़ सकती हैं सज्जन कुमार की मुश्किलें

सोमवार को दिल्ली हाइकोर्ट 1984 के सिख विरोधी दंगे के एक मामले में अपना फ़ैसला सुनाएगा। इस केस में कांग्रेस नेता सज्जन कुमार आरोपी हैं ,जिन्हें निचली अदालत ने बरी कर दिया है।

जस्टिस एस मुरलीधर और न्यायमूर्ति विनोद गोयल की पीठ ने 29 अक्टूबर को सीबीआई, दंगा पीड़ितों और दोषियों की ओर से दायर अपीलों पर दलीलें सुनने का काम पूरा करने के बाद फैसला सुरक्षित रखा था।

पीड़ित पक्ष के अलावा सिख समुदाय के लाखों लोगों को इस फैसले के बेसब्री से इंतज़ार है। बीते कई सालों से 1984 के सिख दंगों से जुड़़ी फाइलों और दस्तावेजों के बीच उलझे आत्मा सिंह लुबाना के लिये सोमवार का दिन बेहद अहम हैं। लुबाना 1984 दंगों के मामलों में लंबे समय से पैरवी कर रहे हैं और हर रोज कोर्ट जाते हैं। दंगे का ये मामला 5 लोगों की मौत से जुड़ा है। जब दिल्ली कैंट इलाके के राजपुर में 1 नवंबर 1984 को हज़ारों लोगों की भीड़ ने दिल्ली केंट इलाके में सिख समुदाय के लोगों पर हमला कर दिया था। इस हमले में एक परिवार के तीन भाइयों नरेंद्र पाल सिंह ,कुलदीप और राघवेंद्र सिंह की हत्या कर दी गयी। वहीं एक दूसरे परिवार के गुरप्रीत और उनके बेटे केहर सिंह की मौत हो गयी थी।

दिल्ली पुलिस ने 1994 में ये केस बंद कर दिया था, लेकिन नानावटी कमीशन की रिपोर्ट के आधार पर 2005 में इस मामले में केस दर्ज किया गया। मई 2013 में निचली अदालत ने इस मामलें में पूर्व कांग्रेस पार्षद बलवान खोखर,रिटायर्ड नौसेना के अधिकारी कैप्टन भागमल,गिरधारी लाल और अन्य 2 लोगों को दोषी करार दिया, लेकिन कांग्रेस नेता सज्जन कुमार को सबूतों के अभाव में बरी कर दिया था। इसके बाद पीड़ित पक्ष और दोषी हाइकोर्ट गए।

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क्यों हुए थे दंगे? : 1984 में इंदिरा गांधी की उनके अंगरक्षकों ने हत्या कर दी थी। जिसके बाद देश के कई शहरों में सिख विरोधी दंगे भड़क उठे थे। कहा जाता रहा है कि कांग्रेस पार्टी के कुछ कार्यकर्ता इसमें सक्रिय रूप से शामिल थे। इंदिरा गांधी की हत्या सिखों के एक अलगाववादी गुट ने उनके द्वारा अमृतसर के स्वर्ण मंदिर में करवाई गई सैनिक कार्रवाई के विरोध में कर दी थी।

भारत सरकार की ऑफिशियल रिपोर्ट के मुताबिक पूरे भारत में इन दंगों में कुल 2800 लोगों की मौत हुई थी। जिनमें से 2100 मौतें केवल दिल्ली में हुई थीं। CBI जांच के दौरान सरकार के कुछ कर्मचारियों का हाथ भी 1984 में भड़के इन दंगों में सामने आया था। इंदिरा गांधी की हत्या के बाद उनके बेटे राजीव गांधी प्रधानमंत्री बने थे।

जानकारों का दावा है कि सज्जन कुमार के खिलाफ कई ऐसे कई सबूत हैं जिन्हें निचली अदालत ने नज़रअंदाज़ किया। सज्जन कुमार के खिलाफ 1984 सिख दंगों से जुड़े कुल 5 मामले चल रहे हैं, इनकी जांच 2014 में बनाई गई एसआईटी कर रही है।

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