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इस तरह बनाए बच्चों की डिजिटल फ्रेंडली, अच्छे से हो पाएगा उनका विकास

अगर आप अपने बच्चों को अच्छे से मोबाइल फ्रेंडली बनाएँगे तो अपने मुताबिक उन्हें सिखा पाएंगे और उनके मानसिक विकास में मदद कर पाएंगे।

Posts by : Ankur Mundra | Updated on: Wed, 08 May 2019 5:55:03

इस तरह बनाए बच्चों की डिजिटल फ्रेंडली, अच्छे से हो पाएगा उनका विकास

वर्तमान समय के डिजिटल समय में सभी बच्चों के हाथ में मोबाइल बड़ी आसानी से देखा जा सकता हैं और बच्चों में इसकी लत चरम सीमा पर हैं। ऐसे में अभिभावकों को चाहिए कि डिजिटल तकनीक उन्हें अच्छे से सिखाई जाए और इसका फ्रेंडली आपके द्वारा ही बनाना सिखाया जाए। जी हाँ, अगर आप अपने बच्चों को अच्छे से मोबाइल फ्रेंडली बनाएँगे तो अपने मुताबिक उन्हें सिखा पाएंगे और उनके मानसिक विकास में मदद कर पाएंगे। तो आइये जानते हैं उन टिप्स के बारे में जिनकी मदद से बच्चों की डिजिटल फ्रेंडली बनाया जाए।

एजुकेशनल एप से कराएं दोस्ती

माता-पिता होने के नाते बहुत जरूरी है कि आप इनमें से भी सबसे अच्छे का चुनाव अपने बच्चे के लिए करें और उसे डिजिटल दुनिया के इस हिस्से से रूबरू कराएं। बच्चों को पता होना चाहिए कि डिजिटल दुनिया के इस कलेवर से पहचान करके वो खुद का विकास कर सकते हैं। इनमें कुछ एप्लिकेशन के नाम हैं, बैजूज, स्टडी गियर, मेरिट नेशन। याद रहे, सब कुछ करते हुए भी आपको बच्चे की डिजिटल एक्टिविटी के बारे में पूरी जानकारी रखनी होगी। बच्चे को इससे पता रहेगा कि उस पर किसी की नजर है, वो कुछ भी देखने के लिए आजाद नहीं है। साथ में उनको असलियत से वाकिफ कराने की कोशिश कीजिए। जैसे अकसर बच्चे कार्टून देखकर उसे सच मानते हैं, ऐसे में उन्हें बताइए कि ये सच्चाई नहीं है, ये सिर्फ हंसने के लिए है। और हां, बच्चों को निश्चित समय तक ही वर्चुअल दुनिया में रहने की आजादी होनी चाहिए।

बच्चे के ठौर-ठिकाने पर नजर

यह बात तय है कि आप हमेशा बच्चे को अपने सीने से चिपकाकर नहीं रख सकतीं। जैसे-जैसे बच्चा बड़ा होगा, उसकी गतिविधियां बढ़ेंगी और वह अकेले भी कई जगह जाना शुरू करेगा। छठी-सातवीं क्लास में आते-आते बच्चे अकेले ट्यूशन या अलग-अलग हॉबी क्लास में जाना शुरू कर देते हैं। दोस्तों के साथ घूमना-फिरना भी इसके कुछेक साल बाद से शुरू ही हो जाता है। ऐसी स्थिति में आप फोन के जरिये आसानी से बच्चे से संपर्क कर सकती हैं। कुछ स्मार्टफोन में सुरक्षा से जुड़े एप होते हैं, जिसके जरिये आप बच्चे के लोकेशन के बारे में जान सकती हैं। बच्चा आपातकालीन स्थिति में तुरंत उसके माध्यम से आप तक सूचना पहुंचा सकता है।

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जिम्मेदारी की सीख

बच्चे को महंगा स्मार्टफोन देने से पहले यह सच है कि आपको हजार बार सोचना होगा। पर जब इसके फायदे-नुकसान की फेहरिस्त बनाएं तो यह भी सोचें कि यह फोन बच्चे को पहले से थोड़ा ज्यादा जिम्मेदार भी बनाएगा। जरा सोचकर देखिए, जो चीज (स्मार्टफोन) बच्चे को इतना ज्यादा पसंद है, उसे सुरक्षित रखने के लिए भी तो वह पूरी तरह से सतर्क ही रहेगा ना! आप स्मार्टफोन को पैसा, बजटिंग और जरूरत से ज्यादा खर्च करने के फायदे-नुकसान सिखाने का माध्यम भी बना सकती हैं। बच्चे को फैमिली सेलफोन प्लान में शामिल करें और उसे बताएं कि एक माह में वह कितने डाटा का इस्तेमाल कर सकता है। ज्यादा डाटा का इस्तेमाल करने पर सजा के तौर पर उसका पॉकेट मनी कम कर दें या फिर घर के कामों में उसकी कोई जिम्मेदारी बढ़ा दें।

टेक्नोलॉजी से बढ़ेगी दोस्ती

इस बात से तो आप भी सहमत होंगी कि भविष्य टेक्नोलॉजी का है। टेक्नोलॉजी से जुड़े नए स्किल्स सीखने में स्मार्टफोन आपके टीनएज बच्चे के लिए उपयोगी साबित हो सकता है। वह अपनी पसंद की चीजें व टेक्नोलॉजी स्मार्टफोन की मदद से सीख सकता है। स्मार्टफोन और इंटरनेट से होने वाले नुकसान से बचाने के लिए आपको अपने बच्चे को इनसे दूर नहीं करना है, बल्कि इनके सही इस्तेमाल का सलीका उन्हें सिखाना है।

बच्चा बनेगा सामाजिक

अगर आपके बच्चे को दोस्त बनाने में दिक्कत आती है, वह थोड़ा अंतर्मुखी है या खुद में ही सिमटा रहता है, तो उसकी इस हिचक को दूर करने में सोशल मीडिया मददगार साबित हो सकता है। यहां विभिन्न सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म जैसे फेसबुक, ट्िवटर आदि पर वह अपनी सोच और रुझान वाले लोगों से न सिर्फ दोस्ती कर सकता है, बल्कि अपने व्यक्तित्व को नया आयाम भी दे सकता है। अगर वह इस माध्यम से अच्छे दोस्त चुनने में सफल हो जाता है तो इस बात की पूरी संभावना है कि यह दोस्ती लंबे समय तक टिकेगी।

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