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  • मानसिक रूप से मजबूत माता-पिता रखते है परवरिश में इन बातों का ख्याल, बच्चों को मिलता है हौसला

मानसिक रूप से मजबूत माता-पिता रखते है परवरिश में इन बातों का ख्याल, बच्चों को मिलता है हौसला

By: Ankur Thu, 25 Apr 2019 10:08 AM

मानसिक रूप से मजबूत माता-पिता रखते है परवरिश में इन बातों का ख्याल, बच्चों को मिलता है हौसला

हर माता-पिता अपने बच्चों को इतना मजबूत बनाना चाहते है कि जब भी जिन्दगी में कोई परेशानी आए तो वह उसका डट कर सामना कर सकें और हार नहीं माने। इसके लिए माता-पिता को भी मानसिक रूप से मजबूत होने की जरूरत होती है और बच्चों को हर कदम पर हौसला देने की जरूरत होती हैं। मानसिक रूप से मजबूत माता-पिता की परवरिश बच्चों को भी मानसिक रूप से मजबूत बनाती हैं। आज हम आपको बताने जा रहे है कि किस तरह परिजन अपने बच्चों को मानसिक रूप से मजबूत बना सकते हैं। तो आइये जानते है इसके बारे में।

* उम्मीद रखना अच्छा है, लेकिन बच्चों से हद से ज्यादा उम्मीद करना गलत होता है। मानसिक रूप से मजबूत परिजनों को पता होता है कि उनका बच्चा जो भी काम करता है, उन सबमें वह अच्छा प्रदर्शन नहीं करता। वे अपने बच्चे को दूसरों से अच्छा बनाने की बजाय, उसी को निखारते हैं। बच्चे का लक्ष्य पाने में उसकी मदद करते हैं।

* अनुशासन जिंदगी का अहम हिस्सा है। मानसिक रूप से मजबूत परिजन अनुशासन और सजा में गुमराह नहीं रहते। वे अपने बच्चों को सजा की बजाय आत्म अनुशासन सीखाना पसंद करते हैं।

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* अगर आप कहते हैं, 'मैं मेरे बच्चों पर वजन नहीं डालना चाहता। बच्चों को बच्चा ही रहना चाहिए। तो यह मानसिक रूप से मजबूत परिजनों की पहचान नहीं होती। परिजन अपने बच्चों से यह उम्मीद करते हैं कि वे जीवन में संघर्ष का सामना करें और एक जिम्मेदार नागरिक बनें।

* मानसिक रूप से मजबूत परिजन अपने बच्चों को गलतियां करने से नहीं रोकते। गलतियां से हमें सीख मिलती है। अगर उनका बच्चा अपने होमवर्क में कुछ गलती करता है या फिर अपने स्कूल बैग को पैक करते हुए कुछ सामान घर छोड़कर चला जाता है तो यह उन्हें आगे के लिए एक सीख मिलेगी। गलतियां करने पर बच्चों को अपने काम का नतीजा मिलेगा, ऐसे में उन्हें आगे के लिए सीख मिल जाएगी।

* बच्चे को चोट लगते या फिर संघर्ष करते देखना दुखदायी होता है। लेकिन बच्चों को पहले प्रैक्टिस करना चाहिए और उसके परिणाम देखना चाहिए। मानसिक रूप से मजबूत परिजन अपने बच्चों को कोई भी काम करने देना चाहिए। उसके नतीजे का बच्चे को खुद सामना करना देना चाहिए। परिजनों को अपने बच्चों को सपोर्ट करना चाहिए और उनकी मदद करनी चाहिए, ताकि उन्हें खुद पर भरोसा बढ़े, ताकि जिंदगी में वे संघर्ष का सामना कर सकें।

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