झारखंड में JPSC समेत विभिन्न भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं और पेपर लीक के विरोध में चल रहा छात्रों का आंदोलन लगातार उग्र होता जा रहा है। गुरुवार को यह प्रदर्शन 13वें दिन में पहुंच गया। उच्च स्तरीय जांच की मांग को लेकर छह छात्र अब भी आमरण अनशन पर बैठे हुए हैं। आंदोलनकारियों का आरोप है कि बार-बार मांग उठाने के बावजूद राज्य सरकार ने अब तक उनकी समस्याओं के समाधान के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाया है। इसी नाराजगी के बीच छात्रों ने अब मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के इस्तीफे की मांग भी शुरू कर दी है। उनका कहना है कि सरकार बातचीत की बात तो कर रही है, लेकिन मांगों पर गंभीरता से कोई कार्रवाई नहीं दिखाई दे रही।
इस बीच मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार से मुलाकात कर उन्हें JPSC भर्ती प्रक्रिया को लेकर चल रहे विवाद की जानकारी दी। मुख्यमंत्री ने राज्यपाल को भरोसा दिलाया कि सरकार छात्रों की शिकायतों की निष्पक्ष जांच कराएगी और उन्हें न्याय दिलाने के लिए प्रतिबद्ध है। दूसरी ओर आंदोलनकारी छात्रों ने भी संकेत दिया है कि वे सरकार के साथ बातचीत के लिए तैयार हैं और इसके लिए अपना प्रतिनिधिमंडल भेजने पर सहमति बना रहे हैं।
प्रदर्शनकारियों ने कहा- सरकार हमारी मांगों को गंभीरता से नहीं ले रहीरांची में जारी धरना और भूख हड़ताल के बीच आंदोलनकारी छात्रों ने सरकार के रवैये पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि लंबे समय से आंदोलन चलने के बावजूद सरकार की ओर से कोई ठोस पहल नहीं की गई है। इसी कारण अब मुख्यमंत्री से इस्तीफे की मांग उठने लगी है।
प्रदर्शन में शामिल छात्र राहुल क्रांति ने समाचार एजेंसी ANI से बातचीत में कहा कि छात्र हमेशा से संवाद के पक्ष में रहे हैं। उन्होंने कहा, हम बातचीत के लिए तैयार हैं, लेकिन सरकार और मीडिया के माध्यम से जो बातें सामने आ रही हैं, उनसे ऐसा नहीं लगता कि सरकार हमारी मांगों को गंभीरता से ले रही है। सरकार कहती है कि उसकी एजेंसियां जांच कर रही हैं। अगर ऐसा है, तो फिर CBI जांच कराने में दिक्कत क्या है?
सरकार से वार्ता के लिए प्रतिनिधिमंडल भेजने पर बनी सहमतिराहुल क्रांति ने बताया कि शुरुआत में छात्र चाहते थे कि सरकार का प्रतिनिधिमंडल आंदोलन स्थल पर आकर उनसे बातचीत करे। हालांकि अब परिस्थितियों को देखते हुए उन्होंने अपना प्रतिनिधिमंडल सरकार के पास भेजने का फैसला किया है।
उन्होंने बताया कि बुधवार को राज्य सरकार के दो अधिकारी आंदोलन स्थल पर पहुंचे थे। अधिकारियों ने सरकार की ओर से बातचीत का प्रस्ताव दिया और छात्रों से पांच सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल भेजने का अनुरोध किया। अब छात्र इस दिशा में आगे बढ़ने के लिए तैयार हो गए हैं।
'हेमंत सोरेन मुख्यमंत्री पद के योग्य नहीं'आंदोलन में शामिल एक अन्य छात्र ने भी मुख्यमंत्री पर निशाना साधते हुए कहा कि अब केवल जांच की मांग नहीं, बल्कि मुख्यमंत्री के इस्तीफे की मांग भी की जा रही है। छात्र ने ANI से कहा, हम मानते हैं कि हेमंत सोरेन मुख्यमंत्री पद के लिए उपयुक्त नहीं हैं। उन्हें बेंगलुरु से लौटे काफी समय हो चुका है, लेकिन उन्होंने अब तक इस पूरे मामले को गंभीरता से नहीं लिया।
छात्रों ने यह भी स्पष्ट कर दिया कि 10 अगस्त को प्रस्तावित विधानसभा घेराव का कार्यक्रम फिलहाल यथावत रहेगा। उनका कहना है कि जब तक उनकी मांगों पर ठोस कार्रवाई नहीं होती, आंदोलन जारी रहेगा। वहीं राहुल क्रांति ने दोहराया कि यदि सरकार औपचारिक बातचीत चाहती है तो छात्र भी अपने प्रतिनिधियों के जरिए उसमें शामिल होंगे।
तिरंगा मार्च निकालकर दोहराई इस्तीफे की मांगआंदोलन के बीच छात्रों ने तिरंगा मार्च भी निकाला। इस दौरान उन्होंने मुख्यमंत्री के इस्तीफे की मांग दोहराई और भर्ती परीक्षाओं में कथित धांधली के खिलाफ नारेबाजी की।
एक प्रदर्शनकारी ने ANI से कहा, हम तिरंगा मार्च इसलिए निकाल रहे हैं ताकि परीक्षा पत्रों की कथित बिक्री और नौकरियों में भ्रष्टाचार जैसे मामलों पर सरकार का ध्यान जाए। हमारी मांग है कि इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच हो और दोषियों पर सख्त कार्रवाई की जाए।
छात्र प्रवक्ता बोले- जल्द तय होंगे बातचीत के लिए प्रतिनिधिछात्रों के प्रवक्ता पीयूष कुमार सिंह ने हिंदुस्तान टाइम्स से बातचीत में बताया कि बुधवार दोपहर राज्य सरकार के दो प्रतिनिधि आंदोलन स्थल पर पहुंचे थे। उन्होंने कहा कि सरकार ने बैठक का प्रस्ताव रखते हुए पांच छात्रों का प्रतिनिधिमंडल भेजने का अनुरोध किया था।
पीयूष सिंह ने कहा, उस समय हम यह तय नहीं कर पाए कि बंद कमरे में होने वाली बैठक स्वीकार की जाए या नहीं। फिलहाल हम आपस में चर्चा कर रहे हैं और जल्द ही तय करेंगे कि सरकार के साथ बातचीत के लिए हमारी ओर से कौन-कौन प्रतिनिधि जाएंगे।
अनशन का असर सेहत पर दिखने लगा, छात्रों ने की भावुक अपीलआमरण अनशन पर बैठे छात्रों की तबीयत भी अब बिगड़ने लगी है। देवेंद्र नाथ महतो के अनशन का गुरुवार को चौथा दिन रहा, जबकि अन्य पांच छात्र तीसरे दिन भी भूख हड़ताल पर डटे रहे। कई छात्रों ने बताया कि लगातार कमजोरी महसूस हो रही है और स्वास्थ्य पर इसका असर साफ दिखाई देने लगा है।
एक प्रदर्शनकारी ने ANI से कहा, मेरी तबीयत लगातार खराब हो रही है। खड़े होने पर चक्कर आते हैं और मैं कम से कम बोलने की कोशिश करता हूं ताकि ऊर्जा बची रहे।
वहीं एक अन्य छात्र ने समाचार एजेंसी PTI से भावुक अपील करते हुए कहा, मुख्यमंत्री हमारे अभिभावक की तरह हैं। जब बच्चे भूखे रहते हैं तो माता-पिता भी दुखी होते हैं। हमें उम्मीद है कि वे हमारी बात सुनेंगे। हमें केवल आश्वासन नहीं चाहिए, बल्कि निष्पक्ष कार्रवाई और न्याय चाहिए।
अनशन पर बैठे छात्रों ने साफ कहा है कि जब तक भर्ती परीक्षाओं और पेपर लीक से जुड़े कथित मामलों में प्रभावी कार्रवाई नहीं होती, तब तक उनका आंदोलन और भूख हड़ताल जारी रहेगी।