होर्मुज जलडमरूमध्य के आसपास हालात लगातार तनावपूर्ण बने हुए हैं और खाड़ी क्षेत्र में सैन्य टकराव एक बार फिर तेज होता दिखाई दे रहा है। अमेरिका ने ईरान के खिलाफ लगातार तीसरी रात हवाई हमले किए हैं, जिससे पूरे इलाके में तनाव और बढ़ गया है। इन हमलों के बीच अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में फिर उछाल देखने को मिला है। वहीं अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने साफ शब्दों में चेतावनी देते हुए कहा कि सैन्य कार्रवाई सिर्फ एक दिन तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि जरूरत पड़ी तो आज भी हमला होगा और कल भी। होर्मुज जलडमरूमध्य में बढ़ते तनाव ने वैश्विक व्यापार और ऊर्जा बाजार को लेकर नई चिंताएं पैदा कर दी हैं।
तीसरी रात भी जारी रही अमेरिकी सैन्य कार्रवाईमंगलवार 14 जुलाई की तड़के अमेरिकी सेना ने ईरान के कई ठिकानों को निशाना बनाते हुए नए हमले किए। अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) के मुताबिक भारतीय समयानुसार रात करीब 2:15 बजे यह अभियान शुरू किया गया। लगातार तीसरी रात हुई इस कार्रवाई को लेकर सेंटकॉम ने दावा किया कि इन हमलों से ईरानी सैन्य ढांचे को गंभीर नुकसान पहुंचेगा और होर्मुज जलडमरूमध्य में नागरिक जहाजों तथा अंतरराष्ट्रीय व्यापारिक पोतों पर हमले करने की उसकी क्षमता कमजोर होगी।
इसी दौरान राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि तेहरान के साथ समझौते की संभावना अभी पूरी तरह खत्म नहीं हुई है। हालांकि, उन्होंने एक इंटरव्यू में यह भी दोहराया कि अमेरिका अपने अभियान को जारी रखेगा। ट्रंप ने कहा, हम आज रात भी हमला करेंगे और जरूरत पड़ी तो कल भी पूरी ताकत के साथ कार्रवाई करेंगे। इस बयान से साफ संकेत मिला कि वॉशिंगटन फिलहाल सैन्य दबाव की रणनीति पर कायम है।
ईरान का जवाबी हमला, दो जहाज बने निशानातनाव के बीच ईरान की ओर से भी जवाबी कार्रवाई की खबर सामने आई है। संयुक्त अरब अमीरात (UAE) ने दावा किया कि ईरान ने होर्मुज क्षेत्र में दो तेल जहाजों पर क्रूज मिसाइलों से हमला किया। इस घटना में भारत के एक क्रू सदस्य की मौत हो गई, जबकि आठ अन्य लोग घायल बताए गए हैं।
यूएई के रक्षा मंत्रालय ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर जानकारी देते हुए कहा कि देश के तेल टैंकर मोम्बासा और अल बहियाह उस समय ओमान के समुद्री क्षेत्र से गुजर रहे थे, जब उन पर दो क्रूज मिसाइलों से हमला किया गया। यह घटना ऐसे समय हुई जब ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने एक दिन पहले बहरीन, जॉर्डन, कुवैत और ओमान के खिलाफ भी नए सैन्य अभियान की घोषणा की थी। क्षेत्र में बढ़ते संघर्ष की आशंका के चलते वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतें 9 प्रतिशत से अधिक चढ़ गई हैं।
कांग्रेस को दी जानकारी, सैन्य अभियान हुआ और तेजसमाचार एजेंसी एएफपी के अनुसार, व्हाइट हाउस ने पुष्टि की है कि राष्ट्रपति ट्रंप ने पिछले सप्ताह अमेरिकी कांग्रेस को औपचारिक रूप से सूचित कर दिया था कि ईरान के खिलाफ सैन्य अभियान दोबारा शुरू किया जा चुका है। इस प्रक्रिया के बाद अमेरिकी रक्षा विभाग को अगले 60 दिनों तक कांग्रेस की अलग मंजूरी के बिना सैन्य कार्रवाई जारी रखने का अधिकार मिल गया है।
इसी क्रम में ट्रंप ने ईरान के नतांज के निकट स्थित पिकऐक्स माउंटेन के भीतर बनाए गए कथित परमाणु ठिकाने को भी निशाना बनाने की चेतावनी दी। पश्चिमी देशों की खुफिया एजेंसियों का दावा है कि ईरान वहां बिना सार्वजनिक घोषणा के यूरेनियम संवर्धन से जुड़ी नई परमाणु सुविधा विकसित कर रहा है।
रेडियो होस्ट ह्यू हेविट से बातचीत में ट्रंप ने कहा, ईरानियों से कह दो कि तैयार रहें। उन्हें बता दो कि हम आ रहे हैं और वे इसे रोकने के लिए कुछ नहीं कर पाएंगे।
ट्रंप का नया ऐलान- होर्मुज से गुजरने वाले जहाजों पर लगेगा 20% शुल्कडोनाल्ड ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर एक और बड़ा ऐलान करते हुए कहा कि अब अमेरिका खुद को होर्मुज जलडमरूमध्य का संरक्षक मानेगा। उन्होंने घोषणा की कि इस समुद्री मार्ग से गुजरने वाले प्रत्येक जहाज से 20 प्रतिशत शुल्क वसूला जाएगा। साथ ही उन्होंने कहा कि ईरानी बंदरगाहों की नाकेबंदी दोबारा लागू की जाएगी, जबकि अन्य देशों के जहाजों को निष्पक्ष और सुरक्षित मार्ग उपलब्ध कराया जाएगा।
ट्रंप के निर्देश के बाद अमेरिकी सेंटकॉम ने भी घोषणा की कि मंगलवार रात 8 बजे (GMT) से ईरान के बंदरगाहों की नाकेबंदी फिर प्रभावी कर दी जाएगी।
उधर, ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अरागची ने ट्रंप के इस प्रस्ताव पर तंज कसते हुए सोशल मीडिया पर लिखा कि सुरक्षित समुद्री मार्ग उपलब्ध कराने वाले को भुगतान मिलना चाहिए, लेकिन 20 प्रतिशत शुल्क बेहद ज्यादा है। उन्होंने व्यंग्य करते हुए कहा कि यदि ऐसा कोई शुल्क लगाया भी जाए तो ईरान इससे कहीं कम दर तय करेगा।
गौरतलब है कि अमेरिका लंबे समय से होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले जहाजों पर किसी भी प्रकार का टोल लगाने के ईरानी विचार का विरोध करता रहा है। अंतरराष्ट्रीय समुद्री कानून भी आमतौर पर ऐसे शुल्क लगाने की अनुमति नहीं देता। हालांकि अब स्वयं डोनाल्ड ट्रंप द्वारा 20 प्रतिशत शुल्क वसूलने की घोषणा किए जाने के बाद इस मुद्दे पर नई बहस छिड़ गई है।