अमेरिका-ईरान समझौते से असहज दिखे नेतन्याहू, बोले- लड़ाई अभी खत्म नहीं हुई; ईरान को परमाणु शक्ति नहीं बनने देंगे

अमेरिका और ईरान के बीच लंबे समय से चल रहे तनाव को कम करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कूटनीतिक पहल सामने आई है। रिपोर्टों के अनुसार अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप, उपराष्ट्रपति जेडी वेंस और ईरानी संसद के स्पीकर मोहम्मद बाघेर गालिबाफ के बीच एक समझौता ज्ञापन (MoU) पर सहमति बनी है। इस समझौते का उद्देश्य दोनों देशों के बीच युद्धविराम को आगे बढ़ाना और वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए बेहद महत्वपूर्ण होर्मुज़ जलडमरूमध्य को फिर से पूरी तरह खोलने का रास्ता तैयार करना है। औपचारिक हस्ताक्षर समारोह स्विट्जरलैंड के जिनेवा में प्रस्तावित बताया जा रहा है, हालांकि समझौते के कई अहम बिंदुओं पर अभी भी स्पष्टता आना बाकी है।

इस बीच इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने इस घटनाक्रम पर प्रतिक्रिया देते हुए संकेत दिए हैं कि वह इस समझौते को लेकर पूरी तरह आश्वस्त नहीं हैं। उन्होंने अपने नागरिकों को संबोधित करते हुए कहा कि क्षेत्रीय संघर्ष अभी समाप्त नहीं हुआ है और इजरायल को आगे भी पूरी सतर्कता के साथ अपनी सुरक्षा सुनिश्चित करनी होगी।

ट्रंप के साथ मतभेदों पर क्या बोले नेतन्याहू?

अमेरिका और ईरान के बीच हुई इस पहल के बाद नेतन्याहू ने स्वीकार किया कि उनकी और डोनाल्ड ट्रंप की सोच हर मुद्दे पर समान नहीं होती। उन्होंने कहा कि अमेरिका के राष्ट्रपति के रूप में ट्रंप अपने देश के हितों को प्राथमिकता देते हैं, जबकि उनकी जिम्मेदारी इजरायल की सुरक्षा और राष्ट्रीय हितों की रक्षा करना है।

नेतन्याहू ने कहा कि दोनों नेताओं के बीच मजबूत संबंध जरूर हैं, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि हर रणनीतिक मुद्दे पर दोनों की राय एक जैसी हो। उन्होंने स्पष्ट किया कि इजरायल अपनी सुरक्षा से जुड़े फैसले स्वतंत्र रूप से लेता रहेगा और किसी भी संभावित खतरे को लेकर समझौता नहीं करेगा।

देशवासियों के नाम संदेश में दोहराया पुराना संकल्प

इजरायली प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि कई दशकों से वह ईरान के परमाणु कार्यक्रम का विरोध करते आ रहे हैं और इसे अपने सार्वजनिक जीवन के सबसे महत्वपूर्ण मिशनों में से एक मानते हैं। उन्होंने दोहराया कि चाहे कोई समझौता हो या न हो, इजरायल यह सुनिश्चित करेगा कि ईरान परमाणु हथियार हासिल न कर सके।

नेतन्याहू ने कहा, न आज, न कल और जब तक मैं प्रधानमंत्री हूं, ईरान परमाणु हथियारों से लैस नहीं होगा। उनके अनुसार यह केवल इजरायल की सुरक्षा का प्रश्न नहीं, बल्कि पूरे क्षेत्र की स्थिरता से जुड़ा विषय है।
सैन्य अभियानों को बताया बड़ी उपलब्धि

अपने संदेश में नेतन्याहू ने हाल के सैन्य अभियानों को इजरायल की बड़ी सफलता करार दिया। उन्होंने दावा किया कि इजरायल और उसके सहयोगियों ने ईरान से जुड़े कई सैन्य एवं रणनीतिक ठिकानों को निशाना बनाया, जिससे उसके रक्षा ढांचे और सैन्य क्षमताओं को गंभीर नुकसान पहुंचा।

उन्होंने कहा कि इन अभियानों के दौरान परमाणु कार्यक्रम से जुड़े कई महत्वपूर्ण तत्वों को कमजोर किया गया, मिसाइल उत्पादन क्षमता को नुकसान पहुंचाया गया और उन संरचनाओं पर प्रहार किए गए जो इजरायल की सुरक्षा के लिए खतरा मानी जा रही थीं। नेतन्याहू का दावा था कि इन कार्रवाइयों ने इजरायल को संभावित बड़े खतरे से बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

ईरान को लेकर जताई चिंता

नेतन्याहू ने कहा कि यदि समय रहते निर्णायक कदम नहीं उठाए गए होते, तो ईरान अपने परमाणु कार्यक्रम को और तेजी से आगे बढ़ा सकता था। उन्होंने दावा किया कि इजरायल और अमेरिका के संयुक्त प्रयासों ने ऐसे परिदृश्य को रोकने में मदद की, जिससे भविष्य में क्षेत्रीय सुरक्षा पर गंभीर असर पड़ सकता था।

उनके अनुसार हालिया सैन्य और रणनीतिक अभियानों ने ईरान की क्षमताओं को सीमित किया है और इजरायल के सामने मौजूद तत्काल खतरों को काफी हद तक कम किया है। हालांकि उन्होंने यह भी संकेत दिया कि चुनौती पूरी तरह समाप्त नहीं हुई है और आने वाले समय में भी सतर्क रहने की आवश्यकता होगी।

क्यों कहा- संघर्ष अभी जारी है?

अपने संबोधन के अंत में नेतन्याहू ने नागरिकों से सतर्क रहने की अपील की। उन्होंने कहा कि मौजूदा समझौते के बावजूद क्षेत्र में मौजूद खतरे पूरी तरह खत्म नहीं हुए हैं। उनके मुताबिक इजरायल को न केवल ईरान बल्कि उसके सहयोगी संगठनों और समूहों की गतिविधियों पर भी नजर बनाए रखनी होगी।

नेतन्याहू ने कहा कि इजरायल ने गाजा, लेबनान, सीरिया और अन्य क्षेत्रों में कई अभियान चलाए हैं और सुरक्षा चुनौतियों का सामना किया है। उन्होंने दावा किया कि इन अभियानों में अनेक आतंकवादी नेटवर्क और उनके ठिकानों को निशाना बनाया गया है। साथ ही उन्होंने कहा कि भविष्य में भी यदि देश की सुरक्षा को खतरा महसूस हुआ तो इजरायल आवश्यक कदम उठाने से पीछे नहीं हटेगा।

उन्होंने अपने संदेश का समापन इस बात पर जोर देते हुए किया कि मौजूदा परिस्थितियों में इजरायल को मजबूत, एकजुट और सतर्क रहने की जरूरत है, क्योंकि उनके अनुसार क्षेत्रीय संघर्ष का अध्याय अभी पूरी तरह बंद नहीं हुआ है।