नेपाल के तिब्बत सीमा से सटे मध्य हिस्से में बुधवार सुबह अचानक आई भीषण बाढ़ ने बड़े पैमाने पर तबाही मचा दी। नेपाल पुलिस के मुताबिक, अब तक 157 लोगों की मौत की पुष्टि हुई है, जबकि नेपाल सरकार के अनुसार करीब 500 लोग लापता हैं। चीन के सरकारी चैनल सीजीटीएन ने सीमा के चीनी हिस्से में तीन मौतों और 265 लोगों के लापता होने की जानकारी दी है। इस तरह प्रभावित क्षेत्र में मृतकों और लापता लोगों की संख्या काफी अधिक हो गई है।
बाढ़ की चपेट में शहरों और गांवों के अलावा कई पुल और बुनियादी ढांचे आए हैं। कम से कम एक दर्जन जलविद्युत परियोजनाओं को नुकसान पहुंचने की जानकारी है। नेपाल-चीन सीमा से लगे इलाकों में सेना, सशस्त्र पुलिस बल और नेपाल पुलिस की टीमें राहत एवं बचाव अभियान में जुटी हैं।
भूकंप के कुछ मिनट बाद बढ़ा नदी का पानीनेपाल के विदेश मंत्री शिशिर खनाल ने संसद को बताया कि स्थानीय समयानुसार सुबह 8:37 बजे तिब्बत क्षेत्र में भूकंप आया था। इसके लगभग तीन मिनट बाद अचानक बाढ़ की सूचना मिली। इस समयक्रम के कारण शुरुआती तौर पर यह आशंका जताई गई कि भूकंप के झटकों से हिमनद में हलचल या टूटने की घटना हुई हो सकती है, जिससे बाढ़ का रास्ता बना।
राष्ट्रीय आपदा जोखिम न्यूनीकरण एवं प्रबंधन प्राधिकरण (एनडीआरआरएमए) के मुताबिक, नेपाल-तिब्बत सीमा पर लेंडे नदी में पानी बढ़ने और चट्टानों के खिसकने के बाद रसुवा जिले के सीमावर्ती शहर तिमुरे में भोटे कोशी नदी के रास्ते त्रिशूली नदी प्रणाली में तेज बाढ़ पहुंची।
इसके बाद पानी नुवाकोट, चितवन, गोरखा, तनहुं और नवलपरासी पूर्व समेत कई जिलों तक पहुंच गया। प्रभावित क्षेत्र काठमांडू से करीब 70 से 200 किलोमीटर की दूरी तक फैला बताया गया है।
बाढ़ ने छोड़ा तबाही का मंजर
बाढ़ के दौरान तेज बहाव अपने साथ कीचड़, चट्टान और मलबा लेकर आगे बढ़ा। सामने आए वीडियो में इमारतों और वाहनों को पानी की तेज धार की ओर बहते देखा गया।
एक वीडियो में चार मंजिला इमारत पानी के तेज बहाव में बहती नजर आई। वहीं, रसुवा में एक कार बाढ़ की चपेट में आकर बह गई। कई जगह पुल भी तेज पानी का दबाव नहीं झेल सके। एक वीडियो में एक लंबा पुल दो हिस्सों में टूटता दिखाई दिया, जबकि धादिंग में बाढ़ का पानी पुल से टकराने के बाद उसे बहाकर ले गया।
एक अन्य वीडियो में कीचड़ से भरा पानी करीब 30 सेकंड के भीतर एक पुल को पूरी तरह अपनी चपेट में लेता नजर आया।
करीब 100 लोगों को बचाया गयाअधिकारियों के अनुसार, बाढ़ प्रभावित इलाकों से अलग-अलग स्थानों पर करीब 100 लोगों को सुरक्षित निकाला गया है। इनमें से 30 लोगों का इलाज काठमांडू के त्रिभुवन विश्वविद्यालय शिक्षण अस्पताल में चल रहा है।
स्थिति की समीक्षा के लिए नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन्द्र शाह ने आपात बैठक की। इसके बाद राहत और बचाव अभियान में नेपाल सेना, सशस्त्र पुलिस बल और नेपाल पुलिस के जवानों को लगाया गया। प्रधानमंत्री शाह ने मृतकों के परिवारों के प्रति संवेदना जताई और घायलों के शीघ्र स्वस्थ होने की कामना की। उन्होंने अधिकारियों को प्रभावित लोगों को हरसंभव सहायता उपलब्ध कराने के निर्देश दिए।
133 भारतीय और 37 एनआरआई भी लापतानेपाल सरकार के अनुसार करीब 500 लोगों के लापता होने की जानकारी है। इनमें कम से कम 133 भारतीय नागरिक और 37 अप्रवासी भारतीय (एनआरआई) शामिल बताए गए हैं। लापता भारतीयों में कम से कम 50 लोग कैलाश मानसरोवर यात्रा पर गए तीर्थयात्री बताए गए हैं।
ईशा फाउंडेशन के मुताबिक, उसके 77 सदस्य भी संपर्क में नहीं हैं। संस्था के संस्थापक सद्गुरु ने कहा कि आव्रजन कार्यालय में मौजूद लोगों को लेकर अभी आधिकारिक जानकारी नहीं मिली है। उनके अनुसार 495 लोग सुरक्षित लौट चुके हैं। बाद में नेपाल सरकार ने भी बताया कि आव्रजन केंद्र के कर्मचारियों से संपर्क नहीं हो पा रहा है।
तमिलनाडु के अधिकारियों के अनुसार, संपर्कविहीन 37 पर्यटक तंजावुर के रहने वाले हैं। उत्तर प्रदेश और केरल सहित कई अन्य भारतीय राज्यों ने भी अपने नागरिकों की जानकारी जुटाने के लिए हेल्पलाइन नंबर जारी किए हैं।
भारतीयों और एनआरआई के अलावा संपर्कविहीन लोगों में अमेरिका, मलेशिया, ब्रिटेन, दक्षिण अफ्रीका, ऑस्ट्रेलिया और नीदरलैंड समेत दो दर्जन से अधिक देशों के नागरिक शामिल बताए गए हैं।
80 सुरक्षाकर्मियों का भी पता नहींनेपाल के विदेश मंत्री शिशिर खनाल ने प्रतिनिधि सभा को बताया कि अलग-अलग स्थानों पर 80 सुरक्षाकर्मी भी लापता हैं। इनमें नेपाल सेना के 44 जवान शामिल हैं।
भारत ने नेपाल को मदद का भरोसा दियाप्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन्द्र शाह से फोन पर बातचीत कर संकट की स्थिति में हरसंभव मानवीय सहायता देने का भरोसा दिया है। भारत की ओर से नेपाल के लिए राहत सामग्री की पहली खेप भी भेजी गई है।
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने नेपाल में आई बाढ़ को बेहद दुखद बताते हुए कहा कि भारत सरकार संकट की इस घड़ी में नेपाल के साथ खड़ी है। उन्होंने बिहार और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्रियों से भी बातचीत की। इन दोनों राज्यों के संभावित प्रभावित सीमावर्ती क्षेत्रों में स्थानीय प्रशासन और राहत-बचाव दलों के साथ NDRF को हाई अलर्ट पर रखा गया है।
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