ईरान-इजरायल तनाव और होर्मुज जलडमरूमध्य में बढ़ी अस्थिरता का असर अब भारत की ऊर्जा आपूर्ति पर भी दिखाई देने लगा है। देश में एलपीजी की उपलब्धता को लेकर दबाव बढ़ा है और हाल ही में सरकार ने 5 किलो वाले छोटे घरेलू गैस सिलेंडर की कीमत में 261 रुपये तक की वृद्धि की है। इसके साथ ही कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर भी करीब 1,000 रुपये तक महंगा हो गया है। इसी बीच पेट्रोल और डीजल की कीमतों में भी संभावित बढ़ोतरी को लेकर आशंकाएं तेज हो गई हैं। हालांकि इस संकट के बीच एक राहत भरी खबर सामने आई है। ब्लूमबर्ग रिपोर्ट के अनुसार, भारत का एक बड़ा सुपरटैंकर लगभग 45,000 टन एलपीजी लेकर होर्मुज जलमार्ग से होकर आगे बढ़ रहा है, जिससे देश में आपूर्ति को कुछ स्थिरता मिलने की उम्मीद जताई जा रही है। फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि जहाज पूरी तरह इस मार्ग को पार कर चुका है या नहीं।
समुद्री मार्ग से भारत की ओर बढ़ रहा ‘सर्व शक्ति’ टैंकरजानकारी के अनुसार, “सर्व शक्ति” नामक यह एलपीजी टैंकर फिलहाल समुद्री मार्ग से उत्तर दिशा में आगे बढ़ रहा है। शनिवार को यह जहाज लारक और केसम द्वीप के पास देखा गया था। शिप ट्रैकिंग डेटा के मुताबिक, यह टैंकर ओमान की खाड़ी से होकर भारत की ओर पहुंच सकता है। हालांकि होर्मुज मार्ग को लेकर तनावपूर्ण हालात और अमेरिका की नाकेबंदी जैसी स्थिति के चलते कई जहाजों की आवाजाही प्रभावित हुई है। बताया जा रहा है कि 13 अप्रैल से ही इस क्षेत्र में कड़े प्रतिबंध लागू हैं, जिससे नियमित शिपिंग बाधित हो रही है।
फारस की खाड़ी में फंसे भारत के कई जहाजरिपोर्ट्स के मुताबिक, मौजूदा संकट के कारण भारत के लगभग 14 जहाज फिलहाल फारस की खाड़ी क्षेत्र में ही फंसे हुए हैं। इनमें से दो जहाजों ने होर्मुज जलमार्ग से निकलने का प्रयास भी किया था, लेकिन ईरान की चेतावनी के बाद उन्हें वापस लौटना पड़ा। फाइनेंशियल टाइम्स की रिपोर्ट में यह भी दावा किया गया है कि कुछ वैकल्पिक समुद्री मार्गों से जहाजों की आवाजाही जारी है और ईरान से जुड़े करीब 34 टैंकर अमेरिकी निगरानी और प्रतिबंधों को चकमा देकर आगे बढ़ चुके हैं।
वैकल्पिक समुद्री रास्तों की जटिल स्थितिसमुद्री नियमों के अनुसार, अमेरिकी नौसेना किसी अन्य देश की समुद्री सीमा के भीतर सीधे हस्तक्षेप नहीं कर सकती। ऐसे में कुछ जहाज ईरान के तटीय क्षेत्र से गुजरते हुए चाबहार बंदरगाह तक पहुंचते हैं और फिर दक्षिण दिशा से अंतरराष्ट्रीय समुद्री सीमा में प्रवेश करते हैं। इसके बाद यह जहाज भारत के पश्चिमी तट—महाराष्ट्र, गुजरात, गोवा, कर्नाटक या केरल के बंदरगाहों तक पहुंच सकते हैं। एक अन्य मार्ग पाकिस्तान की समुद्री सीमा से होकर भी गुजरता है, लेकिन यह रास्ता अधिक जोखिम भरा माना जाता है और सुरक्षा चुनौतियां भी अधिक रहती हैं।
अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतों से बढ़ी चिंतावैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल और घरेलू स्तर पर लंबे समय से स्थिर खुदरा दरों के कारण तेल कंपनियों पर वित्तीय दबाव बढ़ता जा रहा है। सरकारी सूत्रों ने संकेत दिए हैं कि आने वाले समय में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में वृद्धि से इनकार नहीं किया जा सकता। हाल ही में अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चा तेल 126 डॉलर प्रति बैरल के चार साल के उच्च स्तर तक पहुंच गया था। हालांकि बाद में इसमें कुछ गिरावट दर्ज की गई, लेकिन कीमतें अभी भी 110 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर बनी हुई हैं, जिससे ऊर्जा बाजार में अस्थिरता बनी हुई है।