ईरान और अमेरिका के बीच जारी तनाव को कम करने के लिए कूटनीतिक प्रयास हो रहे हैं, लेकिन बातचीत की शर्तों पर दोनों देशों के बीच गतिरोध बना हुआ है। ईरान ने स्पष्ट कर दिया है कि उसकी ओर से घोषित सात शर्तें पूरी किए बिना अमेरिका के साथ बातचीत आगे बढ़ाने का कोई औचित्य नहीं है। इसी बीच क्षेत्रीय तनाव कम करने की कोशिशों के तहत रविवार को कतर के मध्यस्थ तेहरान पहुंचे।
दूसरी ओर, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने संकेत दिया है कि ईरान को लेकर फैसला करने का समय करीब आ गया है। उनके सामने तेहरान के साथ समझौता करने या दोबारा सैन्य हमले शुरू करने का विकल्प है। ऐसे में दोनों देशों के बीच कूटनीतिक बातचीत की संभावनाओं के साथ सैन्य टकराव बढ़ने की आशंका भी बनी हुई है।
ईरान ने कहा- सात शर्तों के बिना बातचीत का मतलब नहींईरान की संसद के स्पीकर के प्रवक्ता अब्बास गौजर्दी ने कहा है कि जब तक तेहरान की ओर से घोषित सात शर्तें पूरी नहीं होतीं, तब तक अमेरिका के साथ बातचीत निरर्थक रहेगी। सरकारी समाचार एजेंसी आईएसएनए से बातचीत में उन्होंने ट्रंप की हालिया हमले की चेतावनियों को धमकाने के उद्देश्य से की गई बयानबाजी बताया।
गौजर्दी ने कहा, “ईरान ने अपनी सात शर्तें घोषित कर दी हैं। जब तक ये शर्तें पूरी नहीं होतीं, बातचीत निरर्थक होगी।”
उन्होंने अमेरिका पर ईरान की परमाणु क्षमता और होर्मुज जलडमरूमध्य पर उसके नियंत्रण को खत्म करने की कोशिश करने का आरोप भी लगाया। गौजर्दी के मुताबिक, वाशिंगटन इन कदमों के जरिए अपने ऊपर पड़ रहे दबाव को कम करना चाहता है।
ईरान की ओर से सात शर्तों का जिक्र ऐसे समय किया गया है, जब दोनों देशों के बीच युद्ध रोकने और समुद्री मार्ग को फिर से खोलने के लिए मध्यस्थता की कोशिशें जारी हैं। हालांकि, सातों शर्तों की पूरी सूची प्रवक्ता के इस बयान में सार्वजनिक नहीं की गई।
होर्मुज जलडमरूमध्य और प्रतिबंधों पर भी गतिरोधईरान और अमेरिका के बीच विवाद का एक प्रमुख मुद्दा होर्मुज जलडमरूमध्य है। सितंबर में ईरान ने सात दिन की एक रूपरेखा पेश की थी, जिसके तहत जरूरी शर्तें पूरी होने पर इस समुद्री मार्ग को दोबारा खोलने और सामान्य जहाजरानी बहाल करने का प्रस्ताव रखा गया था। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा था कि प्रस्ताव पर अमेरिकी प्रतिक्रिया मिली है, लेकिन दोनों पक्षों के बीच कदम उठाने के क्रम और शर्तों को लेकर मतभेद बने हुए हैं।
इस प्रस्ताव से जुड़े विवाद में ईरान की ओर से अमेरिकी नौसैनिक नाकेबंदी हटाने, तेल निर्यात पर लगे प्रतिबंधों में राहत और क्षेत्रीय मोर्चों पर लड़ाई समाप्त करने जैसे मुद्दे भी उठाए गए हैं। तेहरान चाहता है कि बातचीत के अगले चरण से पहले उसकी प्रमुख मांगों पर प्रगति हो, जबकि अमेरिका ईरान के परमाणु कार्यक्रम को भी चर्चा के केंद्र में लाना चाहता है। होर्मुज जलडमरूमध्य वैश्विक तेल और तरलीकृत प्राकृतिक गैस की आपूर्ति के लिहाज से अहम समुद्री मार्ग है। यहां जहाजरानी को लेकर पैदा हुआ तनाव केवल दोनों देशों के संबंधों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका असर क्षेत्रीय सुरक्षा और ऊर्जा आपूर्ति पर भी पड़ सकता है।
ट्रंप के सामने समझौते या सैन्य कार्रवाई का विकल्पअमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि ईरान को लेकर निर्णय लेने का समय आ गया है। उनके मुताबिक, अब यह तय करना है कि तेहरान के साथ समझौता किया जाए या सैन्य हमले दोबारा शुरू किए जाएं। ट्रंप ने रविवार को फॉक्स न्यूज के कार्यक्रम ‘संडे मॉर्निंग फ्यूचर्स’ को दिए इंटरव्यू में कहा, “मुझे फैसला करना है कि क्या मैं इसे पूरी तरह खत्म कर दूं, जो करना बहुत आसान होगा, या समझौता करूं? बस यही दो विकल्प हैं।” उन्होंने आगे कहा, “हम कोई खेल नहीं खेलते।”
उनका यह बयान ऐसे समय आया है, जब मध्य पूर्व में अमेरिकी नागरिकों के खिलाफ ईरान और यमन के हूती विद्रोहियों की ओर से धमकियां बढ़ने की बात कही जा रही है। ट्रंप ने ईरान के साथ संभावित समझौते पर सवाल उठाते हुए सैन्य कार्रवाई का विकल्प भी खुला रखा है।
3 नवंबर के बाद हमले फिर शुरू होने की आशंका
ट्रंप पहले भी संकेत दे चुके हैं कि ईरान पर अमेरिकी हमले 3 नवंबर को होने वाले मध्यावधि चुनाव के बाद दोबारा शुरू हो सकते हैं। इस बीच अमेरिका ने फारस की खाड़ी की दिशा में अतिरिक्त सैन्य संसाधन भेजे हैं। इनमें तीसरा विमानवाहक पोत समूह भी शामिल है। अमेरिकी सैन्य तैनाती बढ़ने से ईरान पर दबाव बनाने की वाशिंगटन की क्षमता बढ़ सकती है। हालांकि, अतिरिक्त सैन्य संसाधनों की मौजूदगी अपने आप में हमले का अंतिम निर्णय नहीं है। ट्रंप ने फिलहाल समझौते और सैन्य कार्रवाई, दोनों विकल्पों का उल्लेख किया है। क्षेत्र में अमेरिकी सैन्य मौजूदगी बढ़ाए जाने और नवंबर के चुनाव के बाद संभावित हमलों को लेकर आशंकाओं की पुष्टि हालिया रिपोर्टों में भी हुई है।
कूटनीतिक प्रयास जारी, लेकिन रास्ता आसान नहींअमेरिका की सैन्य तैयारियों और ट्रंप की चेतावनियों के बावजूद कूटनीतिक प्रयास जारी हैं। रविवार को कतर के मध्यस्थों का तेहरान पहुंचना इसी कोशिश का हिस्सा है। कतर पहले भी वाशिंगटन और तेहरान के बीच संदेश पहुंचाने तथा बातचीत के रास्ते तलाशने में भूमिका निभाता रहा है। फिलहाल सबसे बड़ी चुनौती यह है कि दोनों देश बातचीत शुरू करने की प्राथमिकताओं पर सहमत नहीं हैं। ईरान अपनी घोषित शर्तों को पूरा किए जाने पर जोर दे रहा है, जबकि अमेरिका परमाणु कार्यक्रम से जुड़े मुद्दों पर भी प्रगति चाहता है। होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर विवाद और सैन्य कार्रवाई की आशंका इस गतिरोध को और जटिल बना रही है। अगला कदम इस बात पर निर्भर करेगा कि मध्यस्थता के जरिए दोनों पक्षों के बीच शर्तों को लेकर कोई सहमति बनती है या नहीं। फिलहाल ईरान ने सात शर्तों पर अपना रुख स्पष्ट किया है, जबकि ट्रंप ने समझौते और सैन्य कार्रवाई के बीच फैसला करने की बात कही है।