ईरान की लगी लॉटरी! अमेरिका के साथ समझौते के बाद किसे होगा क्या फायदा? 14 अहम बिंदुओं का खुलासा

करीब 107 दिनों तक चले तनाव और संघर्ष के बाद आखिरकार अमेरिका और ईरान के बीच शांति की राह खुलती दिखाई दे रही है। दोनों देशों ने घोषणा की है कि उनके बीच लंबे समय से चल रही बातचीत निर्णायक चरण में पहुंच चुकी है और प्रस्तावित शांति समझौते पर आगामी 19 जून, शुक्रवार को स्विट्जरलैंड में औपचारिक हस्ताक्षर किए जाएंगे। पश्चिम एशिया में जारी अस्थिरता के बीच इस समझौते को एक महत्वपूर्ण कूटनीतिक सफलता माना जा रहा है, क्योंकि इससे क्षेत्र में कई महीनों से बने हुए सैन्य और राजनीतिक तनाव में कमी आने की उम्मीद है। हालांकि समझौते की सभी शर्तों की आधिकारिक पुष्टि अभी बाकी है, लेकिन ईरानी मीडिया ने इसके ड्राफ्ट से जुड़े कई महत्वपूर्ण पहलुओं का खुलासा किया है।

ईरान के सरकारी मीडिया संस्थानों के मुताबिक अमेरिका और ईरान के बीच तैयार किए गए समझौता ज्ञापन (MoU) में कुल 14 प्रमुख बिंदुओं को शामिल किया गया है। ईरान की अर्ध-सरकारी समाचार एजेंसी मेहर न्यूज एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार, प्रस्तावित समझौते में कई ऐसे प्रावधान रखे गए हैं जो दोनों देशों के बीच लंबे समय से चले आ रहे विवादों को समाप्त करने की दिशा में अहम साबित हो सकते हैं।

रिपोर्ट के अनुसार, समझौते के तहत लेबनान सहित सभी सक्रिय मोर्चों पर स्थायी युद्धविराम लागू किया जाएगा, जिससे क्षेत्रीय संघर्षों पर विराम लग सके। अमेरिका ने यह भरोसा भी दिया है कि वह भविष्य में ईरान के आंतरिक मामलों में किसी प्रकार का हस्तक्षेप नहीं करेगा। इसके अलावा, होर्मुज क्षेत्र में लागू अमेरिकी नौसैनिक नाकेबंदी को अगले 30 दिनों के भीतर हटाने की बात कही गई है, जिससे समुद्री व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति मार्ग सामान्य हो सकेंगे।

मसौदे में यह भी उल्लेख किया गया है कि अमेरिका अपनी सैन्य टुकड़ियों को ईरान से वापस बुलाएगा। वहीं, ईरान की व्यवस्था के तहत होर्मुज जलडमरूमध्य को भी 30 दिनों के भीतर दोबारा पूरी तरह खोल दिया जाएगा। इस कदम से अंतरराष्ट्रीय व्यापारिक जहाजों और तेल आपूर्ति मार्गों को राहत मिलने की संभावना जताई जा रही है।
समझौते के आर्थिक पहलू भी बेहद महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं। रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका और उसके सहयोगी देश ईरान के पुनर्निर्माण और आर्थिक विकास के लिए कम से कम 300 अरब डॉलर मूल्य की योजनाएं प्रस्तुत करेंगे। इसके साथ ही ईरानी तेल तथा अन्य ऊर्जा उत्पादों पर लगाए गए प्रतिबंधों को समाप्त करने का प्रस्ताव भी शामिल है, जिससे ईरान की अर्थव्यवस्था को बड़ा सहारा मिल सकता है।

परमाणु कार्यक्रम को लेकर भी दोनों पक्षों के बीच सहमति बनने की बात कही गई है। मसौदे के अनुसार, ईरान एक बार फिर यह आश्वासन देगा कि वह परमाणु हथियार विकसित नहीं करेगा। बदले में अमेरिका यह वचन देगा कि वह पश्चिम एशिया में अपनी सैन्य मौजूदगी का विस्तार नहीं करेगा और ईरान के खिलाफ कोई नया प्रतिबंध लागू नहीं करेगा।

मेहर न्यूज एजेंसी की रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि अंतिम चरण की वार्ता तब तक शुरू नहीं होगी, जब तक ईरान की जब्त विदेशी संपत्तियों में से कम से कम आधी राशि, यानी लगभग 12 बिलियन डॉलर, जारी नहीं कर दी जाती। इसके अलावा ईरानी तेल पर लगे प्रतिबंधों को हटाना और नौसैनिक नाकेबंदी समाप्त करना भी वार्ता शुरू होने की पूर्व शर्तों में शामिल बताया गया है।

रिपोर्ट के मुताबिक, जब दोनों पक्ष सभी शर्तों पर अंतिम सहमति बना लेंगे, तब इस समझौते को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में प्रस्ताव के रूप में पेश किया जाएगा। सुरक्षा परिषद की मंजूरी मिलने के बाद यह समझौता अंतरराष्ट्रीय स्तर पर औपचारिक मान्यता प्राप्त करेगा और क्षेत्रीय स्थिरता की दिशा में एक बड़े कदम के रूप में देखा जाएगा।