रांची छात्र आंदोलन: देवेंद्र महतो ने साफ किया- सोनम वांगचुक की सलाह पर पिया पानी, भूख हड़ताल जारी

झारखंड की राजधानी रांची में जेपीएससी परीक्षा में कथित अनियमितताओं को लेकर चल रहा छात्र आंदोलन अब भी जारी है। छात्रों ने भर्ती परीक्षाओं में पारदर्शिता, निष्पक्ष प्रक्रिया और बिना किसी गड़बड़ी के परिणाम जारी करने की मांग को लेकर मोर्चा खोल रखा है। इसी मांग को लेकर छात्र नेता देवेंद्र नाथ महतो पिछले कई दिनों से अनशन पर बैठे हैं।

शुरुआत में देवेंद्र महतो ने अन्न के साथ-साथ पानी का भी त्याग कर दिया था। इसी बीच हाल ही में शिक्षा और सामाजिक मुद्दों पर सक्रिय रहने वाले सोनम वांगचुक ने उनसे वीडियो कॉल के जरिए बातचीत की और स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए पानी पीने की सलाह दी। इसके बाद देवेंद्र महतो ने पानी ग्रहण किया, लेकिन उन्होंने स्पष्ट किया कि उनका अनशन खत्म नहीं हुआ है और वह अपनी मांगों को लेकर अब भी भूख हड़ताल पर हैं।

देवेंद्र महतो ने कहा कि सोनम वांगचुक के आग्रह पर उन्होंने पानी पिया है, लेकिन कुछ जगहों पर यह खबर फैलाई जा रही है कि उन्होंने आंदोलन या अनशन समाप्त कर दिया है, जो पूरी तरह गलत है। उन्होंने कहा कि सरकार जब तक छात्रों की मांगों पर सकारात्मक फैसला नहीं लेती, तब तक उनका संघर्ष जारी रहेगा।

उन्होंने लोगों से अपील करते हुए कहा कि इस आंदोलन को कमजोर करने या नुकसान पहुंचाने वाली कोई भी गतिविधि नहीं की जानी चाहिए। देवेंद्र महतो ने कहा, यह आंदोलन बहुत मेहनत और संघर्ष के बाद खड़ा हुआ है। इसे किसी भी तरह से नुकसान नहीं पहुंचाया जाना चाहिए।

'शरीर कमजोर हो रहा है, लेकिन हौसला बरकरार है'

देवेंद्र महतो ने बताया कि उनकी भूख हड़ताल का पांचवां दिन चल रहा है। उन्होंने कहा कि लगातार उपवास के कारण शरीर काफी कमजोर हो गया है। बातचीत करने में भी परेशानी महसूस हो रही है और उठने-बैठने के लिए सहारे की जरूरत पड़ रही है।

उन्होंने कहा, शरीर अब पहले जैसा साथ नहीं दे रहा है, लेकिन मेरा दिमाग पूरी तरह स्वस्थ है। मैं अपनी बात कह पा रहा हूं और छात्रों की मांगों के लिए संघर्ष जारी रखूंगा।

उन्होंने साफ किया कि सिर्फ शारीरिक कमजोरी के कारण वह आंदोलन से पीछे नहीं हटेंगे और जब तक छात्रों की मांगों पर कोई ठोस निर्णय नहीं लिया जाता, तब तक उनका विरोध जारी रहेगा।
'पानी छोड़ना आत्महत्या जैसा, इसलिए सोनम वांगचुक की सलाह मानी'

समाचार एजेंसी पीटीआई से बातचीत में देवेंद्र महतो ने बताया कि डॉक्टर लगातार उनकी सेहत की जांच कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि एक दिन पहले उनका ब्लड प्रेशर काफी कम हो गया था, लेकिन अब स्थिति थोड़ी बेहतर है। उन्होंने बताया कि पानी पीने के बाद भी उनकी भूख हड़ताल जारी है।

देवेंद्र महतो ने कहा, सोनम वांगचुक से बातचीत के बाद मैंने पानी पीने का फैसला किया। भूख हड़ताल के दौरान महात्मा गांधी भी पानी ग्रहण करते थे। सोनम वांगचुक ने भी मुझे यही समझाया कि पानी पूरी तरह छोड़ देना आत्महत्या के बराबर हो सकता है। उन्होंने कहा कि आपको खुद को नुकसान नहीं पहुंचाना है, बल्कि सरकार की संवेदनशीलता को जगाना है।

उन्होंने आगे कहा, मैं भी आत्महत्या नहीं करना चाहता हूं। मेरा उद्देश्य सरकार का ध्यान छात्रों की समस्याओं की ओर आकर्षित करना है। इसलिए मैंने पानी ग्रहण किया और आंदोलन को जारी रखने का फैसला लिया।

छात्रों ने सरकार को भेजा 16 सूत्रीय प्रस्ताव

देवेंद्र महतो ने बताया कि छात्रों की ओर से झारखंड सरकार को 16 बिंदुओं वाला प्रस्ताव भेजा गया है। इसमें भर्ती परीक्षाओं में सुधार और पारदर्शिता से जुड़ी कई महत्वपूर्ण मांगें शामिल हैं।

छात्रों की प्रमुख मांगों में जेपीएससी 2023, 2025 बैकलॉग भर्ती और TDPL एजेंसी के माध्यम से कराई गई विवादित परीक्षाओं को रद्द कर सीबीआई जांच कराने की मांग शामिल है। छात्रों का आरोप है कि इन परीक्षाओं में अनियमितताएं हुई हैं, इसलिए निष्पक्ष जांच जरूरी है।

इसके अलावा छात्रों की मांग है कि प्रतियोगी परीक्षाओं का संचालन पूरी तरह सरकारी व्यवस्था के माध्यम से कराया जाए और निजी एजेंसियों की भूमिका को समाप्त किया जाए।

भर्ती प्रक्रिया में बदलाव की मांग


छात्रों ने यह भी मांग रखी है कि भर्ती प्रक्रिया यानी एसओपी (Standard Operating Procedure) और चयन प्रक्रिया के सभी चरणों की जानकारी परीक्षा विज्ञापन में पहले से स्पष्ट रूप से दी जाए, ताकि उम्मीदवारों को किसी तरह की परेशानी न हो।

इसके साथ ही छात्रों की एक अन्य प्रमुख मांग है कि झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) और झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) में ऐसे अध्यक्ष, सदस्य और पदाधिकारी नियुक्त किए जाएं जिनकी पृष्ठभूमि राजनीतिक न हो। छात्रों का कहना है कि आयोगों की निष्पक्षता बनाए रखने के लिए यह जरूरी है।

फिलहाल रांची में छात्रों का आंदोलन जारी है और सभी की नजरें सरकार और आंदोलनकारी छात्रों के बीच होने वाली बातचीत पर टिकी हुई हैं। छात्रों को उम्मीद है कि उनकी मांगों पर जल्द कोई ठोस निर्णय लिया जाएगा।