अंतरराष्ट्रीय कूटनीति के मोर्चे पर ईरान और अमेरिका के बीच चल रही वार्ता में सकारात्मक प्रगति के संकेत मिल रहे हैं। रिपोर्ट्स के अनुसार, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि मौजूदा संघर्ष विराम को 60 दिनों तक बढ़ाने पर विचार किया जा सकता है। साथ ही उन्होंने यह भी संकेत दिया कि इस अवधि में होर्मुज जलडमरूमध्य को बिना किसी शुल्क के खुला रखा जाएगा, जिससे वैश्विक व्यापार और तेल आपूर्ति पर सकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है।
इससे पहले राष्ट्रपति ट्रंप ने यह दावा किया था कि ईरान के साथ एक संभावित समझौता अंतिम चरण में पहुंच चुका है। उन्होंने कहा था कि समझौते के महत्वपूर्ण पहलुओं और तकनीकी विवरणों पर बातचीत जारी है और जल्द ही इसे सार्वजनिक किया जा सकता है। इस पूरे घटनाक्रम के बीच क्षेत्रीय कूटनीति में पाकिस्तान की भूमिका भी चर्चा में आ गई है।
शहबाज शरीफ ने ट्रंप से बातचीत की सराहना कीपाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ, जो इस पूरे कूटनीतिक प्रयास में मध्यस्थ की भूमिका में बताए जा रहे हैं, ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ अपनी बातचीत को सकारात्मक और उपयोगी बताया है। उन्होंने ट्रंप को बधाई देते हुए कहा कि विभिन्न देशों के साथ उनकी फोन पर हुई बातचीत क्षेत्रीय स्थिरता की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
शहबाज शरीफ ने जानकारी दी कि ट्रंप ने सऊदी अरब, कतर, तुर्किये, मिस्र, यूएई, जॉर्डन और पाकिस्तान के नेतृत्व से फोन पर संवाद किया है। उन्होंने बताया कि पाकिस्तान की ओर से फील्ड मार्शल आसिम मुनीर ने भी बातचीत में हिस्सा लिया और इस पूरी प्रक्रिया में ट्रंप के प्रयासों की सराहना की गई। चर्चा के दौरान पश्चिम एशिया में शांति स्थापित करने के प्रयासों पर विस्तार से विचार किया गया और पाकिस्तान ने आगे भी मध्यस्थता की भूमिका निभाने की इच्छा जताई।
होर्मुज जलडमरूमध्य और सुरक्षा प्रावधानों पर प्रस्तावित समझौतारिपोर्ट्स के मुताबिक, एक अमेरिकी अधिकारी ने ईरान और अमेरिका के बीच तैयार किए जा रहे संभावित समझौता ज्ञापन का प्रारंभिक मसौदा साझा किया है। इस प्रस्ताव के तहत दोनों पक्ष 60 दिनों के लिए एक अस्थायी समझौते पर सहमत हो सकते हैं, जिसे आपसी सहमति से आगे भी बढ़ाया जा सकेगा। इस दौरान होर्मुज जलडमरूमध्य को बिना किसी शुल्क के खुला रखने का प्रावधान शामिल है, जिससे समुद्री यातायात निर्बाध रह सके।
इसके साथ ही ईरान द्वारा क्षेत्र में बिछाई गई कथित बारूदी सुरंगों को हटाने की सहमति का भी उल्लेख किया गया है, ताकि समुद्री मार्गों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके और जहाजों की आवाजाही सामान्य बनी रहे।
दूसरी ओर, प्रस्तावित रूपरेखा में अमेरिका की ओर से कुछ आर्थिक रियायतों का भी संकेत दिया गया है। इसमें ईरानी बंदरगाहों पर लगी कुछ प्रतिबंधात्मक व्यवस्थाओं को हटाने और तेल निर्यात को आंशिक स्वतंत्रता देने पर विचार शामिल है। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि जैसे-जैसे ईरान समुद्री मार्गों की सुरक्षा बहाल करेगा, वैसे-वैसे प्रतिबंधों में ढील दी जा सकती है।
परमाणु कार्यक्रम और कूटनीतिक शर्तों पर बातचीतसूत्रों के अनुसार, प्रस्तावित समझौते में ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर भी सख्त शर्तें शामिल की जा रही हैं। इनमें ईरान द्वारा भविष्य में परमाणु हथियार विकसित न करने की प्रतिबद्धता, यूरेनियम संवर्धन कार्यक्रम को अस्थायी रूप से रोकने और उच्च संवर्धित यूरेनियम भंडार को हटाने पर चर्चा जैसे प्रावधान बताए जा रहे हैं।
जानकारों के मुताबिक, मध्यस्थों के जरिए ईरान ने अमेरिका को कुछ शर्तों पर मौखिक सहमति या आश्वासन दिया है, खासकर संवर्धन गतिविधियों को सीमित करने और परमाणु सामग्री के प्रबंधन को लेकर।
पश्चिम एशिया में अमेरिकी सैन्य मौजूदगी और संभावित बदलावरिपोर्ट्स में यह भी दावा किया गया है कि बढ़ते तनाव को देखते हुए पश्चिम एशिया में तैनात अमेरिकी सैन्य बल आगामी 60 दिनों तक अपनी मौजूदा स्थिति में बने रह सकते हैं। यदि ईरान और अमेरिका के बीच अंतिम समझौता हो जाता है, तो इसके बाद क्षेत्र में सैन्य तैनाती को चरणबद्ध तरीके से कम करने पर विचार किया जाएगा।
इसके अतिरिक्त, प्रस्तावित समझौता ज्ञापन में यह भी चर्चा है कि अंतिम सहमति बनने पर अमेरिका ईरान की फ्रीज की गई संपत्तियों को जारी करने पर भी विचार कर सकता है। साथ ही क्षेत्रीय स्तर पर इजरायल और हिज्बुल्ला के बीच चल रहे संघर्ष को समाप्त करने की दिशा में भी कूटनीतिक प्रयासों का उल्लेख इस मसौदे में किया गया है।