ओमान तट के पास एक भारतीय क्रू वाले कमर्शियल जहाज को निशाना बनाए जाने और उसमें तीन भारतीय नाविकों की मौत के बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तनाव बढ़ गया है। इस घटना को लेकर अमेरिका और भारत के बीच भी कूटनीतिक तकरार तेज हो गई है। विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो से फोन पर बातचीत कर कड़ा विरोध दर्ज कराया है। वहीं इसके अगले ही दिन रुबियो का बयान सामने आया, जिसमें उन्होंने कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य में किसी भी तरह की नाकेबंदी या नियमों के उल्लंघन को स्वीकार नहीं किया जाएगा। इसी बीच ईरान में फंसे कुछ भारतीय नाविकों ने वीडियो जारी कर अपनी आपबीती साझा की है और सवाल उठाए हैं कि आखिर भारतीय जहाजों को ही क्यों निशाना बनाया जा रहा है।
“हम सैनिक नहीं, फिर क्यों बन रहे निशाना?” — नाविकों की अपीलसोशल मीडिया पर सामने आए वीडियो में एक नाविक भावुक होकर कहता है कि भारतीय सीफेयरर्स को लगातार टारगेट किया जा रहा है। उनका कहना है कि वे इस समय ईरान में फंसे हुए हैं और हालात को लेकर बेहद डरे हुए हैं। नाविक ने सवाल उठाया कि जब संघर्ष में उनकी कोई भूमिका नहीं है, तो उन्हें क्यों निशाना बनाया जा रहा है।
उसने कहा कि वे किसी सेना का हिस्सा नहीं हैं और न ही उन्हें युद्ध की कोई ट्रेनिंग दी गई है। उनका काम केवल व्यापारिक जहाजों को चलाना और वैश्विक व्यापार में योगदान देना है। नाविक के अनुसार, वे कॉन्ट्रैक्ट पर काम करने वाले पेशेवर हैं और उनकी कोई राजनीतिक या सैन्य भूमिका नहीं है। ऐसे में उनकी क्या गलती है कि उन्हें इस स्थिति का सामना करना पड़ रहा है।
नाविक ने आगे बताया कि हाल ही में जिस जहाज पर हमला हुआ, उसमें से एक क्रू मेंबर उनके परिचित थे। कैप्टन से बातचीत में उन्हें पता चला कि पहले चेतावनी दी गई और फिर तुरंत मिसाइल से हमला कर दिया गया। उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर निर्दोष लोगों को क्यों निशाना बनाया जा रहा है।
नाविक ने यह भी कहा कि उन्हें इस संघर्ष में घसीटा जाना पूरी तरह गलत है। उन्होंने बताया कि दुनिया भर में करीब 13 लाख सीफेयरर्स काम करते हैं और वे सभी मिलकर अपनी आवाज उठाना चाहते हैं। उनका सवाल है कि सिर्फ भारतीय नाविकों को ही बार-बार क्यों टारगेट किया जा रहा है। गौरतलब है कि इस हमले में ओमान तट के पास एक जहाज पर हमला हुआ था, जिसमें 24 भारतीय चालक दल मौजूद थे। इस घटना में तीन नाविकों की मौत हो गई थी, जबकि 21 लोगों को सुरक्षित बचा लिया गया।
केंद्र सरकार पर विपक्ष का हमलाइस घटना के बाद राजनीतिक प्रतिक्रियाएं भी तेज हो गई हैं। कांग्रेस पार्टी ने केंद्र सरकार की प्रतिक्रिया को लेकर नाराजगी जताई है और इसे कमजोर बताया है। राहुल गांधी ने कहा कि अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो की भाषा अफसोस जताने के बजाय आदेश देने जैसी प्रतीत होती है, जो उचित नहीं है।
कांग्रेस के मीडिया विभाग प्रमुख पवन खेड़ा ने भी इस मुद्दे पर कड़ी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि इस घटना को लेकर अमेरिका के रवैये को स्पष्ट रूप से अवैध और अस्वीकार्य बताया जाना चाहिए था, साथ ही माफी की मांग भी की जानी चाहिए थी।
पवन खेड़ा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर लिखा कि तीन भारतीय नाविकों की मौत के लिए अमेरिका से बिना शर्त माफी मांगी जानी चाहिए थी। उन्होंने आरोप लगाया कि इसके बजाय अमेरिकी विदेश मंत्री ने ऐसी चेतावनी जारी की है जिसमें कहा गया है कि अमेरिकी सैन्य आदेशों का पालन न करना बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।