ईरान के सुप्रीम लीडर आयतुल्लाह अली खामेनेई की मौत के बाद आयोजित अंतिम विदाई समारोह में हजारों लोगों की मौजूदगी रही। इस दौरान अमेरिका विरोधी नारे गूंजे और डोनाल्ड ट्रंप के खिलाफ बदले की भावना को लेकर भाषण तथा कविताएं भी सुनाई गईं। इसी बीच इजरायल की ओर से सामने आई एक नई खुफिया रिपोर्ट ने पूरे मामले को और गंभीर बना दिया है। द वॉल स्ट्रीट जर्नल की रिपोर्ट के अनुसार, इजरायल ने अमेरिका के साथ ऐसी खुफिया जानकारी साझा की है, जिसमें दावा किया गया है कि ईरान अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की हत्या की नई साजिश तैयार कर रहा था।
यह दावा ऐसे समय सामने आया है जब करीब तीन सप्ताह पहले ही अमेरिका और ईरान के बीच युद्धविराम लागू हुआ था, लेकिन हालिया घटनाक्रम ने दोनों देशों के बीच तनाव को फिर से बढ़ा दिया है। इजरायल की इस रिपोर्ट के बाद आशंका जताई जा रही है कि वॉशिंगटन और तेहरान के रिश्तों में एक बार फिर गंभीर टकराव की स्थिति बन सकती है। गौरतलब है कि दोनों देशों के बीच अभी तक किसी स्थायी समझौते पर अंतिम मुहर नहीं लगी है।
साल 2020 में अमेरिकी ड्रोन हमले में ईरान के शीर्ष सैन्य कमांडर कासिम सुलेमानी की मौत के बाद से ही तेहरान की ओर से डोनाल्ड ट्रंप के खिलाफ लगातार कड़े बयान दिए जाते रहे हैं। कई मौकों पर ईरानी अधिकारियों और समर्थकों ने ट्रंप से बदला लेने की बात भी कही थी। ऐसे में इजरायल की नई खुफिया रिपोर्ट ने उन पुराने आरोपों और आशंकाओं को फिर चर्चा में ला दिया है।
सीएनएन की रिपोर्ट के मुताबिक, इजरायल की खुफिया एजेंसियां लगातार ईरान की सैन्य और रणनीतिक गतिविधियों पर नजर बनाए रखती हैं। इससे पहले भी इजरायल कई बार ईरान से जुड़े संभावित खतरों की जानकारी अमेरिकी प्रशासन को देता रहा है। अमेरिकी अधिकारियों का मानना है कि यदि यह नई खुफिया जानकारी विश्वसनीय साबित होती है तो डोनाल्ड ट्रंप की ईरान नीति में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। पिछले एक महीने के दौरान ट्रंप प्रशासन ने तेहरान के साथ समझौते की दिशा में कई प्रयास किए हैं, लेकिन साथ ही यह भी स्पष्ट किया है कि यदि ईरान किसी प्रकार की आक्रामक कार्रवाई करता है तो अमेरिका व्यापक सैन्य अभियान शुरू करने से पीछे नहीं हटेगा।
दोनों ओर से तेज हुए हमले, युद्धविराम पर फिर मंडराया संकटतुर्की दौरे के दौरान डोनाल्ड ट्रंप ने स्वयं कहा था कि ईरान उन्हें अपना प्रमुख निशाना मानता है। उन्होंने दावा किया था कि ईरानी नेतृत्व की 'हिट लिस्ट' में उनका नाम शामिल है, हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि उन्हें इससे कोई डर नहीं है। ट्रंप के इस बयान के बाद क्षेत्रीय तनाव और बढ़ गया था।
इसी बीच गुरुवार को अमेरिका ने ईरान से जुड़े कई ठिकानों पर हमले किए। जवाबी कार्रवाई में ईरान ने अमेरिका के सहयोगी पश्चिम एशियाई देशों की दिशा में मिसाइल और ड्रोन दागे। दोनों पक्षों की इस सैन्य कार्रवाई ने हाल ही में हुए अस्थायी युद्धविराम को गंभीर खतरे में डाल दिया है। इस समझौते का उद्देश्य पश्चिम एशिया में बढ़ते संघर्ष को नियंत्रित करना और व्यापक युद्ध की आशंका को कम करना था।
बुधवार को भी अमेरिका और ईरान समर्थित पक्षों के बीच हमलों का सिलसिला देखने को मिला था, लेकिन गुरुवार की कार्रवाई कहीं अधिक व्यापक और तीव्र रही। बहरीन में कम से कम तीन बार हवाई हमले के सायरन बजाए गए। इसके अलावा कुवैत और कतर की दिशा में भी मिसाइलें दागे जाने की खबरें सामने आईं। बहरीन में अमेरिकी नौसेना के पांचवें बेड़े का मुख्यालय स्थित है, इसलिए वहां सुरक्षा व्यवस्था को हाई अलर्ट पर रखा गया। वहीं जॉर्डन में भी गुरुवार दोपहर सायरन बजने लगे, जहां अमेरिका ने अपने सैनिकों और सैन्य विमानों की तैनाती कर रखी है।
इन घटनाओं से कुछ घंटे पहले ही डोनाल्ड ट्रंप ने बयान दिया था कि होर्मुज जलडमरूमध्य के आसपास जहाजों पर ईरान की हालिया गतिविधियां इस बात का संकेत हैं कि युद्धविराम कमजोर पड़ रहा है। उन्होंने चेतावनी दी थी कि यदि ऐसे हमले जारी रहे तो क्षेत्र में संघर्ष और अधिक भड़क सकता है। ट्रंप के इस बयान और उसके बाद हुई सैन्य कार्रवाई ने पूरे पश्चिम एशिया में बड़े युद्ध की आशंकाओं को फिर से तेज कर दिया है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि हालात और बिगड़ते हैं तो इसका असर केवल अमेरिका और ईरान तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि कई अन्य देश भी इसकी चपेट में आ सकते हैं। साथ ही होर्मुज जलडमरूमध्य से होने वाली वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति प्रभावित होने का खतरा भी बढ़ जाएगा, जिसका सीधा असर अंतरराष्ट्रीय अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है।