मुसलमानों का नरसंहार हो रहा… अमेरिकी सांसद इल्हान उमर ने फिर साधा भारत पर निशाना, मोदी सरकार का भी किया जिक्र

अमेरिका की डेमोक्रेटिक सांसद इल्हान उमर एक बार फिर भारत को लेकर दिए गए अपने बयान के कारण सुर्खियों में हैं। अमेरिकी राजनीति में अक्सर विवादों का हिस्सा रहने वाली उमर ने हाल ही में एक कार्यक्रम के दौरान भारत में अल्पसंख्यकों की स्थिति को लेकर गंभीर टिप्पणी की। उन्होंने दावा किया कि भारत कथित तौर पर नरसंहार के आठवें चरण तक पहुंच चुका है। उनके इस बयान को लेकर नई बहस छिड़ गई है, क्योंकि उन्होंने अपने दावों के समर्थन में कोई आधिकारिक आंकड़े या ठोस प्रमाण पेश नहीं किए।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, यह टिप्पणी जून के शुरुआती दिनों में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान की गई थी। यह कार्यक्रम 'इंडियन अमेरिकन मुस्लिम काउंसिल' (IAMC) द्वारा आयोजित किया गया था, जिसमें भारत से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर चर्चा हुई। हालांकि कार्यक्रम 7 जून को आयोजित हुआ था, लेकिन उससे जुड़े वीडियो अब सोशल मीडिया और अन्य प्लेटफॉर्म्स पर सामने आए हैं। इन्हीं वीडियो में इल्हान उमर भारत को लेकर अपने विचार व्यक्त करती नजर आ रही हैं।

भारत को लेकर क्या बोलीं इल्हान उमर?

कार्यक्रम के दौरान इल्हान उमर ने कहा कि उन्हें प्राप्त रिपोर्टों के आधार पर भारत कथित रूप से नरसंहार के आठवें चरण में पहुंच चुका है। उन्होंने यह भी कहा कि इस विषय पर लगातार ध्यान आकर्षित करना आवश्यक है क्योंकि उनके अनुसार यह केवल किसी एक सरकार तक सीमित मामला नहीं है, बल्कि एक व्यापक और संस्थागत स्वरूप ग्रहण करता जा रहा है।

उमर ने अपने बयान में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि स्थिति को लेकर दुनिया को सतर्क रहने की आवश्यकता है और इसे केवल राजनीतिक नेतृत्व के नजरिए से नहीं देखा जाना चाहिए। उनके इस बयान ने भारतीय समुदाय और राजनीतिक हलकों में नई चर्चाओं को जन्म दे दिया है।
क्या है ‘नरसंहार के आठवें चरण’ की अवधारणा?

अपने संबोधन में इल्हान उमर जिस आठवें चरण का उल्लेख कर रही थीं, उसका संबंध 'जीनोसाइड वॉच' नामक संस्था के संस्थापक डॉ. ग्रेगरी एच. स्टैंटन द्वारा प्रस्तुत एक सिद्धांत से माना जाता है। इस सिद्धांत के अनुसार नरसंहार की प्रक्रिया को 10 चरणों में विभाजित किया गया है।

इसमें आठवें चरण को उत्पीड़न या परसिक्यूशन कहा जाता है। सिद्धांत के अनुसार इस चरण में किसी विशेष समुदाय या अल्पसंख्यक समूह को व्यवस्थित रूप से निशाना बनाए जाने, उनके अधिकारों पर अंकुश लगाने, संपत्तियों पर नियंत्रण, जबरन विस्थापन और बुनियादी सुविधाओं से वंचित करने जैसी स्थितियों का उल्लेख किया जाता है। हालांकि किसी देश की स्थिति को इस श्रेणी में रखना एक गंभीर और विवादास्पद दावा माना जाता है, जिसके लिए व्यापक और प्रमाणित तथ्यों की आवश्यकता होती है।

पाकिस्तान को लेकर रुख पर भी उठते रहे हैं सवाल

सोमालिया में जन्मीं और बाद में अमेरिका में बस गईं इल्हान उमर लंबे समय से दक्षिण एशिया से जुड़े मुद्दों पर अपनी राय रखती रही हैं। विशेष रूप से कश्मीर को लेकर उनके कई बयान पहले भी चर्चा का विषय बन चुके हैं। भारत सरकार कई बार स्पष्ट कर चुकी है कि जम्मू-कश्मीर देश का अभिन्न हिस्सा है और यह भारत का आंतरिक विषय है।

आलोचकों का कहना है कि उमर अक्सर पाकिस्तान के दृष्टिकोण के करीब दिखाई देती हैं। दूसरी ओर, अमेरिका में भी उन्हें कई राजनीतिक विवादों का सामना करना पड़ा है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और उनके समर्थक कई बार सोमाली मूल के प्रवासियों और इल्हान उमर की आलोचना कर चुके हैं। ट्रंप पहले भी सार्वजनिक रूप से उमर को निशाना बनाते रहे हैं और उन पर कई आरोप लगा चुके हैं।

भारत पहले भी दे चुका है जवाब

भारत सरकार और उसके अधिकारी अतीत में भी इस तरह की टिप्पणियों पर अपनी प्रतिक्रिया देते रहे हैं। हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की नॉर्वे यात्रा के दौरान अल्पसंख्यकों की स्थिति से जुड़े एक सवाल पर भारत ने अपना पक्ष स्पष्ट किया था।

विदेश मंत्रालय में सचिव (पश्चिम) के पद पर कार्यरत सिबी जॉर्ज ने उस दौरान कहा था कि भारत में आजादी के समय अल्पसंख्यकों की आबादी लगभग 11 प्रतिशत थी, जो वर्तमान में बढ़कर 20 प्रतिशत से अधिक हो चुकी है। उन्होंने तर्क दिया था कि यदि किसी देश में अल्पसंख्यकों की आबादी लगातार बढ़ रही है, तो यह वहां उनके अस्तित्व और विकास की स्थिति को भी दर्शाता है। भारत ने ऐसे सवालों पर हमेशा तथ्यों और आंकड़ों के आधार पर अपना पक्ष रखने की बात कही है।

क्या है IAMC और क्यों रहता है चर्चा में?

इंडियन अमेरिकन मुस्लिम काउंसिल (IAMC) अमेरिका में पंजीकृत एक गैर-लाभकारी संगठन है। यह संस्था लंबे समय से भारत में धार्मिक और सामाजिक मुद्दों को लेकर अपनी चिंताएं व्यक्त करती रही है। संगठन समय-समय पर अमेरिकी प्रशासन और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारत में अल्पसंख्यकों की स्थिति को लेकर आवाज उठाता रहा है।

IAMC ने कई बार यह मांग भी की है कि भारत को धार्मिक स्वतंत्रता और अल्पसंख्यक अधिकारों के मुद्दे पर विशेष चिंता वाले देशों की सूची में शामिल किया जाए। इसके अलावा संगठन राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS), उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा समेत कुछ भारतीय नेताओं और संगठनों को लेकर भी अपनी आपत्तियां दर्ज कराता रहा है। यही वजह है कि यह संगठन अक्सर भारत से जुड़े अंतरराष्ट्रीय विमर्श में चर्चा का विषय बना रहता है।