‘मरना नहीं चाहते, हमें बचा लो’… होर्मुज में फंसे 20 हजार नाविक, कर रहे है बम और भूख का सामना

मध्य पूर्व में पिछले एक महीने से जारी संघर्ष ने होर्मुज जलडमरूमध्य और उसके आस-पास फंसे लगभग 3,000 जहाजों को संकटग्रस्त बना दिया है। इन जहाजों पर 20,000 नाविक सवार हैं और हर पल उनकी जान जोखिम में है। ताजा पानी और खाना लगभग समाप्त हो चुका है, और नाविकों की सुरक्षा को लेकर चिंताएं चरम पर हैं। समुद्र में फंसे नाविकों की मदद करने वाली हेल्पलाइन संस्थाएं लगातार उनके संपर्क में हैं। नाविक अपने देश वापसी, मुआवजा और आवश्यक सामग्री की मांग कर रहे हैं। संदेशों की इतनी बाढ़ है कि हेल्पलाइन टीमें इसे संभालने में कठिनाई महसूस कर रही हैं।

आईटीएफ की मदद और नाविकों की स्थिति

इंटरनेशनल ट्रांसपोर्ट वर्कर्स फेडरेशन (ITF) के पास नाविकों की मदद के लिए विशेष सपोर्ट टीम है। इस टीम को 24 मार्च को एक नाविक ने ईमेल भेजा जिसमें उसने लिखा, “हमारे जहाज की स्थिति गंभीर है। राशन और पानी खत्म हो रहे हैं और एक क्रू सदस्य की सेहत को लेकर भी खतरा है। कृपया तुरंत जरूरी सामान भेजें।” ITF ने बताया कि 28 फरवरी के बाद से उन्हें होर्मुज क्षेत्र में फंसे नाविकों से 1,000 से अधिक ईमेल और संदेश प्राप्त हुए हैं।

नाविक अपने जहाज के पास बम गिरते हुए वीडियो भी भेज रहे हैं। कई नाविक ITF से पूछ रहे हैं कि युद्ध क्षेत्र में उनके अधिकार क्या हैं और जहाज से सुरक्षित निकलने में मदद कैसे मिले। ITF के अरब और ईरान नेटवर्क कोऑर्डिनेटर मोहम्मद अरराचेदी ने AFP को बताया कि “स्थिति असाधारण है। रात के दो-तीन बजे भी नाविक कॉल कर रहे हैं। एक नाविक ने घबराकर कहा, ‘हम बमबारी के बीच फंसे हैं, हमें बचाइए। हम मरना नहीं चाहते।’”
संयुक्त राष्ट्र के आंकड़े और हताहत

इंटरनेशनल मैरिटाइम ऑर्गेनाइजेशन (IMO) के अनुसार, वर्तमान में लगभग 20,000 नाविक खाड़ी क्षेत्र में फंसे हैं। 28 फरवरी के बाद की घटनाओं में कम से कम आठ नाविक या बंदरगाह कर्मियों की मौत हो चुकी है।

वेतन और जोखिम की स्थिति

ITF की टीम ने बताया कि फंसे नाविकों के आधे संदेश वेतन से जुड़े हैं। कई नाविक जहाज छोड़ने का जोखिम नहीं उठा पा रहे क्योंकि वेतन कम और खर्चा अधिक है। एक नाविक ने ईमेल में पूछा कि क्या युद्ध क्षेत्र में काम करने के कारण उसकी रोज की तनख्वाह 16 डॉलर (लगभग 1,500 रुपये) से बढ़ाकर 32 डॉलर होगी।

ITF के अनुसार, इतने कम वेतन से पता चलता है कि जहाज मालिकों ने उचित लेबर एग्रीमेंट नहीं किए हैं। ऐसे समझौते न होने की वजह से नाविक खतरे में हैं। उनके कॉन्ट्रैक्ट में अक्सर युद्ध क्षेत्र में काम करने का प्रावधान नहीं होता और जहाज मालिक ITF जैसे अनुरोधों का जवाब नहीं देते। इन नाविकों में मुख्यतः फिलीपींस, भारत, बांग्लादेश, म्यांमार और इंडोनेशिया के लोग शामिल हैं।